NIA की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, आईएस से ट्रेनिंग लेने इस जगह गया था अफसार
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यूपी में शुक्रवार को जिसौरा के जिस मौलाना अफसार को गिरफ्तार किया गया है। उसकी मदरसे में गतिविधियों पर सवाल खड़े हो गए है। अफसार के जरिये सुरक्षा एजेंसियां आईएस की तह तक पहुंचने की कोशिश में लगी हैं। इसको लेकर एनआईए अपने सर्च ऑपरेशन को और तेज कर सकते हैं।
मुंडाली के जिसोरा गांव निवासी अफसार पुत्र सरफराज डासना मसूरी के पास पिपलेडा गांव के एक मदरसे में पढ़ाने वाला बताया गया। अफसार तक एनआईए साकिब के जरिये पहुंची, जिसे आईएस से जुड़ा होना बताया गया।
सुरक्षा एजेंसियों ने अफसार के साथ पिपलेडा गांव के शहजाद को भी गिरफ्तार किया है। शहजाद की मुलाकात अफसार से मदरसे में ही हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के खुलासे के बाद अफसार की मदरसे में पढ़ाने के दौरान उसकी गतिविधियों पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया गया कि अफसार मदरसे से ही तीन बार आईएस से जुड़े एक संदिग्ध साकिब के साथ जम्मू-कश्मीर गया था। जहां आईएस के एक एजेंट से मुलाकात करना बताने की चर्चा है। जानकारी लगने पर सुरक्षा एजेंसियों ने अफसार का रिकार्ड खंगाला। वेस्ट यूपी में आईएस से जुड़े संदिग्ध लोगों की तलाश में एनआईए और एटीएस ने छापेमारी की, तभी उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मोबाइल को अपने मामा कलवा के घर अजराडा में एक बैग में रखकर गया था।
मेमोरी कार्ड में छिपे हैं आतंक के राज : हापुड़ (नितिन दीक्षित)। एनआईए की टीम ने शहजाद से एक मेमोरी कार्ड बरामद किया है। सूत्रों की मानें तो इसी मेमोरी कार्ड को लेकर छापेमारी की गई। यह कार्ड जिसौरा से गिरफ्तार मौलवी अफसार ने शहजाद को दिया था। इस मेमोरी कार्ड में आतंक के राज छिपे हो सकते हैं।
पूरी कार्रवाई के दौरान एनआईए की टीम का इस कार्ड पर ही पूरा ध्यान केंद्रित रहा। शनिवार सुबह भी एनआईए इसी की बरामदगी के लिए उतावली दिखी। टीम ने छापे के दौरान शहजाद को नींद से उठाकर एक मेमोरी कार्ड के बारे में पूछा।
हालांकि इस कार्ड के अलावा भी टीम द्वारा यहां से काफी कुछ बरामद किया। लेकिन मेमोरी कार्ड अहम रहा। सूत्रों की मानें तो इस कार्ड में काफी कुछ ऐसा है, जिससे कुछ और नाम सामने आ सकते हैं। इसके अलावा कुछ और अहम जानकारी भी हासिल हो सकती है। कुल मिलाकर यह कार्ड टीम के लिए काफी अहम सुराग था।
एक माह पहले मदरसे से हटाया था
पिपलेड़ा की मस्जिद से सटे मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना अफसार को गांव वालों ने एक माह पूर्व यहां से चले जाने को कहा था। ग्रामीणों की मानें तो मौलाना अराजक प्रवृत्ति का था। गांव की शांति व्यवस्था भंग न हो, इसके चलते उसे यहां से जाने के लिए कहा था।
मतलूब-आरिफ के सरेंडर की चर्चा
आईएस से जुड़े संदिग्ध नईम और सुहेल की निशानदेही पर एनआईए ने किठौर के राधना गांव निवासी मतलूब और आरिफ की तलाश में दबिश दी थी। दोनों ही घर से फरार थे। जिसके बाद एनआईए ने दोनों के परिवार को नोटिस दिया था। अफसार की गिरफ्तारी के बाद राधना के मतलूब और आरिफ के सरेंडर होने की चर्चा है।
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