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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Amar Ujala Exclusive Report: 13,537 hectares of acreage has decreased in 23 years, but 40 percent production has increased in Meerut district

अमर उजाला एक्सक्लूसिव: 23 साल में घटा 13,537 हेक्टेयर रकबा, फिर भी 40 फीसदी बढ़ा उत्पादन

Wed, 24 Feb 2021 03:31 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 24 Feb 2021 03:31 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: 13,537 hectares of acreage has decreased in 23 years, but 40 percent production has increased in Meerut district
खेती की जमीन। - फोटो : amar ujala

शहरीकरण और विकास कार्यों के कारण पिछले 23 साल में मेरठ जिले में जमीन का रकबा 13,537 हेक्टेयर घट गया है लेकिन, फसल उत्पादन 35 से 40 फीसदी तक बढ़ गया है।

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कृषि विशेषज्ञ इसकी वजह किसानों की मेहनत, उन्नत बीज, कृषि की आधुनिक तकनीकें, खाद और पोषक तत्व बता रहे हैं। हालांकि बेतरकीब और असंतुलित खाद और कीटनाशकों के प्रयोग से अब जमीन की उर्वरा शक्ति में ठहराव आने लगा है।  
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1997 में मेरठ को विभाजित कर बागपत के जिला बनने के बाद जिले के किसानों की जोत कम हुई है। दूसरी ओर फसलों का औसत उत्पादन बढ़ गया है। पहले जिले में धान का औसत उत्पादन 21.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था। 
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अब यह 28.44 क्विंटल हो गया है। इसी तरह गन्ने का उत्पादन 647.92 क्विंटल से बढ़कर 910 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार पहले किसान देसी बीज, गोबर की खाद और परंपरागत तकनीक से खेती करते थे। अब सिंचाई के संसाधन बढ़ गए हैं।

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गन्ने ने गायब कर दीं कई फसलें 
जिले में पहले सांवा, तिल, सनई, कपास, सूरजमुखी आदि की खेती खूब होती थी। अब इन फसलों का उत्पादन तो दूर किसानों की ही नई पीढ़ी नाम तक नहीं जानती है। यही नहीं, गन्ना उत्पादन की बहुतायत के कारण गेहूं, धान, सरसों, चना, मटर, दालों आदि का रकबा तुलनात्मक रूप से कम हुआ है।  

बहुफसली खेती से ही खुशहाली
उन्नत बीजों, रासायनिक खादों और तकनीक से उत्पादन तो बढ़ा है लेकिन फसल चक्र टूटने और गन्ने की बहुतायत से किसानों को दिक्कत भी हो रही है। बहुफसली खेती से ही किसान खुशहाल हो सकते हैं। - ब्रजेश चंद्र, उप निदेशक, कृषि 

जमीन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें
अधिक पैदावार के लिए रासायनिक खादों और कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग उर्वरा शक्ति के लिए संकट बनता जा रहा है। जमीन की सेहत के लिए गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। - डॉ. दुष्यंत कुमार, जिला गन्ना अधिकारी

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