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राजस्व विभाग ने कैंट संपत्तियों में किया बड़ा घोटाला!
Meerut
Updated Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
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मेरठ। कैंट बोर्ड राजस्व विभाग में बड़े घोटाले की आशंका है। विभाग ने बोर्ड को गुमराह कर सरकारी खजाने को लाखों का चूना लगाया। कैंट फंड प्रापर्टी के प्रस्ताव पर बोर्ड अध्यक्ष ने खुद इस बात की आशंका जताई है। बोर्ड ने कब्जेदारों के वर्तमान लाइसेंस फीस को 200 से 300 गुना तक बढ़ाने पर मुहर लगाई।
बुधवार को गैरिजन इंजीनियर द्वारा दी गई कैंट फंड प्रापर्टी की रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हुई। बैठक में सामने आया कि समिति ने जिन बाजारों का सर्वे किया है, उनमें अधिकांश की लीज समाप्त हो चुकी है, जिसके कारण बगैर मध्य कमान की अनुमति के न तो इनसे ट्रांसफर फीस वसूली जा सकती है और न ही अन्य लाइसेंस फीस बढ़ाई जा सकती है। बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने राजस्व विभाग के क्लर्क राजीव श्रीवास्तव से जवाब तलब किया कि ये तथ्य बोर्ड के सामने चार माह पहले समिति के गठन के दौरान क्यों नहीं रखी गई। चर्चा में ये भी खुलासा हुआ कि बाउंड्री रोड की दर्जनों दुकानों पर वर्ष 1989 के बाद से अब तक कोई लाइसेंस फीस नहीं बढ़ाई गई। क्लर्क राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि लीज के संबंध में 27 केस को वर्ष 2002 में मध्य कमान की अनुमति के लिए भेजा गया, जिस पर अब तक अनुमति नहीं मिली। क्लर्क के जवाब पर वीके यादव ने फिर सवाल उठाए कि 11 साल से अनुमति क्यों नहीं आई और इसके लिए बोर्ड ने कितने रिमाइंडर भेजे। 1989 के बाद से 23 साल में लाइसेंस फीस क्यों नहीं बढ़ाई गई। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि निश्चित तौर पर राजस्व विभाग और कब्जेदारों के बीच कोई खेल चल रहा है, जिसकी जांच वे अपने स्तर पर कराएंगे। सदस्य जगमोहन शाकाल ने क्लर्क राजीव श्रीवास्तव की पंप ऑपरेटर से क्लर्क के पद पर गलत तरीके से नियुक्ति के आरोप लगाए। शाकाल ने कहा कि कैंट फंड दुकानों के असंवैधानिक स्थानांतरण में राजीव की अहम भूमिका रही है। बोर्ड अध्यक्ष ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। शाकाल के अलावा उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी और शशि साहू ने समिति की रिपोर्ट को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। उधर, सीईओ प्रशोतम लाल सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में ट्रांसफर करने के नियम का कोई जिक्र नहीं है और न ही लीज समाप्त होने के बारे में कोई विवरण है।
बोर्ड अध्यक्ष ने चर्चा के बाद कहा कि संपत्तियों के कब्जेदारों की वर्तमान लाइसेंस फीस को 200 से 300 गुना बढ़ाया जाएगा और ये लाइसेंस फीस सिर्फ एक साल के लिए अस्थाई होगी। ट्रांसफर फीस के लिए मध्य कमान को रिपोर्ट भेजी जाएगी, अगर मध्य कमान अनुमति देता है तो ही ट्रांसफर होगा, नहीं तो सभी कब्जेदारों को एक साल की लाइसेंस फीस के साथ दुकानों को खाली करने करना होगा। इसके बाद ओपन टेंडर कर दुकानों को दोबारा आवंटित किया जाएगा। कैंट में वर्तमान में न्यूनतम 230 रुपये से लेकर अधिकतम 675 रुपये प्रति माह लाइसेंस फीस ली जा रही है।
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पानी पर बोर्ड बैठक में हंगामा
कैंट क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर जमकर हंगामा हुआ। सदस्य वीना वाधवा, ममता गुप्ता, दिनेश गोयल ने कहा कि आदेश के बावजूद अब तक पंप नहीं लगाया गया। इसके कारण गर्मी में पेयजल का संकट गहराएगा। जगमोहन शाकाल ने सुझाव दिया कि अवैध निर्माण करने वाले अवैध कनेक्शन चला रहे हैं, उसे नियमित किया जाए, ताकि बोर्ड को राजस्व मिल सके। बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि कैंट में साढ़े नौ घंटे जलापूर्ति होने के कारण पेयजल संकट है, इसे सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे किया जाना चाहिए। जिसका उपाध्यक्ष समेत सभी सदस्यों ने विरोध किया। सदस्यों की आपत्ति पर वीके यादव ने सीईओ और इंजीनियर से आठों वार्डों की पेयजल आपूर्ति पर सर्वे रिपोर्ट देने के आदेश दिए।
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हर वार्ड में होंगे दो लाख के मरम्मत कार्य
