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यहां मंदोदरी आती थीं पूजा करने
Meerut
Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। मान्यता है कि सदर स्थित बिल्वेश्वर महादेव मंदिर और नौचंदी मंदिर में रावण की पटरानी मंदोदरी पूजन के लिए आती थीं। इन मंदिरों में आज भी नवरात्र में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
बिल्वेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी हरीश चंद जोशी ने बताया कि मान्यता है कि मय दानव की पुत्री मंदोदरी यहां पूजा के लिए आती थीं। इतिहासकार डा. अमित पाठक ने बताया कि आज जहां भैंसाली मैदान है, पहले वहां सती सरोवर था। नौचंदी देवी मंदिर के बारे में मान्यता है कि मंदोदरी ने यहां नौचंडी देवी की मूर्ति स्थापित की थी। पुजारी महेंद्र शर्मा सरकारी गजट का हवाला देते हुए बताते हैं कि कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में मंदिर को तहसनहस कर दिया गया था। तत्कालीन पुजारी हजारी लाल और उनकी पुत्री मधु चंडी बाला ने मूर्ति को छिपा दिया था बाद में इसे पुन: स्थापित किया गया। मंदिर में शाम साढ़े तीन बजे से पांच बजे महिला संकीर्तन मंडली द्वारा देवी का गुणगान किया जाता है।
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बिल्वेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी हरीश चंद जोशी ने बताया कि मान्यता है कि मय दानव की पुत्री मंदोदरी यहां पूजा के लिए आती थीं। इतिहासकार डा. अमित पाठक ने बताया कि आज जहां भैंसाली मैदान है, पहले वहां सती सरोवर था। नौचंदी देवी मंदिर के बारे में मान्यता है कि मंदोदरी ने यहां नौचंडी देवी की मूर्ति स्थापित की थी। पुजारी महेंद्र शर्मा सरकारी गजट का हवाला देते हुए बताते हैं कि कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में मंदिर को तहसनहस कर दिया गया था। तत्कालीन पुजारी हजारी लाल और उनकी पुत्री मधु चंडी बाला ने मूर्ति को छिपा दिया था बाद में इसे पुन: स्थापित किया गया। मंदिर में शाम साढ़े तीन बजे से पांच बजे महिला संकीर्तन मंडली द्वारा देवी का गुणगान किया जाता है।
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