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अमर उजाला लाइव: लॉकडाउन 4.0 में कुछ ऐसा है फैक्टरियों का हाल, ये हैं उद्यमियों की मांग

Fri, 22 May 2020 12:21 PM IST
कपिल kapil प्रवीण शर्मा, अमर उजाला, बागपत
प्रवीण शर्मा, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 22 May 2020 12:21 PM IST
सार

  • प्रशिक्षित मजदूर लौट गए घर, अब उठानी पड़ रही दिक्कत
  • एक दूसरे की फैक्टरी से श्रमिक बुलाकर चला रहे कार्य
  • एक फीसदी मजदूरों के सहारे चलाई जा रही फैक्टरी

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Amar Ujala Live Report, Many factories have closed in present time Baghpat city during lockdown
बागपत यूपीआईडीसी स्थित फैक्टरी में काम करते मजदूर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागपत में लॉकडाउन 4 में शर्तों के साथ फैक्टरियों का पहिया घूमा जरूरी है, लेकिन रफ्तार पकड़नी बाकी है। औद्योगिक एरिया में अब तक सिर्फ 15 फैक्टरियों में संचालन शुरू हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत प्रशिक्षित कर्मचारियों की हैं। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर प्रशिक्षित श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। काम के लिए जो श्रमिक आ रहे हैं वह अप्रशिक्षित हैं, ऐसे में उद्योग को नुकसान का खतरा है। उद्यमियों को एक-दूसरे की फैक्टरी से श्रमिक उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। 

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इसलिए पड़ रहा अधिक असर
दिल्ली, मेरठ व सहारनपुर में प्रवेश बंद होने के कारण फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। बाजार बंद होने के कारण डिमांड भी न के बराकर है, जिसके कारण अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी है। 
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ब्याज और बिजली के बिल में मिले रियायत 
यूपीएसआईडीसी बागपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल प्रधान का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में 50 फैक्टरियां रेगुलर है और अधिकांश फैक्टरियों के मालिक दिल्ली में रहते हैं। सीमाएं सील होने के कारण वह बागपत नहीं आ पा रहे हैं, जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्र में 10 से 15 फैक्टरियों का ही संचालन हो पा रहा है। सरकार को फैक्टरी संचालकों के बिजली के बिल में रियायत के साथ बैंक से लिए गए लोन पर राहत देनी चाहिए। फैक्टरियों के पुन: संचालन के लिए बैंक से मिलने वाले लोन में एक वर्ष तक ब्याज में राहत मिलनी चाहिए।
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क्या कहते हैं उद्यमी
बागपत औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्तिक पॉलीमर्स के संचालक दीपक कुमार का कहना है कि एक तो मजदूरों का अभाव, दूसरा दिल्ली में प्रवेश बंद होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही बाजार में डिमांड है, वह स्वयं मशीन ऑपरेट कर पुराने कच्चे माल से नया माल तैयार कर रहे हैं। एक मशीन खराब हो गई है, रिपेयरिंग का सामान न मिलने के कारण मशीन बंद पड़ी है।

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दुर्गा इंटरप्राइजेज के संचालक मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि लॉकडाउन ने फैक्टरी संचालकों की कमर तोड़ दी है। प्रशिक्षित मजदूरों के अभाव में फैक्टरी का संचालक खुद काम करने को मजबूर हैं। दस फीसदी मजदूरों के सहारे फैक्टरी चलाई जा रही है। जो फैक्टरी बंद पड़ी है, उनके मजदूरों को बुलाकर लेकर कार्य कराया जा रहा है। फैक्टरी बंद होने के बावजूद बिजली और चौकीदार का खर्चे ने कर्जदार कर दिया है।

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