बोर्ड ने हर वार्ड में दो लाख रुपये के मरम्मत कार्य कराए जाने का प्रस्ताव पास किया। दिनेश गोयल और प्रेम ढींगरा की अपील पर उनके वार्ड में मरम्मत कार्य के बजाये इंटरलॉकिंग-टाइल का कार्य कराने के निर्देश दिए गए। बोर्ड ने विभिन्न वार्ड में चल रहे सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण कार्य को साढ़े तीन माह में पूरा करने के आदेश दिए।
डेयरी संचालक खुद तलाशें भूमि
बोर्ड के खूंटा टैक्स के प्रस्ताव पर वीके यादव साफ कहा कि 15 मई के बाद डेयरियों को कैंट में नहीं चलने दिया जाएगा। सदस्यों के भूमि उपलब्ध कराने की अपील पर वीके यादव ने कहा कि बोर्ड के पास भूमि नहीं है। डेयरी संचालकों को भूमि की तलाश खुद करनी होगी। 15 मई के बाद कोई मोहलत नहीं दी जाएगी।
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बुधवार को गैरिजन इंजीनियर द्वारा दी गई कैंट फंड प्रापर्टी की रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हुई। बैठक में सामने आया कि समिति ने जिन बाजारों का सर्वे किया है, उनमें अधिकांश की लीज समाप्त हो चुकी है, जिसके कारण बगैर मध्य कमान की अनुमति के न तो इनसे ट्रांसफर फीस वसूली जा सकती है और न ही अन्य लाइसेंस फीस बढ़ाई जा सकती है। बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने राजस्व विभाग के क्लर्क राजीव श्रीवास्तव से जवाब तलब किया कि ये तथ्य बोर्ड के सामने चार माह पहले समिति के गठन के दौरान क्यों नहीं रखी गई। चर्चा में ये भी खुलासा हुआ कि बाउंड्री रोड की दर्जनों दुकानों पर वर्ष 1989 के बाद से अब तक कोई लाइसेंस फीस नहीं बढ़ाई गई। क्लर्क राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि लीज के संबंध में 27 केस को वर्ष 2002 में मध्य कमान की अनुमति के लिए भेजा गया, जिस पर अब तक अनुमति नहीं मिली। क्लर्क के जवाब पर वीके यादव ने फिर सवाल उठाए कि 11 साल से अनुमति क्यों नहीं आई और इसके लिए बोर्ड ने कितने रिमाइंडर भेजे। 1989 के बाद से 23 साल में लाइसेंस फीस क्यों नहीं बढ़ाई गई। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि निश्चित तौर पर राजस्व विभाग और कब्जेदारों के बीच कोई खेल चल रहा है, जिसकी जांच वे अपने स्तर पर कराएंगे। सदस्य जगमोहन शाकाल ने क्लर्क राजीव श्रीवास्तव की पंप ऑपरेटर से क्लर्क के पद पर गलत तरीके से नियुक्ति के आरोप लगाए। शाकाल ने कहा कि कैंट फंड दुकानों के असंवैधानिक स्थानांतरण में राजीव की अहम भूमिका रही है। बोर्ड अध्यक्ष ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। शाकाल के अलावा उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी और शशि साहू ने समिति की रिपोर्ट को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। उधर, सीईओ प्रशोतम लाल सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में ट्रांसफर करने के नियम का कोई जिक्र नहीं है और न ही लीज समाप्त होने के बारे में कोई विवरण है।
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पानी पर बोर्ड बैठक में हंगामा
कैंट क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर जमकर हंगामा हुआ। सदस्य वीना वाधवा, ममता गुप्ता, दिनेश गोयल ने कहा कि आदेश के बावजूद अब तक पंप नहीं लगाया गया। इसके कारण गर्मी में पेयजल का संकट गहराएगा। जगमोहन शाकाल ने सुझाव दिया कि अवैध निर्माण करने वाले अवैध कनेक्शन चला रहे हैं, उसे नियमित किया जाए, ताकि बोर्ड को राजस्व मिल सके। बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि कैंट में साढ़े नौ घंटे जलापूर्ति होने के कारण पेयजल संकट है, इसे सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे किया जाना चाहिए। जिसका उपाध्यक्ष समेत सभी सदस्यों ने विरोध किया। सदस्यों की आपत्ति पर वीके यादव ने सीईओ और इंजीनियर से आठों वार्डों की पेयजल आपूर्ति पर सर्वे रिपोर्ट देने के आदेश दिए।
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हर वार्ड में होंगे दो लाख के मरम्मत कार्य
बोर्ड ने हर वार्ड में दो लाख रुपये के मरम्मत कार्य कराए जाने का प्रस्ताव पास किया। दिनेश गोयल और प्रेम ढींगरा की अपील पर उनके वार्ड में मरम्मत कार्य के बजाये इंटरलॉकिंग-टाइल का कार्य कराने के निर्देश दिए गए। बोर्ड ने विभिन्न वार्ड में चल रहे सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण कार्य को साढ़े तीन माह में पूरा करने के आदेश दिए।
डेयरी संचालक खुद तलाशें भूमि
बोर्ड के खूंटा टैक्स के प्रस्ताव पर वीके यादव साफ कहा कि 15 मई के बाद डेयरियों को कैंट में नहीं चलने दिया जाएगा। सदस्यों के भूमि उपलब्ध कराने की अपील पर वीके यादव ने कहा कि बोर्ड के पास भूमि नहीं है। डेयरी संचालकों को भूमि की तलाश खुद करनी होगी। 15 मई के बाद कोई मोहलत नहीं दी जाएगी।