अमर उजाला एक्सक्लूसिव: दस लाख उपभोक्ता दबाए बैठे हैं 4200 करोड़, देखें छह जोन का पूरा आंकड़ा
चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक आते ही पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने जहां राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए ताकत झोंक दी है। वहीं विभाग के दस हजार से ज्यादा के बकाएदार उपभोक्ताओं पर 4200 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया हो चुका है।
बकाया राशि आम उपभोक्ताओं की है। इसमें सरकारी, बुनकर और नलकूप किसान शामिल नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी विभाग और नलकूप किसान अमूमन वित्तीय वर्ष के अंत में ही अपना बकाया जमा करते हैं। कोरोना के चलते पहले से ही राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है।
दस हजार से ज्यादा बकाया वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने से पहले तगादा करने की योजना भी कारगर साबित नहीं हो रही है। मेरठ जोन के एक लाख 38 हजार 932 उपभोक्ताओं पर भी 497 करोड़ रुपये बकाया है।
लगातार बढ़ रहे बिजली बकाया की वजह से कंपनियों का घाटा होता है और वे बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग करती है। इसके बाद विद्युत नियामक आयोग बढ़ी बिजली दरों पर अपनी बमुहर लगा देता है। इसका खामियाजा उन उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है, जो अपना बिल समय से जमा करा देते हैं।
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उपभोक्ता और उन पर बकाया
जोन उपभोक्ता बकाया राशि करोड़ में
मेरठ 138932 497
गाजियाबाद 61677 262
बुलंदशहर 161186 641
सहारनपुर 310737 1236
नोएडा 55709 307
मुरादाबाद 297397 1214
(नोट: आंकड़े 10 फरवरी तक के हैं और ऊर्जा भवन से लिए गए हैं।)
10 हजार रुपये से ज्यादा राशि के बकायेदार कनेक्शन कटने से बचने के लिए जल्द से जल्द बकाया बिल जमा करा दे। ऐसा नहीं होने पर इनके कनेक्शन काट दिए जाएंगे। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल
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