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राजस्व अफसरों ने खिसका दी एमडीए की जमीन

Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
Meerut
Meerut Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
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मेरठ। राजस्व अफसरों ने खेल कर एमडीए की पांच करोड़ रुपये की जमीन खतरे में डाल दी। मामला मलियाना गांव में ग्राम समाज की पक्का तीन बीघा जमीन का है। राजस्व अभिलेखों में इसे ऐसे व्यक्ति के नाम कर दिया, जिसका इससे कोई लेना-देना ही नहीं था। वेदव्यासपुरी योजना में एमडीए ने इस जमीन के अर्जन का प्रस्ताव भेजा, तो मामले का खुलासा हुआ। अब एमडीए वीसी ने डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की मांग की है।
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यह है पूरा मामला:
एमडीए ने वेदव्यासपुरी योजना में मलियाना स्थित पक्का तीन बीघा जमीन (खसरा नंबर-1701, 1702) का अर्जन का प्रस्ताव भेजा तो पता चला कि यह भिकारी नाम के व्यक्ति के नाम दर्ज है। इस पर वह खेती भी कर रहा है। एमडीए ने जब इसके अर्जन प्रस्ताव तैयार किया था तो यह जमीन ग्राम समाज की दिखाई गई थी। एमडीए ने कार्रवाई शुरू की तो भिकारी और उसके परिवार ने जमीन पर अपना दावा ठोक दिया। खुद को गरीब बताते हुए उसने कहा कि जमीन के अर्जन का कोई प्रस्ताव ही नहीं है। आरोप लगाया कि एमडीए भू-माफियाओं से मिलीभगत कर उससे जमीन छीनना चाह रहा है। उसने डीएम पंकज यादव से शिकायत की तो उन्होंने आठ अगस्त को एमडी वीसी को जांच के निर्देश दिए।
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जांच में हुआ खुलासा:
एमडीए वीसी ने जांच के बाद डीएम को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। वीसी के मुताबिक, दोनों खसरा नंबर ग्राम समाज के हैं। दोबारा इसके खसरा नंबर (1702) को किसी राजस्व अधिकारी, उपजिलाधिकारी ने भिकारी के नाम दर्ज कर दिया। इस जमीन की वर्तमान कीमत पांच करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी लापरवाही है, क्योंकि इस जमीन पर एमडीए द्वारा नियोजन किया जा चुका है। डीएम से इस प्रविष्टि को निरस्त करने की मांग करते हुए उन्होंने जांच कर दोषी अधिकारी के खिलाफ निलंबन या सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है।
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आमने-सामने विभाग:
एमडीए की जांच रिपोर्ट पर भू-अध्याप्ति और नगर निगम के सुर अलग ही हैं। सूचना के अधिकार के तहत भिकारी पक्ष ने जानकारी मांगी तो दोनों विभागों ने कह दिया कि इस बाबत अर्जन का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उधर, एमडीए वीसी ने डीएम को भेजे पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि 24 जुलाई 2013 को यह प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

भिकारी की हुई मौत:
बुधवार को भिकारी की अचानक मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एमडीए ने उससे जमीन छीनने की कोशिश की, जिसका सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सका। परिजन मुकेश, सत्यपाल आदि का कहना है कि वास्तव में इस जमीन का अर्जन ही नहीं हुआ है। एमडीए उनका हक छीन रहा है। जमीन भू-माफियाओं को देने की कोशिश की जा रही है।
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