अमर उजाला अभियान: टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के बोझ से बैठ रही यातायात व्यवस्था
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मेरठ जनपद में अब तक छोटे-बड़े साढ़े सात लाख वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। बाहरी जिलों व राज्यों में पंजीकृत वाहनों की भी भरमार है, जो रोजाना शहर और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। वाहनों के बढ़ते बोझ से शहर का ट्रैफिक बैठने लगा है। अभी तक शहर को जाम मुक्त करने की कोई ठोस नीति नहीं बनी है। यात्रियों के सापेक्ष आवश्यक वाहन रूट सर्वे भी नहीं कराया जा रहा। शहर में फ्री पॉलिसी के नाम पर करीब बीस हजार टेंपो-ऑटो और ई-रिक्शा उतर चुके हैं, जो जाम का सबसे बड़ा कारण हैं। इन वाहनों का धड़ल्ले से रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। रूट फ्री पॉलिसी का फायदा उठाकर ऑटो, टेंपो चालक सरकारी राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं।
आरटीए कराता है रूट सर्वे
रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी (आरटीए) जिला प्रशासन के साथ रूटों पर यात्रियों की संख्या और उनकी जरूरत के वाहनों की संख्या का रूट सर्वे कराता है। सर्वे के बाद ही उक्त रूट पर सार्वजनिक वाहनों को परमिट जारी किए जाते हैं। समय पर रूट सर्वे कराकर मांग के अनुसार वाहनों की संख्या बढ़ाई जाती है।
रूट फ्री पॉलिसी बनी मुसीबत
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए मंडलायुक्त अनिता सी. मेश्राम ने बुधवार को बैठक कर मल्टीलेवल पार्किंग और सेटेलाइट बस अड्डे आदि पर काम करने के लिए कहा है। जाम का सबसे बड़ा कारण बन रही टेंपो, ऑटो व ई-रिक्शा के लिए ‘रूट फ्री पॉलिसी’ पर बैठक में कोई बात नहीं हुई। रूट और वाहनों की संख्या निर्धारित नहीं होने से इनकी संख्या पर लगाम नहीं लग पा रहा है। शहर में 16 किलोमीटर के सर्किल में चलने के लिए टेंपो और ऑटो को कांट्रेक्ट कैरिज का परमिट दिया गया है। ई-रिक्शा के लिए परमिट की वैधता ही नहीं है। टेंपो और ऑटो कांट्रेक्ट कैरिज परमिट पर स्टेज कैरिज परमिट (बीच रूट से सवारी उठाना) का फायदा उठाकर सड़क से सवारी बैठाते और उतारते चलते हैं।
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660 टेंपो की जगह, चार हजार हो रहे संचालित
आरटीए ने शहर में केवल 660 सात सीटर टेंपो को ही परमिट जारी करने के आदेश दिए थे। लेकिन दो हजार टेंपो रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली से बाहर किए गए करीब दो हजार टेंपो भी जिले में दौड़ रहे हैं। टेंपो के अलावा 16 हजार ऑटो और ई-रिक्शा भी सड़कों पर उतर चुके हैं।
कांट्रेक्ट कैरिज में नहीं कर सकते रूटों का आवंटन
कांट्रेक्ट कैरिज परमिट के तहत वाहन किसी एक निश्चित स्थान से दूसरे निश्चित स्थान तक ही लोगों को बुक करके ले जा सकता है। इसके चलते इनका रूट तय नहीं हो सकता। स्टेज कैरिज परमिट पर सवारियों को तय रूट से उठाया और उतारा जा सकता है। स्टेज कैरिज परमिट में ही रूटों का आवंटन होता है। ऑटो व टेंपो को स्टेज कैरिज परमिट पर चलना चाहिए था, लेकिन मेरठ में ये कांट्रेक्ट कैरिज परमिट पर चल रहे हैं।
शहर में टेंपो, ऑटो व ई-रिक्शा के लिए फ्री पॉलिसी की सुविधा दी गई है। टेंपो के लिए 660 परमिट निर्धारित हैं, जो पूरे हो चुके हैं। ऑटो व ई-रिक्शा की संख्या के लिए कोई मानक नहीं है। - डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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