मिलावट का खेल...आधे नमूने फेल

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 02:10 AM IST
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मिलावट का खेल...आधे नमूने फेल
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मेरठ। खाएं तो खाएं क्या। मिलावट से शायद ही कोई चीज अछूती हो। मुनाफा कमाने की चाहत में मिलावट करने वाले सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। जुलाई 2020 से जनवरी 2021 तक लिए 484 खाद्य नमूनों की रिपोर्ट आ गई है, जिनमें से 237 नमूने फेल निकले हैं। ये करीब 48.97 प्रतिशत हैं। इस दौरान 29 लाख 75 हजार रुपये जुर्माना भी वसूला गया है, लेकिन सुधार नहीं हुआ है। दरअसल, लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा भी नहीं कसा जाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है। सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है।
कड़ी सजा से बच जाते हैं मिलावटखोर
- भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है। लेकिन अक्सर मिलावट से संबंधित 90 फीसद मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं। इससे वे न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही तय किया जाता है कि मामलों को कौन सी कोर्ट में भेजना है। प्रशासनिक कोर्ट में केवल मिलावटखोरों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई होती है। एडीएम सिटी की कोर्ट में मिलावट से संबंधित वादों की सुनवाई की जाती है। जिस पर सजा के तौर पर अधिक से अधिक पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का नियम है। वहीं न्यायालय से मिलावट के मामलों में अलग-अलग धाराओं में छह माह से लेकर आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है।

अब तक मानकों के विपरीत मिले खाद्य पदार्थ...
अधोमानक: 94 मामले
असुरक्षित: 65 मामले
मिथ्याछाप: 78 मामले
यह हुई कार्रवाई
- वर्ष 2020-21 में 29 लाख 75 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया
- वर्ष 2019-20 में 70 लाख 88 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया
- वर्ष 2018-19 में 60 लाख 73 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया
जांच में यह मिलावट आई सामने
दूध: डिटर्जेंट, ग्लूकोज और पानी की मिलावट
चमचम: सेहत के लिए खतरनाक रंग रोड़ामाइन की मिलावट
खोया- मिल्क फैट कम पाया गया है
घी- तिल के तेल की मिलावट मिली
नमक- आयोडीन की मात्रा कम निकली
नमकीन- मेटानिल येलो रंग की मिलावट मिली
सरसों का तेल- लेबल मानक के अनुरूप नहीं
कोरोना काल के कारण कम हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि कोरोना काल कारण कार्रवाई कम हुई। पिछले साल जुलाई से नमूने लिए गए। मार्च से जून तक नमूने नहीं लिए गए। आगे अधिक कार्रवाई के प्रयास किए जाएंगे।

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