अमर उजाला एक्सक्लूसिव: रोडवेज हर माह नाले में बहा रहा 10.50 लाख लीटर पानी, पढ़िए खास रिपोर्ट
यहां रोडवेज हर महीने 10 लाख से ज्यादा लीटर पानी नाले में बहा रहा है। एक बस की मैनुअल धुलाई में करीब 350 लीटर पानी खर्च होता है। महीने के हिसाब से यह 10.50 लाख लीटर होता है।
विस्तार
तीन साल पहले वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट लगाकर जल संरक्षण की मुहिम शुरू करने वाला रोडवेज अब लाखों लीटर पानी का दोहन कर उसे गटर में बहा रहा है। सेंट्रल वर्कशॉप में बसों की धुलाई पर रोजाना करीब 35 हजार लीटर पानी इस्तेमाल हो रहा है, जो रिसाइकिलिंग करने के बजाय थापर नगर नाले में गिराया जा रहा है। यह हाल तब है जब सरकारी विभागों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के अलावा अधिक पानी इस्तेमाल होने वाली जगहों पर वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट लगाने के आदेश हैं।
मेरठ में रोडवेज ने तीन साल पहले बसों की धुलाई में खर्च होने वाले लाखों लीटर पानी को बचाने के लिए दो ऑटोमैटिक वाशिंग प्लांट के साथ-साथ वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट भी लगाया था। ऑटोमैटिक वाशिंग प्लांट में बस की धुलाई करीब 50 लीटर पानी में हो जाती थी और इसमें इस्तेमाल पानी को प्लांट की मदद से रिसाइकिल कर लिया जाता था। अब एक ऑटोमैटिक वाशिंग प्लांट ही बचा है और रिसाइकिलिंग प्लांट अरसे से खराब पड़ा है। सेंट्रल वर्कशॉप में रोजाना करीब 100 बसों की धुलाई की जाती है। एक बस की मैनुअल धुलाई में करीब 350 लीटर पानी खर्च होता है। महीने के हिसाब से यह 10.50 लाख लीटर होता है।
प्लांट ठीक कराने के लिए बजट मांगेंगे
रैपिड रेल परियोजना के चलते वर्कशॉप का काफी हिस्सा तोड़ा जा चुका है। इससे सबकुछ गड़बड़ा गया है। वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट खराब पड़ा है। इसे ठीक कराने के लिए बजट मांगा जाएगा। - एसएल शर्मा, सेवा प्रबंधक, मेरठ रीजन
नौचंदी और शास्त्री नगर में 25 मीटर नीचे पहुंचा भूगर्भ जलस्तर
अब भी नहीं संभले तो हालात और भयावह हो जाएंगे। अमर उजाला लगातार पानी बचाने के प्रति लोगों को जागरूक कर रहा है लेकिन स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सोमवार को भूगर्भ जल विभाग ने पोस्ट मानसून 2020 के सात स्थानों के आंकड़े जारी किए हैं।
शहर का औसत जलस्तर 18.56 मीटर पर पहुंच गया है। तेजगढ़ी से हापुड़ चुंगी तक का क्षेत्र शास्त्री नगर के पॉश इलाके में शामिल है। नौचंदी इलाके में मिश्रित आबादी है। यहां डेयरियों में पानी का दोहन अधिक होने से जलस्तर 25.41 मीटर पर पहुंच गया है। 40 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर कैंपस का जलस्तर बढ़ाने में सफल रहे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर के आसपास के इलाकों का जलस्तर 24.57 मीटर तक पहुंच चुका है।
इन क्षेत्रों में भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने के लिए वार्डों में पानी बचाने के लिए सहायक नियुक्त करने होंगे। सहायक भूभौतिकविद नवरत्न कमल का कहना है कि क्षेत्रवासियों को सतर्क हो जाना चाहिए। कुछ लोग कार धोने सहित अन्य कार्यों में पानी बर्बाद कर रहे हैं।
ये है क्षेत्रवार स्थिति
क्षेत्र भूगर्भ जल की स्थिति
नौचंदी: 25.41
तेजगढ़ी से हापुड़ चुंगी तक: 25.32
जेलचुंगी: 24.28
मॉल रोड: 21.72
पीएसी छठी वाहिनी: 16.57
सीसीएसयू के आसपास - 24.57
गढ़ रोड: 23.01
(नोट: भूगर्भ जलस्तर के आंकड़े मीटर में हैं।)
एक सप्ताह में कराएं तालाबों की खुदाई : सीडीओ
कैच द रेन अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए बैठकें शुरू कर दी गई हैं। तालाबों की खोदाई को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी ने लघु सिंचाई और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने एक सप्ताह में कार्ययोजना तैयार कर इस पर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इस अभियान में कई विभागों को मिलकर काम करना है, ताकि मानसून की बूंद-बूंद को बचाया जा सके। लघु सिंचाई विभाग ने 16 और सिंचाई विभाग ने 73 तालाबों की जिम्मेदारी ली है। मुख्य विकास अधिकारी ने इसके लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव मांगे हैं।
57 गांवों में पानी के लिए बनेगा सुरक्षा प्लान
अटल भूजल योजना के तहत मेरठ के अतिदोहित खरखौदा और रजपुरा ब्लॉक के 57 गांवों में बेस लाइन सर्वे किया जा रहा है। भूगर्भ जल विभाग के अधिकारी इसमें पानी के रिचार्ज सहित अन्य संसाधन खोज रहे हैं. ताकि पानी बचाने के लिए सुरक्षा प्लान तैयार किया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी ने इस बारे में अभी तक की प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी है।