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जमीन का अधिग्रहण न होने से अटका प्रोजेक्ट
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जमीन का अधिग्रहण न होने से अटका प्रोजेक्ट
साल-2017 से चल रहा मेरठ-खुर्जा दोहरीकरण कार्य
पेड़ कटान और जमीन अधिग्रहण से जूझ रहा है प्रोजेक्ट
मेरठ। रेलवे की ओर से परियोजनाओं पर कार्य तेज गति से किया जा रहा है। जिससे रेल सेवाओं को समय पर पूरा कर यात्रियों को राहत दी जा सके। लेकिन जमीन अधिग्रहण और पेड़ों के कटान में व्यवधान से प्रोजेक्ट अटकने से कार्य बाधित हो जाता है। मेरठ-खुर्जा रेलवे लाइन दोहरीकरण भी इसी वजह से अटकी है। साल-2017 में दोहरीकरण कार्य को खुर्जा की तरफ से शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट में भी जमीन अधिग्रहण और पेड़ों के कटान ने व्यवधान डाला है।
93 किमी के मेरठ-खुर्जा दोहरीकरण प्रोजेक्ट का कार्य अभी मेरठ सीमा तक नहीं पहुंचा है। प्रोजेक्ट कार्य को शुरू हुए दो साल बीत चुके हैं। लेकिन खुर्जा के बीच पेड़ कटान की वजह से प्रोजेक्ट कार्य आगे बढ़ नहीं सका है। रेलवे लाइन को बेहतर बनाने के लिए मेरठ से खुर्जा तक साल-2016 में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया था। वहीं, इस रेलवे लाइन पर 36 अंडरपास बनाए गए थे।
550 करोड़ का कुल बजट
दोहरीकरण कार्य का बजट 550 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसके दोहरीकरण होने से लखनऊ की तरफ से आने वाली ट्रेनों को मेरठ तक डायवर्ट कर दिया जाएगा। अभी हापुड़ से ट्रेनों को गाजियाबाद की ओर रवाना कर दिया जाता है। इस रूट पर अभी संगम, खुर्जा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जाता है। हापुड़ से मेरठ तक दोहरीकरण होने से ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ जाएगी।
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मेरठ में अभी निर्माण नहीं
दोहरीकरण कार्य के लिए मेरठ में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। खुर्जा की तरफ से शुरू हुए निर्माण कार्य में देरी होने से मेरठ में भी देरी संभव है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा साल-2022 में तय की गई है। खुर्जा के पास स्थित बराल और जेनपुर में 300 से अधिक पेड़ों का कटान किया जाना है। रेलवे पेड़ कटान में अपनी जमीन पर लगे होने से इनमें हिस्सेदारी वन विभाग के साथ साझा करना चाहता है।
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साल-2017 से चल रहा मेरठ-खुर्जा दोहरीकरण कार्य
पेड़ कटान और जमीन अधिग्रहण से जूझ रहा है प्रोजेक्ट
मेरठ। रेलवे की ओर से परियोजनाओं पर कार्य तेज गति से किया जा रहा है। जिससे रेल सेवाओं को समय पर पूरा कर यात्रियों को राहत दी जा सके। लेकिन जमीन अधिग्रहण और पेड़ों के कटान में व्यवधान से प्रोजेक्ट अटकने से कार्य बाधित हो जाता है। मेरठ-खुर्जा रेलवे लाइन दोहरीकरण भी इसी वजह से अटकी है। साल-2017 में दोहरीकरण कार्य को खुर्जा की तरफ से शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट में भी जमीन अधिग्रहण और पेड़ों के कटान ने व्यवधान डाला है।
93 किमी के मेरठ-खुर्जा दोहरीकरण प्रोजेक्ट का कार्य अभी मेरठ सीमा तक नहीं पहुंचा है। प्रोजेक्ट कार्य को शुरू हुए दो साल बीत चुके हैं। लेकिन खुर्जा के बीच पेड़ कटान की वजह से प्रोजेक्ट कार्य आगे बढ़ नहीं सका है। रेलवे लाइन को बेहतर बनाने के लिए मेरठ से खुर्जा तक साल-2016 में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया था। वहीं, इस रेलवे लाइन पर 36 अंडरपास बनाए गए थे।
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550 करोड़ का कुल बजट
दोहरीकरण कार्य का बजट 550 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसके दोहरीकरण होने से लखनऊ की तरफ से आने वाली ट्रेनों को मेरठ तक डायवर्ट कर दिया जाएगा। अभी हापुड़ से ट्रेनों को गाजियाबाद की ओर रवाना कर दिया जाता है। इस रूट पर अभी संगम, खुर्जा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जाता है। हापुड़ से मेरठ तक दोहरीकरण होने से ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ जाएगी।
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मेरठ में अभी निर्माण नहीं
दोहरीकरण कार्य के लिए मेरठ में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। खुर्जा की तरफ से शुरू हुए निर्माण कार्य में देरी होने से मेरठ में भी देरी संभव है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा साल-2022 में तय की गई है। खुर्जा के पास स्थित बराल और जेनपुर में 300 से अधिक पेड़ों का कटान किया जाना है। रेलवे पेड़ कटान में अपनी जमीन पर लगे होने से इनमें हिस्सेदारी वन विभाग के साथ साझा करना चाहता है।