मिलावटी तेल प्रकरण: पुलिस व प्रशासन ने एक-दूसरे पर फोड़ा ठीकरा, जलेबी वाले रंग की चर्चा
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प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि पारस और गणपति केमिकल पर छापे की सूचना उनको नहीं दी, जबकि पुलिस का तर्क था कि संबंधित विभाग को जानकारी दी गई थी, इसके पुख्ता सुबूत भी उनके पास हैं। अधिकारियों का अलग अलग पक्ष जानने के बाद एसआईटी लखनऊ वापस लौट गई।
पारस और गणपति केमिकल फैक्टरी में 20 अगस्त को छापा मारकर 2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल/केमिकल पकड़ा गया था। मामले में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे। अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के लिए शासन ने एसआईटी का गठन किया है। जिसमें एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरोडकर, आईजी एसटीएफ अमिताभ यश और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी खाद्य व रसद आयुक्त मनीष चौहान को शामिल किया गया है।
जलेबी वाले रंग की चर्चा
सूत्रों का कहना है कि एक पक्ष ने यहां तक कहा कि केमिकल फैक्टरी में जलेबी में प्रयोग होने वाला रंग जानबूझकर रखा गया, ताकि मिलावटी तेल की पुष्टि कराई जा सके। जलेबी वाले रंग से नकली तेल तैयार करने वाला एक वीडियो भी उपलब्ध कराया गया। जिसमें केमिकल फैक्टरी के कर्मचारी ही जलेबी वाले रंग से मिलावटी पेट्रोल बनाकर दिखा रहे हैं।
जिले की एसआईटी ही करेगी जांच
तेल प्रकरण की जांच जिले में बनी एसआईटी कर रही है। सूत्रों ने बताया कि शासन की एसआईटी को बयान देने के बाद पुलिस अधिकारियों ने पूछा कि अब तेल प्रकरण की जांच कौन करेगा? जिस पर शासन की एसआईटी ने कहा कि यथास्थिति बनाकर रखें। जिला स्तर की एसआईटी ही विवेचना करती रहेगी। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों के पक्ष लिए हैं, जिसकी मानीटरिंग वह लखनऊ में जाकर करेंगे।
सुबह 8:40 बजे का समय था। तभी अफसरों की गाड़ियों का काफिला परतापुर क्षेत्र में औद्योगिक एरिया स्थित पारस केमिकल फैक्टरी में पहुंचा। वहां एसपी सिटी एएन सिंह, सीओ ब्रहमपुरी चक्रपाणि त्रिपाठी और परतारपुर इंस्पेक्टर भी पहुंच गए।
एसआईटी में शामिल शासन स्तर के तीनों ही वरिष्ठ अधिकारियों ने वहां मौजूद सिपाही से पूछा कि कब से ड्यूटी है? सिपाही ने बताया कि 12-12 घंटे की ड्यूटी रहती है। तीनों अफसरों के हाथ में एक फाइल थी, जिसमें साक्ष्यों का पूरा विवरण था। बीस अगस्त को किस समय यहां छापा मारा गया था? क्या आप भी उस समय मौजूद थे? इस पर वहां मौजूद एसपी सिटी चुप्पी साध गए। बाद में बताया कि आईजी आलोक सिंह के निर्देश पर एसपी देहात अविनाश पांडेय ने छापा मारा था, छापा मारने में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल और आशुतोष कुमार थे। उसके बाद सैंपल भरे।
अफसरों ने पूछा कि उसके बाद यहां कौन कौन अधिकारी आए, आपूर्ति विभाग से टीम आई या नहीं? पुलिसकर्मियों से पूछा कि यहां कितने भूमिगत टैंक हैं? एक टैंक में कितना तेल आता है? इस दौरान पूर्व में दर्ज दोनों मुकदमों की कापी, फोंरेंसिक लैब गाजियाबाद की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज थे। 13 मिनट तक अधिकारी भूमिगत टैंकों की जांच करते रहे। फिर टीम गणपति पेट्रो पहुंची और वहां लगभग सात मिनट तक जांच पड़ताल की। इसके बाद पीएसी के गेस्ट हाउस लौट गई।
सिपाही से लेकर विवेचकों के भी दर्ज हुए बयान
2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल/केमिकल के मामले में एसआईटी के अधिकारियों ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। आपूर्ति विभाग के अधिकारी, एसआरओ और निरीक्षकों, तेल प्रकरण के विवेचकर दोनों इंस्पेक्टरों के बयान भी दर्ज हुए। परतापुर और टीपीनगर के जिन इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई की गई उनके भी बयान दर्ज किए।
एसपी देहात छुट्टी पर
20 अगस्त को छापे में बरामद 2.20 लाख लीटर मिलावटी तेल/केमिकल मामले में एसपी देहात अविनाश पांडेय के नेेतृत्व में एसआईटी जांच कर रही है। अविनाश पांडेय तीन दिन की अवकाश पर हैं। इसके चलते संबंधित अधिकारियों से सैंपल किसने भरे, किसके माध्यम से सैंपल भेजे, रिपोर्ट में क्या रहा आदि बिंदुओं पर जानकारी ली गई।
जेल जाने वाले सभी आरोपियों के बयान दर्ज
20 अगस्त को कार्रवाई के समय मौके से गिरफ्तार कारोबारी राजीव जैन समेत दस लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। इनसे पूछा गया कि केमिकल कहां से आता था? केमिकल का प्रयोग कहां किया जाता था? केमिकल बिक्री के लिए है या अन्य कोई पदार्थ बनाया जाता था? ट्रांजेक्शन कैसे होता थां?