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ठंड कर रही बीमार, बच्चों पर खांसी-जुकाम की मार
Updated Wed, 06 Dec 2017 10:01 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
ठंड बढ़ने के साथ ही खांसी और जुकाम ने जकड़ना शुरू कर दिया है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। बच्चों में निमोनिया की भी शिकायत मिल रही है। यही वजह है कि अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले बच्चों में करीब 60 से 70 फीसदी खांसी-जुकाम के मरीज हैं।
जिला अस्पताल के शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीओम ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में अमूमन 150 से ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चों को यही परेशानी है। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर ज्यादा पड़ता है। लिहाजा परिजनों को सावधानी बरतने की जरूरत है। महिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मंजू मलिक ने बताया कि उनके यहां आउटडोर ओपीडी और इनडोर में 40 से 50 बच्चे आ रहे हैं। वहीं, मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि मेडिकल में बच्चों की ओपीडी 300 से ज्यादा चल रही है। इनमें खांसी-जुकाम पीड़ित ज्यादा आ रहे हैं।
पांच साल के बच्चों की कफ सीरप से बनाए दूरी
डॉ. श्रीओम ने बताया कि सर्दी और जुकाम की चपेट में पांच साल तक केबच्चे ज्यादा आते हैं। पांच साल से कम उम्र केबच्चों में निमोनिया की शिकायत भी सबसे ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि अक्सर बच्चे को खांसी-जुकाम होने पर परिजन कफ सीरप देते हैं। दरअसल पांच साल तक के बच्चे थूक नहीं पाते हैं। जिससे कफ सीरप से बलगम उनके अंदर ही फंसकर रह जाता है। खांसी-जुकाम होने पर बच्चों को कफ सीरप के बजाय अदरक, शहद और तुलसी जैसे प्राकृतिक तत्व देने चाहिए।
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ऐसे करें बचाव
बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें।
रूम हीटर से कमरे का वातारवरण ड्राई हो जाता है। इससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। लिहाजा नमी बनाए रखने के लिए खुले बर्तन में पानी भरकर रखें।
बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें।
अगरबत्ती, मॉस्कीटो क्वाइल समेत ऐसी कोई भी चीज कमरे में न जलाएं, जिससे सांस लेने में दिक्कत आती है।
ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
मुख्य बातें
फोटो
बढ़ रहे मरीज, चिकित्सक दे रहे बच्चों का खास ख्याल रखने की हिदायत
सरकारी अस्पतालों में बढ़ी बच्चों की ओपीडी
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मेरठ।
ठंड बढ़ने के साथ ही खांसी और जुकाम ने जकड़ना शुरू कर दिया है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। बच्चों में निमोनिया की भी शिकायत मिल रही है। यही वजह है कि अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले बच्चों में करीब 60 से 70 फीसदी खांसी-जुकाम के मरीज हैं।
जिला अस्पताल के शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीओम ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में अमूमन 150 से ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चों को यही परेशानी है। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर ज्यादा पड़ता है। लिहाजा परिजनों को सावधानी बरतने की जरूरत है। महिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मंजू मलिक ने बताया कि उनके यहां आउटडोर ओपीडी और इनडोर में 40 से 50 बच्चे आ रहे हैं। वहीं, मेडिकल अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि मेडिकल में बच्चों की ओपीडी 300 से ज्यादा चल रही है। इनमें खांसी-जुकाम पीड़ित ज्यादा आ रहे हैं।
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पांच साल के बच्चों की कफ सीरप से बनाए दूरी
डॉ. श्रीओम ने बताया कि सर्दी और जुकाम की चपेट में पांच साल तक केबच्चे ज्यादा आते हैं। पांच साल से कम उम्र केबच्चों में निमोनिया की शिकायत भी सबसे ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि अक्सर बच्चे को खांसी-जुकाम होने पर परिजन कफ सीरप देते हैं। दरअसल पांच साल तक के बच्चे थूक नहीं पाते हैं। जिससे कफ सीरप से बलगम उनके अंदर ही फंसकर रह जाता है। खांसी-जुकाम होने पर बच्चों को कफ सीरप के बजाय अदरक, शहद और तुलसी जैसे प्राकृतिक तत्व देने चाहिए।
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ऐसे करें बचाव
बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें।
रूम हीटर से कमरे का वातारवरण ड्राई हो जाता है। इससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। लिहाजा नमी बनाए रखने के लिए खुले बर्तन में पानी भरकर रखें।
बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें।
अगरबत्ती, मॉस्कीटो क्वाइल समेत ऐसी कोई भी चीज कमरे में न जलाएं, जिससे सांस लेने में दिक्कत आती है।
ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
मुख्य बातें
फोटो
बढ़ रहे मरीज, चिकित्सक दे रहे बच्चों का खास ख्याल रखने की हिदायत
सरकारी अस्पतालों में बढ़ी बच्चों की ओपीडी