यूपी: 850 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में आरोपी दंपती लंदन से गिरफ्तार, नोएडा जेल में रखे जाएंगे
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भारत आने पर आरोपियों को नोएडा जेल में रखा जाएगा। दिल्ली निवासी दंपती ने हरियाणा, यूपी, पंजाब और दिल्ली में अलग अलग बैंकों से करीब 650 क रोड़ का ऋण ले रखा था। वहीं फर्म के नाम पर वेस्ट यूपी के सैकड़ों किसानों से धान खरीदकर उनका पैसा नहीं दिया था। बुलंदशहर में उनके खिलाफ दर्ज पौने दो करोड़ की धोखाधड़ी के केस में ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम विवेचना कर रही है।
पुलिस के अनुसार, बुलंदशहर के मौसमगढ़ निवासी लोकेंद्र सिंह ने बुशफ्रूडस ओवरसीज प्रा. लि. के खिलाफ धान खरीदकर भुगतान न करने के संबंध में कोतवाली देहात में 11 सितंबर 2015 को केस दर्ज कराया था। बुलंदशहर पुलिस ने केस की विवेचना आर्थिक अपराध शाखा मेरठ को ट्रांसफर कर दी।
जांच में पता चला कि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर वीरकरन अवस्थी और पत्नी रितिका अवस्थी निवासी बसंत विहार, नई दिल्ली ने वादी लोकेंद्र सिंह की फर्म सौरभ एंड कंपनी के माध्यम से किसानों से धान खरीदा था। इसके एवज में उन्होंने एक करोड़ 76 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया।
अभियुक्त रितिका अवस्थी ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपनी गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश और विदेश जाने की अनुमति की याचना की। 20 अक्तूबर 2015 को उन्हें स्थगन आदेश मिल गया, लेकिन देश नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 86 लाख रुपया जमा करने पर उन्हें दो माह के लिए लंदन जाने की अनुमति प्रदान कर दी।
31 मार्च 2016 तक उन्हें भारत आने का आदेश दिया गया। बाद में कोर्ट ने लंदन में प्रवास की दो माह की समय सीमा भी बढ़ाई। 31 मई 2016 को हर हालत में भारत आने का आदेश दिया गया। इनका पासपोर्ट निरस्त कर भारत बुलाने के लिए उच्चायुक्त को निर्देश दिए गए।
प्रत्यर्पण की कार्रवाई तेज
सुप्रीर्म कोर्ट ने 16 दिसंबर 2016 को रितिका की ओर से जमा कराए गए 86 लाख रुपये जब्त कर लिए। इसके बाद प्रत्यर्पण की कार्रवाई तेज कर दी गई। ईओडब्ल्यू ने विवेचना पूरी कर तीन अक्तूबर 2017 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
5 अक्तूबर 2017 को बुलंदशहर कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके बाद वीरकरन व रितिका अवस्थी को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए रेडकार्नर नोटिस जारी हुआ। विदेश मंत्रालय ने अभियुक्तों को लाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा।
लंदन में गिरफ्तार, गौतमबुद्धनगर में रहेंगे
पुलिस का कहना है कि गृहमंत्रालय ने अवगत कराया है कि प्रत्यर्पण सही पाए जाने के बाद दोनों को लंदन (यूके) में करीब दस दिन पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। शासन ने जिला कारागार गौतमबुद्धनगर में निरुद्ध किए जाने पर सहमति व्यक्त की है। जिला जेल गौतमबुद्धनगर ने गृहमंत्रालय के विधिक सलाहकार को आख्या भेज दी है। इस कार्रवाई में आर्थिक अपराध शाखा मेरठ के एसपी रामसुरेश यादव और इंस्पेक्टर केपी शर्मा की अहम भूमिका रही। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, आरोपियों ने बुलंदशहर, अलीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी केस दर्ज हैं।