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बोर्ड परीक्षा में फिर उठी स्वकेंद्र की मांग
Meerut
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। प्रदेश में सत्ता बदलते ही बोर्ड परीक्षा को लेकर भी राजनीति शुरू हो चुकी है। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा बोर्ड परीक्षा में स्वकेंद्र परीक्षा केंद्र के साथ ही वित्तविहीन स्कूलों के परीक्षा केंद्र बनाए जाने पर प्रतिबंध है।
कुछ अपरिहार्य कारणों से ही इन प्रतिबंधों में छुट की बात है। बावजूद इसके वित्तविहीन विद्यालय संघ ने शासन से स्वकेंद्र के साथ ही उनके विद्यालयों को भी परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग शुरू कर दी है।
बोर्ड परीक्षा नियमावली में राजकीय और वित्तीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने का नियम है। विशेष परिस्थितियों में जहां बालिकाओं के लिए जहां स्वकेंद्र बनाया जा सकता है, वहीं यदि कहीं परीक्षार्थियों की संख्या के अनुरूप शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय नहीं है, वहां पर वित्त विहीन विद्यालयाें को परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रावधान है। इस नियम के चलते पिछले कई वर्षों से लगातार वित्त विहीन विद्यालय परीक्षा केंद्र से वंचित चले आ रहे है।
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अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2002 की सपा सरकार में स्वकेंद्र के साथ वित्त विहीन विद्यालयों को भी परीक्षा केंद्र बनाया गया था, लेकिन बसपा सरकार में इस नियम को बदल दिया गया है। अब प्रदेश में पुन: सपा सत्तारूढ़ है। ऐसे में वित्तविहीन विद्यालय संघ को फिर से परीक्षा केंद्र की उम्मीद जगी है। हालांकि अभी तक क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय को जो निर्देश प्राप्त हुए है, उसमें पुरानी नियमावली में कहीं भी फेर बदल नहीं हुआ है। चूंकि अभी तक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण नहीं हुआ है, तो ऐसे में वित्तविहीन विद्यालयों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग मान सकती है।
‘सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं का स्वकेंद्र और हमारे विद्यालयों की छात्राओं का परीक्षा केंद्र दूसरे विद्यालयों में होता है। यह सरकार का सौतेला व्यवहार है। इसी को लेकर हम मांग उठा रहे है। सपा सरकार से हमें उम्मीद है कि बालिकाओं को इसमें सुविधा देगी’।
मनोज शर्मा, जिलाध्यक्ष, वित्तविहीन शिक्षक संघ
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कुछ अपरिहार्य कारणों से ही इन प्रतिबंधों में छुट की बात है। बावजूद इसके वित्तविहीन विद्यालय संघ ने शासन से स्वकेंद्र के साथ ही उनके विद्यालयों को भी परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग शुरू कर दी है।
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बोर्ड परीक्षा नियमावली में राजकीय और वित्तीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने का नियम है। विशेष परिस्थितियों में जहां बालिकाओं के लिए जहां स्वकेंद्र बनाया जा सकता है, वहीं यदि कहीं परीक्षार्थियों की संख्या के अनुरूप शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय नहीं है, वहां पर वित्त विहीन विद्यालयाें को परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रावधान है। इस नियम के चलते पिछले कई वर्षों से लगातार वित्त विहीन विद्यालय परीक्षा केंद्र से वंचित चले आ रहे है।
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अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2002 की सपा सरकार में स्वकेंद्र के साथ वित्त विहीन विद्यालयों को भी परीक्षा केंद्र बनाया गया था, लेकिन बसपा सरकार में इस नियम को बदल दिया गया है। अब प्रदेश में पुन: सपा सत्तारूढ़ है। ऐसे में वित्तविहीन विद्यालय संघ को फिर से परीक्षा केंद्र की उम्मीद जगी है। हालांकि अभी तक क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय को जो निर्देश प्राप्त हुए है, उसमें पुरानी नियमावली में कहीं भी फेर बदल नहीं हुआ है। चूंकि अभी तक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण नहीं हुआ है, तो ऐसे में वित्तविहीन विद्यालयों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग मान सकती है।
‘सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं का स्वकेंद्र और हमारे विद्यालयों की छात्राओं का परीक्षा केंद्र दूसरे विद्यालयों में होता है। यह सरकार का सौतेला व्यवहार है। इसी को लेकर हम मांग उठा रहे है। सपा सरकार से हमें उम्मीद है कि बालिकाओं को इसमें सुविधा देगी’।
मनोज शर्मा, जिलाध्यक्ष, वित्तविहीन शिक्षक संघ