मेरठ। राष्ट्र रक्षा यज्ञ शृंखला के तहत 96वां यज्ञ आचार्य राजवीर आर्य द्वारा आर्य समाज बुढ़ाना द्वार में कराया गया। यजमान अमित कांत रहे। अध्यक्षता मनोज प्रजापति ने की। मुख्य वक्ता प्रभात आर्य ने कहा कि पंडित गुरु दत्त विद्यार्थी को विद्यार्थी क्यों कहा जाता है, यह समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हम अक्सर शिक्षा को पूर्णता का माध्यम मान लेते हैं जबकि शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। मनुष्य कभी पूर्ण नहीं होता। ऋषि दयानंद के ग्रंथों का अध्ययन करने के पश्चात गुरु दत्त विद्यार्थी के मन में गहरी जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उन्होंने प्रत्येक पंक्ति को बार बार पढ़कर उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि गुरु दत्त विद्यार्थी ने डीएवी कॉलेज आंदोलन के बीजारोपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसे आगे चलकर महात्मा हंसराज एवं स्वामी श्रद्धानंद जैसे महान व्यक्तित्वों का सहयोग प्राप्त हुआ।संस्था के प्रधान सुशील बंसल ने कहा कि हम अपने समाज के नवरत्नों को धीरे धीरे भुलाते जा रहे हैं। हमें आर्य समाज के पथ प्रदर्शकों को सदैव स्मरण रखना चाहिए और उनके आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन मंत्री संजय गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर सोम प्रकाश रस्तोगी, प्रणय भूषण, विनय गर्ग, यशपाल, नरेश, योगेश गुप्ता, श्रीमती गीता बंसल, मनीषा एवं मनोरमा रस्तोगी रहे।