अमर उजाला एक्सक्लूसिव: गंगा की प्रदूषण मुक्ति के लिए निगरानी और कड़ी, मोदीपुरम में बना नियंत्रण कक्ष
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गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए निगरानी और कड़ी होने जा रही है। इसके लिए प्रदेश के नौ जिलों कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत मेरठ में मोदीपुरम स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में भी कंट्रोल रूम तैयार किया गया है।
इसके माध्यम से उन फैक्टरियों और नालों की निगरानी की जाएगी जिनका गंदा पानी गंगा तक पहुंचता है। 24 घंटे काम करने वाले इन केंद्रों में पूरा डाटा ऑनलाइन रहेगा। इसे केंद्रीय व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी देख सकेंगे।
कंट्रोल रूम से मेरठ और बागपत जिले में गंगा, हिंडन, कृष्णा, यमुना और काली नदी की निगरानी भी की जाएगी, क्योंकि ये नदिंयां भी गंगा में मिलती है। इन नदियों में जिन फैक्टरियों का दूषित जल गिरता है, उनकी जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि फैक्टरियों द्वारा छोड़ा गया पानी मानकों के अनुसार ट्रीट किया गया है या नहीं। फैक्टरी के ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा सीवरेज की भी लगातार निगरानी होगी।
कंट्रोल रूम को अवर अभियंता एसपी सिंह की देखरेख में तैयार किया गया है। इसकी जिम्मेदारी जेआरएफ राजबहादुर, धंनजय, बासू आदि की रहेगी।
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नियंत्रण कक्ष नदियां
मेरठ गंगा, हिंडन और काली
वाराणसी गंगा व वरुणा
आगरा यमुना
गाजियाबाद हिंडन
झांसी बेतवा
गोरखपुर घाघरा, आमी, राप्ती
मुरादाबाद रामगंगा
लखनऊ गोमती, सई
अयोध्या सरयू, तानसी
कड़ी कार्रवाई होगी
अब औद्योगिक इकाइयां दूषित जल नदी-नालों में नहीं छोड़ सकेंगी। उनके ऐसा करने पर गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी और कार्रवाई होगी। - डॉ. योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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