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Meerut: असत्य पर सत्य की जीत, दशानन के साथ ही इन बुराइयों के खात्मे का लें संकल्प

Wed, 05 Oct 2022 02:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 05 Oct 2022 02:03 AM IST
सार

विजयदशमी के पर्व पर अबकी बार मेरठ की रावण रूपी 10 बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लें।

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Along with Dashanan, take a pledge to eliminate these evils
दशहरे की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस दशहरा नए संकल्प और संदेश के साथ जीवन को आगे बढ़ाएं। अपनी कुछ गलत आदतों को त्याग देना ही बुराई पर अच्छाई की विजय का सबसे बेहतर उदाहरण है। आइए विजयदशमी के पर्व पर अबकी बार मेरठ की रावण रूपी 10 बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लें। अधिकारियों ने भी इन बुराईयों को मिटाने का संकल्प लिया है, लेकिन यह सब हमारे के सहयोग और संकल्प के बिना संभव नहीं है।
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1. मिलावटखोरी
मिलावटखोरी खत्म नहीं हो रही है। इस साल एफएसडीए ने 200 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए, जिनमें से 104 नमूने फेल निकले हैं। हल्दी, पनीर, तेल, मिर्च और दूध तक में मिलावट है। यह न सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि खराब खाद्य पदार्थ लेने से आर्थिक नुकसान भी होता है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अभिहित अधिकारी दीपक सिंह का कहना है कि सैंपल लिए जा रहे हैं और जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर कार्रवाई भी की जाती है। जुर्माना वसूला जाता है और रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाती है।
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2. टूटी हैं सड़कें, घायल हो रहे हैं लोग
- शहर की अधिकतर सड़कें टूटी पड़ी हैं। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर लोग घायल हो रहे हैं। नगर निगम, पीडब्लूडी, एमडीए और आवास विकास अपनी सड़कों को गड्ढा मुक्त नहीं कर रहे हैं। नगर निगम के चीफ इंजीनियर यशवंत कुमार का कहना है कि सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने और नए सिरे बनाने के लिए टेंडर निकाले गए हैं। दो माह के भीतर सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी।
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3. सिल्ट से भरे नाले, सड़कों पर पानी
- शहर में ओडियन, आबूनाला समेत 350 से अधिक नाले हैं। शहर के नालों की सफाई पर प्रतिवर्ष दो करोड़ से अधिक खर्च होते हैं, लेकिन नालों की सफाई नहीं बल्कि सरकारी खजाने की सफाई होती है। यही कारण है कि नालों का गंदा पानी शहर के कई इलाकों में सड़कों पर भरा है। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह का कहना है कि नालों की सफाई चलती रहती है। जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है।

4. भ्रष्टाचार
- नगर निगम में लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर ठगा जा रहा है वहीं निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की कलई खुल रही है। जनता को सुविधा भी नहीं मिल पा रही हैं। भ्रष्टाचार को निगम में कोई स्थान नहीं है। वहीं, नगर आयुक्त डॉ. अमित पाल का कहना है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है। हाल ही में निर्माण विभाग का मामला आया था, उसकी रिपोर्ट शासन भेजी गई।

5. कब छटेंगे अंधेरे के बादल
- नगर निगम का दावा है कि 70 हजार लाइटें शहर में लगी हैं। इनमें से करीब 10 हजार लाइटें तो खराब हैं। सहायक नगरायुक्त इंद्रविजय का कहना है कि लाइटें लगाने और रखरखाव का कार्य ईईएसएल कंपनी के पास है। निगम केवल निगरानी कर रहा है। समय समय पर कंपनी को पत्र लिखे जाते रहे हैं। नई लाइटों की मांग भी की जा रही है।

6. कुपोषण
सेहतमंद मन के लिए तन स्वस्थ होना भी जरूरी है। हमें कुपोषण को भी खत्म करना होगा, ताकि नई पीढ़ी देश की तरक्की में भागीदार बन सके। जिले में 768 बच्चे कुपोषित हैं। तय करना होगा एक भी बच्चा कुपोषित न रहे। जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत कुमार सिंह का कहना है कि पिछले एक माह में 247 बच्चे कुपोषण से सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। कुपोषण दूर करने का प्रयास जारी है।

7. अवैध निर्माण
शहर में स्वीकृत मानचित्र से कई गुना अधिक अवैध निर्माण होते जा रहे हैं। दावों के बावजूद इन पर अंकुश नहीं लग रहा है। एमडीए के सचिव चंद्रपाल तिवारी का कहना है कि पिछले छह महीने में सूचनाओं और शिकायतों के आधार पर अवैध निर्माण ध्वस्त कराए जा रहे हैं।

8. अतिक्रमण और जाम
शहर में अतिक्रमण और जाम के हालात गंभीर हैं। वेस्ट एंड रोड सहित अन्य मार्गों के लिए प्लान भी बनाए गए, मगर राहत नहीं मिली। एसपी ट्रैफिक जितेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि इसके लिए लगातार सर्वे और सुझाव पर काम किया जा रहा है।

9. अपराध
सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद लूट, चोरी, ठगी सहित अन्य बड़ी घटनाएं लगातार हो रही हैं। दावों के अनुरूप अपराधों पर अंकुश नहीं लग रहा है। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण कहते हैं कि कुछ अपराध आपसी रंजिश में होते हैं। अन्य घटनाओं के लिए पुलिस अलर्ट है।

10. प्रदूषण
एनजीटी और अन्य स्तर पर प्रदूषण रोकने के सख्त आदेशों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी विजय कुमार कहते हैं कि हाल हाल ही में प्रदूषण स्तर कम करने के लिए ग्रैप लागू किया गया है।

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