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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: आखिर असली में कब तब्दील होगा नकली हस्तिनापुर जंक्शन
Fri, 29 Jan 2021 02:45 PM IST
कपिल kapil
रविंद्र चौहान, अमर उजाला, मेरठ
रविंद्र चौहान, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Fri, 29 Jan 2021 02:45 PM IST
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नकली हस्तिनापुर जंक्शन
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले 35 वर्षों से हस्तिनापुर-बिजनौर के बीच प्रस्तावित रेल मार्ग फाइलों में कैद है। चार साल पहले केंद्र सरकार के बजट में इसके लिए घोषणा भी की गई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा। सांसद राजेंद्र अग्रवाल कई बार इस मामले को ही नहीं, हस्तिनापुर को विदुर कुटी से जोड़ने की भी बात उठा चुके हैं। इस बार बजट से लोगों को फिर आस जगी है।
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इस मांग को जनप्रतिनिधि और क्षेत्रीय जनता समय-समय पर उठाती रही है। हर चुनाव में हस्तिनापुर को रेल नेटवर्क से जोड़ने के दावे किए जाते हैं। आज तक यह दावा मूर्त रूप नहीं ले पाया। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने छह फरवरी, 1949 में चंडीगढ़ के साथ हस्तिनापुर के विकास की नींव रखी थी। चंडीगढ़ का विकास रात दिन हुआ, लेकिन हस्तिनापुर की उपेक्षा जारी रही। क्षेत्रीय जनता के आग्रह पर कई बार जनप्रतिनिधियों ने भी प्रयास किया कि यहां रेलवे की सौगात मिल जाए। दबाव में सर्वे कराया गया। लोगों को उम्मीद भी जागी लेकिन रेलवे ने प्रस्तावित परियोजना को को घाटे का सौदा बता दिया।
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जंबूद्वीप प्रबंधन कमेटी के प्रबंधक विजय कुमार जैन ने बताया कि ऐतिहासिक नगरी में रेलवे लाइन के लिए गजनी प्रमुख ज्ञानमती माता के आशीर्वाद से जंबूद्वीप में रेलवे जंक्शन के आधार पर परिकल्पना जंक्शन का निर्माण कराया गया। रेलवे लाइन का भी डेमो बनाया गया।
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- अब नए सर्वे के बाद ही आगे का काम होगा
बिजनौर के रेलवे स्टेशन अधीक्षक चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि रेल मार्ग के लिए मुख्यालय स्तर पर विचार चल रहा है। अभी कोई निर्देश नहीं है। चार साल पहले बजट भी आया था लेकिन कुछ हुआ नहीं। अब नए सिरे से सर्वे के बाद ही कुछ काम होगा।
- मेरठ से पानीपत के बीच भी नहीं दौड़ पाई ट्रेन
मेरठ-पानीपत के बीच रेलवे लाइन के सर्वे के बाद इसका उद्घाटन तक करा दिया गया था। पश्चिम उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन साबित होने वाली रेल लाइन का निर्माण शुरू नहीं हुआ।
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