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कैसा होता है इज्जतघर नहीं जानते वन गुर्जर
Updated Wed, 02 Aug 2017 12:03 AM IST
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नजीबाबाद/भागूूवाला। वन गुर्जर परिवार खुले में शौच जाने के लिए विवश हैं। ग्राम पंचायत गूढ़ा वन क्षेत्र सहित तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वन गुर्जर निवास करते हैं। इनके पास पहचान पत्र, आधार कार्ड तो है, लेकिन शासन के सुविधाओं से मोहताज हैं।
ग्राम पंचायत गूढ़ा के गुुलालवाली, रामनगर, नीमवाली, हल्दुखाता में वन गुर्जरों के अनेक डेरे हैं। इन डेरों सहित आसपास करीब 500 वन गुर्जर परिवार रहते हैं। गूढ़ा क्षेत्र के वन गुर्जर मीन (52), शमशेर (52), अकलबीवी, यामीन मुस्तफा के पास अपने फोटो पहचान पत्र और आधार कार्ड हैं। मीन और शमशेर बताते हैं कि वर्ष 2002 से वे मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में अचानक उनके नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गया। वन गुर्जर सिराजुद्दीन, गुलाम रसूल, शमशाद, मीन, शमशेर आदि ने कहा कि उन्होंने ग्राम पंचायत और प्रशासन से खुले में शौच मुक्त वातावरण देने की लगातार गुहार लगाई पर उन्हें वन गुर्जर बताकर शौचालय सुविधाएं नहीं मिलने का तर्क दिया गया। केवल गूढ़ा क्षेत्र ही नहीं तहसील के राजगढ़, साहनपुर, कौड़िया वन क्षेत्र के नत्थावाली, जाफराबाद, जट्टीवाला, कठियारी, साहनपुर नानू, घड़ियावाली सहित अनेक वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन गुर्जरों के डेरे हैं। हल्दुखाता सहित कुछ डेरों पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सोलर लाइट व्यवस्था दी गई है। गूढ़ा वन क्षेत्र के गुर्जर शौचालय, शिक्षा, पेयजल सुविधाओं से जूझ रहे हैं। वन गुर्जरों ने उत्तराखंड की तर्ज पर उन्हें आवास सहित मूलभूत सुुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रशासन से मांग की है। ग्राम प्रधान लेखराज का कहना है कि सभी वन गुर्जर के पास आईडी अवश्य है पर उनके पास अपनी भूमि नहीं है। वे वन क्षेत्र में अनाधिकृत रूप में बसे हैं। विधायक हाजी तसलीम अहमद ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं से वंचित वन गुर्जरों की समस्याएं समय-समय पर शासन तक पहुंचाई गईं हैं। जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर उनकी समस्याएं शासन तक पहुंचाई जाती रही है।
वर्जन
वन गुर्जरों के लिए सुलभ शौचालय बनाए जा रहे हैं। रेहड़ में योजना शुरू कर दी गई है। नजीबाबाद सहित अन्य क्षेत्रों में भी वन गुर्जरों के लिए सुलभ शौचालय बनाए जाएंगे। इज्जतघर का लाभ 15 अगस्त 2017 से पहले वन गुर्जरों को दिया जाएगा।
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- डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी (सीडीओ बिजनौर)
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ग्राम पंचायत गूढ़ा के गुुलालवाली, रामनगर, नीमवाली, हल्दुखाता में वन गुर्जरों के अनेक डेरे हैं। इन डेरों सहित आसपास करीब 500 वन गुर्जर परिवार रहते हैं। गूढ़ा क्षेत्र के वन गुर्जर मीन (52), शमशेर (52), अकलबीवी, यामीन मुस्तफा के पास अपने फोटो पहचान पत्र और आधार कार्ड हैं। मीन और शमशेर बताते हैं कि वर्ष 2002 से वे मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में अचानक उनके नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गया। वन गुर्जर सिराजुद्दीन, गुलाम रसूल, शमशाद, मीन, शमशेर आदि ने कहा कि उन्होंने ग्राम पंचायत और प्रशासन से खुले में शौच मुक्त वातावरण देने की लगातार गुहार लगाई पर उन्हें वन गुर्जर बताकर शौचालय सुविधाएं नहीं मिलने का तर्क दिया गया। केवल गूढ़ा क्षेत्र ही नहीं तहसील के राजगढ़, साहनपुर, कौड़िया वन क्षेत्र के नत्थावाली, जाफराबाद, जट्टीवाला, कठियारी, साहनपुर नानू, घड़ियावाली सहित अनेक वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन गुर्जरों के डेरे हैं। हल्दुखाता सहित कुछ डेरों पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सोलर लाइट व्यवस्था दी गई है। गूढ़ा वन क्षेत्र के गुर्जर शौचालय, शिक्षा, पेयजल सुविधाओं से जूझ रहे हैं। वन गुर्जरों ने उत्तराखंड की तर्ज पर उन्हें आवास सहित मूलभूत सुुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रशासन से मांग की है। ग्राम प्रधान लेखराज का कहना है कि सभी वन गुर्जर के पास आईडी अवश्य है पर उनके पास अपनी भूमि नहीं है। वे वन क्षेत्र में अनाधिकृत रूप में बसे हैं। विधायक हाजी तसलीम अहमद ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं से वंचित वन गुर्जरों की समस्याएं समय-समय पर शासन तक पहुंचाई गईं हैं। जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर उनकी समस्याएं शासन तक पहुंचाई जाती रही है।
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वन गुर्जरों के लिए सुलभ शौचालय बनाए जा रहे हैं। रेहड़ में योजना शुरू कर दी गई है। नजीबाबाद सहित अन्य क्षेत्रों में भी वन गुर्जरों के लिए सुलभ शौचालय बनाए जाएंगे। इज्जतघर का लाभ 15 अगस्त 2017 से पहले वन गुर्जरों को दिया जाएगा।
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- डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी (सीडीओ बिजनौर)