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पीवीवीएनएल के 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के दावे फेल
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पीवीवीएनएल के 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के दावे फेल
दो महीने में भी नहीं मिला किसान को नलकूप का चोरी गया ट्रांसफार्मर
आम तौर पर सात दिन में बदला जा रहा ट्रांसफार्मर, वह भी उपभोक्ता के खर्चे पर
राजदीप जाखड़
मेरठ। पीवीवीएनएल अधिकारी शासन के 48 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने के आदेश को धता बताने में लगे हैं। दो-दो महीने तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक-दो केस में ही ट्रांसफार्मर निर्धारित समय में बदले जाते हैं। शिकायत करने के बाद कागजी कार्रवाई आदि होने और ट्रांसफार्मर गांव या नलकूप तक पहुंचने में सात दिन तक लग रहे हैं।
शासन ने गांव और नलकूपों के फुंके ट्रांसफार्मरों को 48 घंटे और शहरी ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे के अंदर बदलकर लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करानी होती है। ट्रांसफार्मर गांव या नलकूप से उठाकर लाने और दूसरा ट्रांसफार्मर ले जाकर उसे लगाने तक का कार्य निशुल्क किया जाता है। लेकिन फुंका ट्रांसफार्मर उपभोक्ताओं को खुद अपने खर्चे पर लाना-ले जाना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में सुविधा शुल्क लेने के बाद ही ट्रांसफार्मर बदलने का काम शुरू होता है।
दो महीने बाद भी नहीं मिला नलकूप का ट्रांसफार्मर, सूख रही फसल
मामला मुजफ्फरनगर जनपद के गांव लछैड़ा थाना मंसूरपुर का है। यहां के किसान तेजपाल के नलकूप पर रखा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर 10 फरवरी को चोरी हो गया था। तेजपाल ने मामले की सूचना अगले दिन ही विभाग को दी थी। उन्होंने थाना मंसूरपुर में 24 फरवरी को रिपोर्ट भी दर्ज करा दी, लेकिन दो महीने बाद भी दूसरा ट्रांसफार्मर नहीं मिला है। इस ट्रांसफार्मर से दो नलकूप और संचालित होते हैं। तीन नलकूप ठप पड़े हैं। इससे किसान अपनी सैकड़ों बीघा जमीन की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा जनपद मेरठ के गांव करनावल, पाथौली, बागपत के गांव ढिकौली, किरठल, सरूरपुर, अमरोहा के गांव एरोला माफी, हापुड़ के गांव दस्तोई, बुलंदशहर के गांव बीहटा, मुजफ्फरनगर के गांव सोंटा, फईमपुर आदि के किसानों ने भी फुंके ट्रांसफार्मर 48 घंटे की बजाय चार से सात दिन के अंदर बदले जाने की शिकायत की है।
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वर्कशाप में नहीं ट्रांसफार्मरों की कमी
जिले की किसी भी वर्कशाप में ट्रांसफार्मरों की कमी नहीं है। अधीक्षण अभियंता वर्कशाप राजेश सिंह का कहना है कि वर्कशाप में 5000 से ज्यादा ट्रांसफार्मर तैयार रखे हैं। उनके स्तर से इंडेंट मिलते ही ट्रांसफार्मर भेज दिया जाता है। वहीं किसानों का कहना है कि ट्रांसफार्मर बदलने में देरी जेई स्तर से ही होती है। सूचना के बाद जेई को वर्कशाप के लिए इंडेंट आदि देना होता है। इसमें जेई कई-कई दिन लगा देते हैं।
क्या बोले अधिकारी
फुंके ट्रांसफार्मर अगर निर्धारित समय के अंदर नहीं बदले जा रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है। इसे दिखवाया जाएगा। जो भी अधिकारी और कर्मचारी इसमें दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ
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दो महीने में भी नहीं मिला किसान को नलकूप का चोरी गया ट्रांसफार्मर
आम तौर पर सात दिन में बदला जा रहा ट्रांसफार्मर, वह भी उपभोक्ता के खर्चे पर
राजदीप जाखड़
मेरठ। पीवीवीएनएल अधिकारी शासन के 48 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने के आदेश को धता बताने में लगे हैं। दो-दो महीने तक ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक-दो केस में ही ट्रांसफार्मर निर्धारित समय में बदले जाते हैं। शिकायत करने के बाद कागजी कार्रवाई आदि होने और ट्रांसफार्मर गांव या नलकूप तक पहुंचने में सात दिन तक लग रहे हैं।
शासन ने गांव और नलकूपों के फुंके ट्रांसफार्मरों को 48 घंटे और शहरी ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे के अंदर बदलकर लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करानी होती है। ट्रांसफार्मर गांव या नलकूप से उठाकर लाने और दूसरा ट्रांसफार्मर ले जाकर उसे लगाने तक का कार्य निशुल्क किया जाता है। लेकिन फुंका ट्रांसफार्मर उपभोक्ताओं को खुद अपने खर्चे पर लाना-ले जाना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में सुविधा शुल्क लेने के बाद ही ट्रांसफार्मर बदलने का काम शुरू होता है।
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दो महीने बाद भी नहीं मिला नलकूप का ट्रांसफार्मर, सूख रही फसल
मामला मुजफ्फरनगर जनपद के गांव लछैड़ा थाना मंसूरपुर का है। यहां के किसान तेजपाल के नलकूप पर रखा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर 10 फरवरी को चोरी हो गया था। तेजपाल ने मामले की सूचना अगले दिन ही विभाग को दी थी। उन्होंने थाना मंसूरपुर में 24 फरवरी को रिपोर्ट भी दर्ज करा दी, लेकिन दो महीने बाद भी दूसरा ट्रांसफार्मर नहीं मिला है। इस ट्रांसफार्मर से दो नलकूप और संचालित होते हैं। तीन नलकूप ठप पड़े हैं। इससे किसान अपनी सैकड़ों बीघा जमीन की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा जनपद मेरठ के गांव करनावल, पाथौली, बागपत के गांव ढिकौली, किरठल, सरूरपुर, अमरोहा के गांव एरोला माफी, हापुड़ के गांव दस्तोई, बुलंदशहर के गांव बीहटा, मुजफ्फरनगर के गांव सोंटा, फईमपुर आदि के किसानों ने भी फुंके ट्रांसफार्मर 48 घंटे की बजाय चार से सात दिन के अंदर बदले जाने की शिकायत की है।
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वर्कशाप में नहीं ट्रांसफार्मरों की कमी
जिले की किसी भी वर्कशाप में ट्रांसफार्मरों की कमी नहीं है। अधीक्षण अभियंता वर्कशाप राजेश सिंह का कहना है कि वर्कशाप में 5000 से ज्यादा ट्रांसफार्मर तैयार रखे हैं। उनके स्तर से इंडेंट मिलते ही ट्रांसफार्मर भेज दिया जाता है। वहीं किसानों का कहना है कि ट्रांसफार्मर बदलने में देरी जेई स्तर से ही होती है। सूचना के बाद जेई को वर्कशाप के लिए इंडेंट आदि देना होता है। इसमें जेई कई-कई दिन लगा देते हैं।
क्या बोले अधिकारी
फुंके ट्रांसफार्मर अगर निर्धारित समय के अंदर नहीं बदले जा रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है। इसे दिखवाया जाएगा। जो भी अधिकारी और कर्मचारी इसमें दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