ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर मंजूरी के बाद भी कर्ज क्यों नहीं दे रहे बैंक, जांच में फंसी रहती हैं फाइलें
- प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की रोजगार योजनाओं में बैंकों की रुचि ही नहीं
- जिला उद्योग केंद्र की हरी झंडी मिलने के बाद भी जांच में महीनों फंसी रहती हैं फाइलें
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स्वरोजगार का सपना संजोए युवाओं को व्यापार शुरू करने के लिए बैंक ऋण देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। पहले जिला उद्योग केंद्रों का चक्कर काटने के बाद अब इनकी फाइलें बैंकों के पास भले ही पहुंच गई हैं पर उनके ऋण स्वीकृत नहीं हुए हैं। बैंकों की लंबी और पेंचीदगियों से भरी प्रक्रिया के कारण बेरोजगार हताश हो गए हैं। वर्ष 2019-20 में दो योजनाओं में बैंक द्वारा लोन स्वीकृत होने के बाद भी अभी तक 44 लोगों के आवेदन लंबित हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत जिला उद्योग केंद्र ने वर्ष 2020-21 में 370 लोगों को लोन की फाइल प्रेषित की थी। बैंकों ने मात्र 37 लोगों को पात्र माना। पांच माह से अधिक समय बाद भी इनमें से भी 29 लोगों को 73.55 लाख का ऋण दिया गया। इसी योजना में वर्ष 2019-20 में 465 लोगों की फाइल प्रेषित की गई थी। बैंकों ने 65 को स्वीकृति दी और 56 को ही 1.77 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। इसी तरह मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत वर्ष 2019-20 में जिला उद्योग केंद्र ने 528 लोगों के नाम बैंकों को प्रेषित किए। बैंकों द्वारा 111 लोगों को 12.83 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई और मात्र 77 को दो करोड़ का लोन दिया गया। 34 को कर्ज मिल ही नहीं पाया।
इसी तरह वर्ष 2020-21 में 224 युवा आवेदकों की फाइल भेजी गई, जिसमें से बैंकों ने 17 लोगों को पात्र माना और अभी तक सिर्फ नौ लोगों को ही 24.44 लाख रुपये का लोन दिया गया है।
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कोरोना के चलते कर्ज वितरण प्रभावित
वित्त वर्ष 2019-20 के बहुत से लोन कोरोना महामारी के चलते स्वीकृत नहीं हो पाए थे। अब इन्हें स्वीकृत कराने के साथ ही वित्त वर्ष 2020-21 के लोन का भी वितरण किया जा रहा है। - वीरेंद्र कौशल, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र
बैंकों को करनी होती है जांच
जिला उद्योग केंद्र से फाइल मिलने के बाद बैंक ग्रेडिंग, आवेदकों के ज्ञान और उनके आइडिया आदि की जांच करता है। यह भी देखा जाता है कि लोन लेने वाला बैंक का डिफाल्टर तो नहीं है। - संजय कुमार, एलडीएम, मेरठ
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