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Meerut News: आसान नहीं अफसर-कर्मियाें पर कार्रवाई
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मेरठ। सेंट्रल मार्केट में जिन जिम्मेदार स्टाफ के समय में अवैध निर्माण हुए उन पर भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो अब उन कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पाना नियम के अनुसार आसान नहीं होगा।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने सेंट्रल मार्केट में हुए अवैध निर्माण के दौरान कौन-कौन अधिकारी नियुक्त थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई थी। आवास विकास के तत्कालीन अधिशासी अभियंता व जन सूचना अधिकारी डीके गुप्ता ने 19 सितंबर 1990 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उस समय अवर अभियंता एसके गोयल व रामअवतार मित्तल के साथ ही तत्कालीन सहायक अभियंता मनोहर कुमार और तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रथम एसबी त्रिपाठी थे और प्रथम दृष्टया कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
इसी के साथ इस अवधि में अधीक्षण अभियंता आरके वर्मा और मुख्य अभियंता डीके ठाकुर थे, जो कि प्रतिनियुक्त पर तैनात थे। इन सभी में राम अवतार मित्तल को छोड़कर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति छह बरस पहले ही हो चुकी थी। रामअवतार मित्तल के खिलाफ विभागीय जांच गठित करते हुए आरोप पत्र भी निर्गत किया गया था। इसी के साथ बताया गया कि परिषद के वे कर्मचारी जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनके खिलाफ विभागीय जांच गठित नहीं हो सकती।
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सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच गठित किए जाने के लिए यह शर्त है कि घटना चार वर्ष से अधिक अवधि के पहले की न हो जबकि यह मामला चार वर्ष से अधिक अवधि के पहले की है। ब्यूरो
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने सेंट्रल मार्केट में हुए अवैध निर्माण के दौरान कौन-कौन अधिकारी नियुक्त थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई थी। आवास विकास के तत्कालीन अधिशासी अभियंता व जन सूचना अधिकारी डीके गुप्ता ने 19 सितंबर 1990 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उस समय अवर अभियंता एसके गोयल व रामअवतार मित्तल के साथ ही तत्कालीन सहायक अभियंता मनोहर कुमार और तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रथम एसबी त्रिपाठी थे और प्रथम दृष्टया कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
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इसी के साथ इस अवधि में अधीक्षण अभियंता आरके वर्मा और मुख्य अभियंता डीके ठाकुर थे, जो कि प्रतिनियुक्त पर तैनात थे। इन सभी में राम अवतार मित्तल को छोड़कर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति छह बरस पहले ही हो चुकी थी। रामअवतार मित्तल के खिलाफ विभागीय जांच गठित करते हुए आरोप पत्र भी निर्गत किया गया था। इसी के साथ बताया गया कि परिषद के वे कर्मचारी जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनके खिलाफ विभागीय जांच गठित नहीं हो सकती।
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सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच गठित किए जाने के लिए यह शर्त है कि घटना चार वर्ष से अधिक अवधि के पहले की न हो जबकि यह मामला चार वर्ष से अधिक अवधि के पहले की है। ब्यूरो