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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Amar Ujala Exclusive Report: Meerut was behind the ranking of Ease of Doing due to lack of land for industries

एक्सक्लूसिव: ईज ऑफ डूइंग की रैकिंग में क्यों पिछड़ा मेरठ, खास रिपोर्ट में पढ़िए वजह

Fri, 18 Sep 2020 02:00 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 18 Sep 2020 02:00 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: Meerut was behind the ranking of Ease of Doing due to lack of land for industries
जिला प्रशासनिक अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

जमीन की कमी मेरठ जिले के औद्योगिक विकास में बट्टा लगा रही है। इंवेस्टर समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से आकर्षित हुए निवेशक जिले में जमीन न मिलने के कारण अपना रुख बदल रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग की रैकिंग में मेरठ के पिछड़ने का बड़ा कारण उद्योगों को विस्तार के लिए जमीन न मिलना है। 

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प्रशासन साल भर में भी उद्योगों को विस्तार के लिए जमीन नहीं दे पाया है। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण जिले में अमूल सरीखी बड़ी कंपनियों ने मेरठ में निवेश से हाथ खींच लिए हैं। वहीं रोजगार और आर्थिक उन्नति को भी झटका लगा है।
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मेरठ जिले में दो साल से 20 से अधिक उद्यमियों की जमीन की मांग लंबित है। 200 एकड़ भूमि की मांग के बावजूद प्रशासन किसी भी उद्यमी को जमीन उपलब्ध नहीं करा सका है। अगर उद्यमियों को जमीन मिल जाती तो जिले में 500 करोड़ रुपये का निवेश हो सकता था। 120 इकाइयां भी चालू हो सकती हैं। इनसे तीन हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। ईज ऑफ डूइंग में मेरठ को प्रदेश में 18वां स्थान मिलने की सबसे बड़ी वजह जमीन न मिलना ही है। 
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इन कंपनियों की अटकी हैं फाइलें
अरोड़ा फूड इंडिया, सरीन स्पोर्ट्स, अवनी इलेक्ट्रिक्लस, जेवीएस स्पोर्टिंग गुड़्स, सनराईजेसस र्स्पोटिंग गुड्स, ईएम एक्सक्यूटिम, भल्ला स्पोर्ट्स, मोर्डन स्टील, महावीर पैकिंग, अमूल डेरी, एएनएम, एग्रो प्रोडक्ट, एएनएम एग्रो प्रोडक्ट द्वितीय, यदुवंशी इंडस्ट्रीज, डीके एंड संस, बीएस इंडस्ट्रीज, एचएसएम इंटरप्राइजेज, मेरठ मशीनरी टूल्स की जमीन की मांग यूपीएसआईडीसी के पास लंबित है। 

यह भी पढ़ें: Exclusive: पश्चिमी यूपी की 12 चीनी मिलों पर 626 करोड़ बकाया, भुगतान के इंतजार में सवा लाख किसान

गेझा में भूमि चिह्नित, वार्ता न होने से बात आगे नहीं बढ़ी
यूपीएसआईडीसी ने गेझा में 150 किसानों की 250 एकड़ जमीन को औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिह्नित किया है। शासन ने प्रस्ताव को जल्द पूरा करने का आदेश भी दिया मगर जिला प्रशासन की हीलाहवाली के कारण प्रस्ताव अटका पड़ा है। किसान जमीन देने को तैयार हैं मगर प्रशासन वार्ता ही नहीं कर रहा। अगर गेझा की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बना तो यहां 250 एकड़ जमीन में से 150 एकड़ भूमि सड़क, संसाधन व अन्य विकास में जाएगी। 100 एकड़ जमीन पर इकाइयां स्थापित हो सकती हैं। 

500 करोड़ का सीधा निवेश संभव
200 एकड़ जमीन की मांग तो वो है जो दिख रही है, इसके अतिरिक्त जमीन की अन्य उद्यमियों की मांग भी है। इतनी जमीन में सीधे 500 करोड़ का औद्योगिक निवेश संभव है। नए कारोबार शुरू हो सकते हैं। - पंकज गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए 

भूमि के प्रस्ताव पर काम आगे बढ़ाएंगे
औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए गेझा में भूमि का प्रस्ताव तैयार है। इस पर काम शुरू होगा। अन्य स्थान पर जिले में जमीन मिलना मुश्किल हो रहा है। जमीन खाली नहीं है। उद्यमियों को भूमि देने में परेशानी आ रही है। - सतीश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीएसआईडीसी 

तीन हजार लोगों का रोजगार प्रभावित
जमीन की कमी से औद्योगिक निवेश आगे नहीं बढ़ रहा। अगर जमीन हो तो नई फैक्टरी लगेंगी और पुरानी फैक्टरी का विस्तार हो। उत्पादन और रोजगार बढ़ेगा। 500 करोड़ के निवेश से तीन हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। - रवि प्रकाश अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

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