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कोतवाली तीरगरान हिंसा के तीनों आरोपी दोषमुक्त
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कोतवाली तीरगरान हिंसा के तीनों आरोपी दोषमुक्त
मेरठ। कोतवाली क्षेत्र के तीरगरान में प्याऊ के निर्माण को लेकर हुई हिंसा में नामजद आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट संख्या-3 के अपर जिला जज मो. गुलाम उल मदार ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया है।
पुलिस के मुताबिक, कोतवाली थानाध्यक्ष सुभाष राणा ने 10 मई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि तीरगरान में रंगरेजान मस्जिद के पास प्याऊ बनाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो रहा है। मस्जिद के बाहर शमसुद्दीन प्याऊ का निर्माण करा रहे थे। जिसका पार्षद विजय आनंद अपने साथियों संग विरोध कर रहे थे। मामले में पुलिस ने शमसुद्दीन पुत्र सईद्दीन, शहजाद उर्फ बोंदा पुत्र नवाब अहमद तथा प्रवीन वर्मा पुत्र किशन लाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। बयानों के आधार पर अपर जिला जज ने शमसुुद्दीन, शहजाद उर्फ बोधा व प्रवीन को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
पुलिस की कमजोर विवेचना का मिला लाभ
तीरगरान हिंसा में सराफा व्यापारी के इकलौते बेटे शुभम की हत्या हुई थी। एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। कई दुकानें जलीं थी। शहर हिंसा की आग में जलने से बाल-बाल बचा था। पुलिस के आला अधिकारी से बवाली सीधे मुकाबला कर रहे थे। पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते आरोपियों का दोषमुक्त होना बताया गया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही मानी जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटाए और वह दोष मुक्त हो गए।
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मेरठ। कोतवाली क्षेत्र के तीरगरान में प्याऊ के निर्माण को लेकर हुई हिंसा में नामजद आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट संख्या-3 के अपर जिला जज मो. गुलाम उल मदार ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया है।
पुलिस के मुताबिक, कोतवाली थानाध्यक्ष सुभाष राणा ने 10 मई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि तीरगरान में रंगरेजान मस्जिद के पास प्याऊ बनाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो रहा है। मस्जिद के बाहर शमसुद्दीन प्याऊ का निर्माण करा रहे थे। जिसका पार्षद विजय आनंद अपने साथियों संग विरोध कर रहे थे। मामले में पुलिस ने शमसुद्दीन पुत्र सईद्दीन, शहजाद उर्फ बोंदा पुत्र नवाब अहमद तथा प्रवीन वर्मा पुत्र किशन लाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। बयानों के आधार पर अपर जिला जज ने शमसुुद्दीन, शहजाद उर्फ बोधा व प्रवीन को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
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पुलिस की कमजोर विवेचना का मिला लाभ
तीरगरान हिंसा में सराफा व्यापारी के इकलौते बेटे शुभम की हत्या हुई थी। एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। कई दुकानें जलीं थी। शहर हिंसा की आग में जलने से बाल-बाल बचा था। पुलिस के आला अधिकारी से बवाली सीधे मुकाबला कर रहे थे। पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते आरोपियों का दोषमुक्त होना बताया गया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही मानी जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटाए और वह दोष मुक्त हो गए।
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