खतरा : शहर में 18 मीटर नीचे पहुंचा भूगर्भ जलस्तर, प्रमुख सचिव ने तलब की रिपोर्ट और फिर...
भूगर्भ जल विभाग द्वारा आंकड़े जारी किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ शहर का जलस्तर 2020 में 18.59 मीटर नीचे जा चुका है। पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट।
विस्तार
केरल में मानसून पहुंचने के बीच प्रदेश सरकार ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग की चिंता शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में मेरठ विकास प्राधिकरण से रेन वाटर हार्वेस्टिंग की प्रगति रिपोर्ट तलब की तो एमडीए ने 11 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का दावा कर दिया। हालांकि दो वर्ष से नौ स्थानों पर प्रस्तावित रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए एक भी टेंडर नहीं हो सका है।
उधर, भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ शहर का जलस्तर 2020 में 18.59 मीटर नीचे जा चुका है। बीते 10 वर्ष में इसका वार्षिक औसत 3.37 मीटर है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग की समीक्षा मानसून के दौरान ही होती है। भूगर्भ जल विभाग भी वर्ष में दो बार प्री-मानूसन और पोस्ट मानसून जलस्तर के आंकड़े जारी करता है।
एमडीए ने पिछले वर्ष जिमखाना मैदान में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया था। वहीं, एमडीए के मानचित्र स्वीकृति में 300 वर्ग मीटर और इससे ज्यादा के मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है। ऐसा न करने पर एफडीआर के रूप में राशि जमा करनी होती है। सिस्टम लगाने पर इसे वापस कर दिया जाता है। मुख्य नगर नियोजक इश्तियाक अहमद कहते हैं कि लोग जागरूक हो रहे हैं। काफी संख्या में एफडीआर वापस किए गए हैं।
ये हैं एफडीआर शुल्क
300 से 500 वर्ग मीटर: 20 हजार
500 से 1000 वर्ग मीटर: 30 हजार
1000 से पांच हजार वर्ग मीटर: 50 हजार
पांच हजार वर्ग मीटर से अधिक: एक लाख
खरखौदा ब्लाक हालात में सबसे ज्यादा खराब
भूगर्भ जलस्तर की गिरावट में खरखौदा ब्लाक की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां सबमर्सिबल से पानी की खपत अधिक है। 2015 से अब तक जल स्तर में दो फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुका है। यहां जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन डाली जानी है। खरखौदा ब्लाक में इस समय भूगर्भ जलस्तर 16.58 मीटर पर है, जबकि रजपुरा में 15.85, माछरा में 14.68, मेरठ में 13.95, रोहटा में 11.57, सरुरपुर में 12.08, परीक्षितगढ़ में 11.81, सरधना में 8.67, मवाना में 10.37, जानी में 10.30, दौराला में 9.68 और हस्तिनापुर में 11.41 मीटर है।
खुद ही करनी होगी शुरुआत
लगातार गिरते जलस्तर पर सहायक भूविज्ञानी नौरतन कमल और आशीष कुमार गुप्ता लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि पानी की बचत के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर इसकी शुरुआत खुद करनी होगी।
इस बार लगाएंगे नौ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
प्रमुख सचिव ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग की रिपोर्ट मांगी थी। हम इस बार नौ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रयास करेंगे। - मृदुल चौधरी, उपाध्यक्ष, एमडीए