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नर्सिंग कॉलेज की मान्यता खतरे में
Meerut
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:31 AM IST
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग कालेज की मान्यता खटाई में पड़ गई है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने मेडिकल कॉलेज को नोटिस देते हुए रेग्युलर स्टाफ रखने को कहा है। अल्टीमेटम दिया है यदि इस बार स्टाफ नियुक्त नहीं किया तो मान्यता रद कर दी जाएगी।
2012 में उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी नर्सिंग कॉलेज लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज को मिला। रेग्युलर स्टाफ की तैनाती का आश्वासन देते हुए इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता भी हासिल कर ली गई। अब तक संविदा पर रखे शिक्षक पढ़ा रहे हैं। काउंसिल ने मेडिकल कालेज को फिर से चेतावनी दी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रमुख सचिव और डीजी स्वास्थ्य चिकित्सा को पत्र लिखकर रेग्युलर स्टाफ की तैनाती की मांग की है। पत्र के साथ में इंडियन नर्सिंग काउंसिल के पत्र का भी हवाला दिया गया है।
कॉलेज को बजट तक नहीं मिला
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने कई चुनौतियां हैं। शासन ने कॉलेज शुरू तो कर दिया है, लेकिन आज तक न तो बजट मिला है और न रेग्युलर स्टाफ। नर्सिंग कालेज में प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य के साथ टीचिंग के 12 पद हैं। लेकिन सभी पदों पर संविदा का स्टाफ काम कर रहा है। नर्सिंग कालेज के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश राणा का कहना है कि कई बार प्रमुख सचिव को भी मामले में पत्र लिखा जा चुका है लेकिन शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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2012 में उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी नर्सिंग कॉलेज लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज को मिला। रेग्युलर स्टाफ की तैनाती का आश्वासन देते हुए इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता भी हासिल कर ली गई। अब तक संविदा पर रखे शिक्षक पढ़ा रहे हैं। काउंसिल ने मेडिकल कालेज को फिर से चेतावनी दी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने प्रमुख सचिव और डीजी स्वास्थ्य चिकित्सा को पत्र लिखकर रेग्युलर स्टाफ की तैनाती की मांग की है। पत्र के साथ में इंडियन नर्सिंग काउंसिल के पत्र का भी हवाला दिया गया है।
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कॉलेज को बजट तक नहीं मिला
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने कई चुनौतियां हैं। शासन ने कॉलेज शुरू तो कर दिया है, लेकिन आज तक न तो बजट मिला है और न रेग्युलर स्टाफ। नर्सिंग कालेज में प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य के साथ टीचिंग के 12 पद हैं। लेकिन सभी पदों पर संविदा का स्टाफ काम कर रहा है। नर्सिंग कालेज के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश राणा का कहना है कि कई बार प्रमुख सचिव को भी मामले में पत्र लिखा जा चुका है लेकिन शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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