अमर उजाला एक्सक्लूसिव: सिमट रहे युवाओं के कदम, तकनीकी कोर्सों के प्रति घटा रुझान, कॉलेजों में सीटें खाली
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आत्मनिर्भर भारत अभियान में युवाओं के कदम सिमट रहे हैं। तकनीक में पारंगत होने के बजाय युवा इससे किनारा करने लगे हैं। तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र राजकीय पॉलीटेक्निक में ही प्रवेश का संकट खड़ा हो गया है। राजकीय महिला पॉलीटेक्निक और जसाला के एमएमआईटी राजकीय कॉलेज में छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी आ रही है। महिला पॉलीटेक्निक में संचालित पांच में दो कोर्स बंद हो चुके हैं। संचालित कोर्स में भी सीटें खाली रहती हैं।
शामली में 1989 में राजकीय महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज की स्थापना हुई थी। 6.8 एकड़ भूमि में निर्मित कॉलेज कैंपस में संचालित कोर्सों के अलग-अलग ब्लाक के अलावा तीन छात्रावास बने हुए हैं। कॉलेज के स्थापना के समय यहां पर पांच कोर्स संचालित किए गए थे। उस समय युवाओं में पॉलीटेक्निक के प्रति रुझान होने के चलते सभी सीटें भर जाती थीं और बहुत से छात्र-छात्राएं प्रवेश पाने से वंचित रह जाते थे। पिछले कई वर्षों से छात्राओं की संख्या में कमी आने से कॉलेज में सीटें खाली रह जाती हैं। 2019-20 के शैक्षिक सत्र में महिला पॉलीटेक्निक में संचालित डिप्लोमा स्तरीय तीन वर्षीय कोर्स में कुल 540 सीट के सापेक्ष कुल 188 छात्राएं ही हैं।
194 अभ्यर्थियों ने छोड़ी थी प्रवेश परीक्षा
हाल ही में 12 सितंबर को आरके इंटर कॉलेज शामली परीक्षा केंद्र पर दो पाली में हुई पॉलीटेक्निक की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में भी छात्रों का रुझान कम ही देखने को मिला। केंद्र पर कुल 437 छात्रों में 243 ही परीक्षा में सम्मलित हुए, जबकि 194 ने परीक्षा छोड़ दी। ऐसी स्थिति में इस बार भी कॉलेजों में सीटें खाली रहने की संभावना बन रही है।
महिला पॉलीटेक्निक में संचालित कोर्स
फैशन डिजाइनिंग एंड गारमेंट टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
बंद हुए कोर्स
माडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेटेरियल प्रेक्टिसीज, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा एकाउंटेसी
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एमएमआईटी जसाला में भी सीटें खाली
एमएसआईटी राजकीय पॉलीटेक्निक जसाला में दो साल से चल रहा है। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए तीन कोर्स संचालित हैं। इनमें मैकेनिकल प्रोडक्शन में सभी 60 सीटें भरी हैं, जबकि फूड टेक्नोलॉजी में 10 और पेपर एंड पल्प टेक्नोलॉजी में छह छात्र हैं। पिछले सत्र में पेपर एंड पल्प टेक्नोलॉजी में सभी 60 सीटें खाली रह गईं थीं।
छात्राओं में फैशन डिजाइनिंग का क्रेज
पॉलीटेक्निक कॉलेजों में छात्राओं में फैशन डिजाइनिंग एवं गारमेंट टेक्नोलॉजी में सबसे ज्यादा क्रेज है। छात्राओं के सबसे ज्यादा प्रवेश इसी कोर्स में हैं। सत्र 2019-20 में प्रथम व द्वितीय वर्ष में 48-48 व तृतीय वर्ष में 44 छात्राएं रही, जबकि अन्य दो कोर्सों में बहुत कम छात्राएं हैं। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स प्रदेश में केवल शामली, झांसी, लखनऊ व बनारस के कॉलेज में ही है।
पॉलीटेक्निक कॉलेज में छात्राओं की संख्या कम होने की प्रमुख वजह जागरुकता की कमी है। 2004 के बाद निजी कॉलेजों का खुलना भी इसका एक कारण है। अब लगभग सभी जिलों में निजी पॉलीटेक्निक कॉलेज हैं, इसलिए कोई अभिभावक बेटियों को दूर के कॉलेज में नहीं भेजना चाहता। कॉलेज स्तर से हर वर्ष युवाओं को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाता है। - जितेंद्र कुमार, प्राचार्य, राजकीय महिला पॉलीटेक्निक।
पॉलीटेक्निक में रोजगार के अवसर बहुत हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम होने की वजह निजी कॉलेजों की संख्या अधिक होना है। राजकीय कॉलेजों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, सक्षम बालिका संपन्न परिवार योजना, कन्या सुमंगला योजना और एआईसीटीई द्वारा सक्षम एवं प्रगति स्कीम दी जाती है। - नवीन कुमार, प्रभारी एमएमआईटी जसाला एवं विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स।
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