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Meerut News: प्रकाश पर्व पर मानवता को अपनाने का संदेश दिया
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- शहर के गुरुद्वारों में रागी जत्थों ने किया गुरु का गुणगान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सिख समाज ने शनिवार को गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व मनाया। शहर के गुरुद्वारों में शब्द-कीर्तन, प्रवचन और पाठ का आयोजन किया गया। मुख्य आयोजन केंद्रीय सिख संस्था गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा थापरनगर में हुआ। कार्यक्रम में मानवता को अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में कीर्तनी जत्थे ने गुरु का गुणगान किया। हजूरी रागी जत्था भाई प्रीतम सिंह ने शबद गायन किया। स्वर्ण मंदिर अमृतसर से पहुंचे हजूरी कीर्तनी जत्था भाई तेजेंद्र सिंह ने अमृत बाणी हरि-हरि तेरी आदि शब्दों का मधुर गायन किया। उपाध्यक्ष रणजीत सिंह जस्सल ने प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में मानवता की भलाई का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का संदेश है कि सभी मनुष्य एक ही नूर से पैदा हुए हैं। इसलिए किसी को ऊंचा-नीचा नहीं समझना चाहिए।
मुख्य ग्रंथी ज्ञानी चरनप्रीत सिंह ने बताया कि पंचम गुरु श्री गुरु अर्जुन देव ने गुरु ग्रंथ साहिब की संपादना के बाद 1604 ईसवी में स्वर्ण मंदिर अमृतसर में इसका पहला प्रकाश कराया था। इस अवसर पर पंजाबी कक्षा के बच्चों ने भी प्रकाश पर्व मनाया। इस दौरान अध्यक्ष रणजीत सिंह नंदा, सुरेंद्र सिंह भाटिया, गुरमुख सिंह, महासचिव हरप्रीत सिंह, सचिव जसबीर सिंह खालसा आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सिख समाज ने शनिवार को गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व मनाया। शहर के गुरुद्वारों में शब्द-कीर्तन, प्रवचन और पाठ का आयोजन किया गया। मुख्य आयोजन केंद्रीय सिख संस्था गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा थापरनगर में हुआ। कार्यक्रम में मानवता को अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में कीर्तनी जत्थे ने गुरु का गुणगान किया। हजूरी रागी जत्था भाई प्रीतम सिंह ने शबद गायन किया। स्वर्ण मंदिर अमृतसर से पहुंचे हजूरी कीर्तनी जत्था भाई तेजेंद्र सिंह ने अमृत बाणी हरि-हरि तेरी आदि शब्दों का मधुर गायन किया। उपाध्यक्ष रणजीत सिंह जस्सल ने प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब में मानवता की भलाई का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का संदेश है कि सभी मनुष्य एक ही नूर से पैदा हुए हैं। इसलिए किसी को ऊंचा-नीचा नहीं समझना चाहिए।
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मुख्य ग्रंथी ज्ञानी चरनप्रीत सिंह ने बताया कि पंचम गुरु श्री गुरु अर्जुन देव ने गुरु ग्रंथ साहिब की संपादना के बाद 1604 ईसवी में स्वर्ण मंदिर अमृतसर में इसका पहला प्रकाश कराया था। इस अवसर पर पंजाबी कक्षा के बच्चों ने भी प्रकाश पर्व मनाया। इस दौरान अध्यक्ष रणजीत सिंह नंदा, सुरेंद्र सिंह भाटिया, गुरमुख सिंह, महासचिव हरप्रीत सिंह, सचिव जसबीर सिंह खालसा आदि रहे।
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