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कर्मों के आधार पर मनुष्य को मिलता है फल
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हस्तिनापुर। जंबूद्वीप में स्थित कमल मंदिर में भगवान महावीर की श्वेतवर्ण का मनोकामना सिद्धि विधान किया गया। जिसमें प्रात:काल भगवान महावीर की श्वेतवर्णी प्रतिमा के मस्तक पर अनेक द्रव्यों से महाअभिषेक किया गया। महाशांतिधारा करने का सौभाग्य सरिता व उमेशचंद जैन, चावड़ी बाजार, दिल्ली एवं संस्थान के विजय कुमार जैन को प्राप्त हुआ।
जंबूद्वीप स्थल में कमल मंदिर के अंदर विराजमान भगवान महावीर की प्रतिमा है। जिसके समक्ष सोमवार को अनुष्ठान में मंडल के ऊपर इंद्र-इंद्राणी ने जोड़े से अर्घ्य समर्पित किए। इस दौरान साध्वी चारित्र चंद्रिका गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माता ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में भांति-भांति के प्राणी हैं। हर जीव को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। यही संसार का नियम है। इसलिए व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। सदा परोपकार की भावना रखनी चाहिए। जिससे उसके कर्म अच्छे होंगे। एवं सदैव वह व्यक्ति सुखी रहेगा। पूज्य चंदनामती माता ने मनोकामना सिद्धि विधान की रचना की है। जिसका अनुष्ठान यहां पर संपन्न किया गया। संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्ति रविंद्रकीर्ति स्वामी के द्वारा महाशांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिसमें अनेक जीवों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो, व्यापार वृद्धि हो, हर प्राणी सुखी बने, इसकी कामना की गई। अंत में जयमाला के साथ में पूर्णाघ्य समर्पित किया गया एवं श्रीजी की भक्तिपूर्वक 108 दीपकों से आरती संपन्न की गई।
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जंबूद्वीप स्थल में कमल मंदिर के अंदर विराजमान भगवान महावीर की प्रतिमा है। जिसके समक्ष सोमवार को अनुष्ठान में मंडल के ऊपर इंद्र-इंद्राणी ने जोड़े से अर्घ्य समर्पित किए। इस दौरान साध्वी चारित्र चंद्रिका गणिनी प्रमुख आर्यिका शिरोमणि ज्ञानमती माता ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में भांति-भांति के प्राणी हैं। हर जीव को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। यही संसार का नियम है। इसलिए व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। सदा परोपकार की भावना रखनी चाहिए। जिससे उसके कर्म अच्छे होंगे। एवं सदैव वह व्यक्ति सुखी रहेगा। पूज्य चंदनामती माता ने मनोकामना सिद्धि विधान की रचना की है। जिसका अनुष्ठान यहां पर संपन्न किया गया। संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्ति रविंद्रकीर्ति स्वामी के द्वारा महाशांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिसमें अनेक जीवों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो, व्यापार वृद्धि हो, हर प्राणी सुखी बने, इसकी कामना की गई। अंत में जयमाला के साथ में पूर्णाघ्य समर्पित किया गया एवं श्रीजी की भक्तिपूर्वक 108 दीपकों से आरती संपन्न की गई।
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