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अंधेरे में डूबा रहेगा आबूलेन, आज हट जाएंगे पोल
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अंधेरे में डूबा रहेगा आबूलेन, आज हटेंगे पोल
मेरठ। शहर का दिल कहा जाने वाला आबूलेन अब अंधेरे में ही डूबा रहेगा। यहां सोलर लाइट लगाने वाले ठेकेदार से बृहस्पतिवार को कैंट बोर्ड अफसरों ने स्पष्ट कह दिया कि वो उसे पेमेंट नहीं दे सकते हैं। वह अपने पोल और बाकी सामान भी ले जा सकता है। कैंट बोर्ड अफसरों का कहना है कि इसकी कोई फाइल नहीं मिली है। ऐसे में यह काम कैसे हो गया।
शीलकुंज निवासी तनुज कुमार ने सीईओ को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी फर्म ने अक्टूबर 2015 में बेगमपुल से दास मोटर्स तक आबूलेन पर 4.69 लाख रुपये की लागत से 11 सोलर लाइटें और फाउंटेन लगवाए थे। आरोप था कि उनको इसका भुगतान नहीं किया गया, जबकि कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने तो ऐसा कोई काम होने से ही मना कर दिया था। तनुज ने आरटीआई में जानकारी मांगी तो कैंट बोर्ड को सही जानकारी देनी पड़ी। तनुज कुमार ने पत्र में कहा था कि यदि मेरा भुगतान नहीं किया जाता है तो कैंट बोर्ड उनकी 11 लाइटें, फाउंटेन और अन्य सामान को सौंपने का कष्ट करे। चेतावनी देने के बाद ठेेकेदार ने सोलर लाइटें, फाउंटेन उतार लिए थे। सोलर पैनल और पोल हटाने के लिए ठेकेदार को तीन दिन का समय दिया गया था। बृहस्पतिवार को ठेकेदार को बता दिया गया कि वह अपना जो भी सामान है उसे उतारकर ले जाए।
फाइल नहीं तो विज्ञापन का पैसा कहां जा रहा था
आबूलेन पर बेगमपुल से लेकर दास मोटर्स तक ठेकेदार ने जो 11 सोलर लाइटें लगाई थीं, उनके पोल पर कैंट बोर्ड विज्ञापन लगा रहा था। व्यापारियों के मुताबिक, उससे हर माह 80 हजार रुपये की आमदनी भी हो रही थी। आखिर वह पैसा कहां जा रहा था। इस सवाल का जवाब कैंट बोर्ड के किसी अफसर के पास नहीं है। ठेकेदार का कहना है कि अगर उसकी कोई फाइल नहीं थी तो फिर इन पोल पर लगे विज्ञापन का पैसा कैंट बोर्ड कहां जमा कर रहा था। पूरे प्रकरण को लेकर कोर्ट की शरण भी ली जा सकती है।
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मेरठ। शहर का दिल कहा जाने वाला आबूलेन अब अंधेरे में ही डूबा रहेगा। यहां सोलर लाइट लगाने वाले ठेकेदार से बृहस्पतिवार को कैंट बोर्ड अफसरों ने स्पष्ट कह दिया कि वो उसे पेमेंट नहीं दे सकते हैं। वह अपने पोल और बाकी सामान भी ले जा सकता है। कैंट बोर्ड अफसरों का कहना है कि इसकी कोई फाइल नहीं मिली है। ऐसे में यह काम कैसे हो गया।
शीलकुंज निवासी तनुज कुमार ने सीईओ को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी फर्म ने अक्टूबर 2015 में बेगमपुल से दास मोटर्स तक आबूलेन पर 4.69 लाख रुपये की लागत से 11 सोलर लाइटें और फाउंटेन लगवाए थे। आरोप था कि उनको इसका भुगतान नहीं किया गया, जबकि कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने तो ऐसा कोई काम होने से ही मना कर दिया था। तनुज ने आरटीआई में जानकारी मांगी तो कैंट बोर्ड को सही जानकारी देनी पड़ी। तनुज कुमार ने पत्र में कहा था कि यदि मेरा भुगतान नहीं किया जाता है तो कैंट बोर्ड उनकी 11 लाइटें, फाउंटेन और अन्य सामान को सौंपने का कष्ट करे। चेतावनी देने के बाद ठेेकेदार ने सोलर लाइटें, फाउंटेन उतार लिए थे। सोलर पैनल और पोल हटाने के लिए ठेकेदार को तीन दिन का समय दिया गया था। बृहस्पतिवार को ठेकेदार को बता दिया गया कि वह अपना जो भी सामान है उसे उतारकर ले जाए।
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फाइल नहीं तो विज्ञापन का पैसा कहां जा रहा था
आबूलेन पर बेगमपुल से लेकर दास मोटर्स तक ठेकेदार ने जो 11 सोलर लाइटें लगाई थीं, उनके पोल पर कैंट बोर्ड विज्ञापन लगा रहा था। व्यापारियों के मुताबिक, उससे हर माह 80 हजार रुपये की आमदनी भी हो रही थी। आखिर वह पैसा कहां जा रहा था। इस सवाल का जवाब कैंट बोर्ड के किसी अफसर के पास नहीं है। ठेकेदार का कहना है कि अगर उसकी कोई फाइल नहीं थी तो फिर इन पोल पर लगे विज्ञापन का पैसा कैंट बोर्ड कहां जमा कर रहा था। पूरे प्रकरण को लेकर कोर्ट की शरण भी ली जा सकती है।
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