एक्सक्लूसिव: 40 करोड़ की जमीन पर अमर उजाला की पड़ताल, धड़ल्ले से हो रहे कब्जे, सामने आया पूरा सच
- 40 करोड़ की सरकारी जमीन पर हो रहा कब्जा
- अक्तूबर, 2020 में डीएम ने जांच के बाद काम रुकवाया था, दोबारा शुरू हो गया
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिला प्रशासन की जानकारी में आने के बाद भी गढ़ रोड पर बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा हो रहा है। इस जमीन को तहसीलदार ने ग्राम सभा और वर्तमान में नगर निगम की संपत्ति के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था, उस जमीन के दो खसरा नंबर को एमडीए ने एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को बेच दिया है।
वर्तमान में इस जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपये से ज्यादा है। अहम बात यह भी है कि करीब चार माह पहले जिलाधिकारी ने काम रुकवाते हुए मामले में जांच के आदेश दिए थे। जांच में जमीन सरकारी होने की पुष्टि भी हो गई। बावजूद इसके आला अधिकारियों ने यहां चल रहा काम रुकवाने का प्रयास नहीं किया है।
औरंगशाहपुर डिग्गी में आनंद अस्पताल से पहले खाली जमीन है। जमीन के खसरा नंबर 254 से 260 और 263, 325/1, 325/2, तथा 327 व 328 का 1986 में अधिग्रहण के लिए गजट हुआ। संबंधित लोगों को मुआवजा देकर जमीन एमडीए को सौंप दी गई। इसके खसरा नंबर 327 व 328 की जमीन करीब आठ हजार वर्गमीटर सहित कुल 38,732.60 वर्गमीटर जुलाई, 2007 में एमडीए ने जय कृष्ण एस्टेट डेवलपर्स के निदेशक आशीष वाड़िया को 12 प्रतिशत फ्रीहोल्ड धनराशि सहित 16,86,19,175 रुपये में आवासीय एवं व्यावसायिक के लिए बेच दी थी। लॉकडाउन के दौरान यहां मिट्टी का भराव शुरू किया गया था।
संयुक्त टीम ने की थी जांच
इस बारे में शिकायत पर जिलाधिकारी के. बालाजी ने अक्तूबर में काम रुकवाने का आदेश देते हुए सहायक नगर आयुक्त, अपर नगर मजिस्ट्रेट सिविल लाइन की संयुक्त टीम बनाकर जांच कराई। टीम की जांच रिपोर्ट पर अपर जिलाधिकारी नगर अजय तिवारी ने 20 नवंबर को उपजिलाधिकारी सदर से मामले में तहसील अभिलेखों का परीक्षण कर रिपोर्ट मांगी थी।
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लेखपाल की रिपोर्ट से सामने आई 1954 के बाद की सच्चाई
अभिलेखों से पता चला कि 31 अक्तूबर, 1954 को तत्कालीन तहसीलदार ने भट्टा खिश्त की इस जमीन को श्रेणी 15-3 के तहत मानते हुए ग्राम समाज में दर्ज करने का आदेश दिया था। अब यह क्षेत्र नगर निगम में है। बाद में तत्कालीन लेखपाल ने जालसाजी कर खतौनी में निजी व्यक्तियों के नाम अंकित कर दिए। अधिग्रहण के बाद इन व्यक्तियों के परिजनों ने मुआवजा भी ले लिया। मौजूदा लेखपाल ने रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया कि सिर्फ खसरा नंबर 327 और 328 ही नहीं, खसरा नंबर 329, 330 और 331 भी भट्टा खिश्त के नंबर है। लेखपाल ने खसरा नंबर 327 व 328 को नगर निगम में दर्ज कराने का अनुरोध किया है।
डीएम को सौंप दी है जांच रिपोर्ट
जांच कराई थी और रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी है। जिलाधिकारी द्वारा जांच रिपोर्ट के परीक्षण उपरांत प्राप्त आदेश पर आगे की कार्रवाई तय होगी। - संदीप भागिया, एसडीएम, सदर
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