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शहर के दो मदरसों में सरकारी खजाने को लगाया जा रहा चूना
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शहर के दो मदरसों में सरकारी खजाने को लगाया जा रहा चूना
पदाधिकारी खुद को शिक्षक दर्शाकर या अपने बच्चों की नियुक्ति दिखाकर ले रहे मानदेय
मदरसा हजरत बिलाल को चलाने वाली संस्था की अध्यक्ष पत्नी, प्रबंधक पति ने तीन बेटियों को बना दिया शिक्षक
मेरठ। नियमों का उल्लंघन कर फर्जीवाड़ा करते हुए कुछ मदरसे अभी भी सरकार को चूना लगा रहे हैं। शहर में दो मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने शिक्षक नियुक्ति की नियमावली को ताक पर रखा हुआ है। इनमें एक मदरसे में जहां प्रबंध समिति के पदाधिकारी ही वेतन ले रहे हैं, तो दूसरे में प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सचिव के बच्चों को शिक्षक बताकर मानदेय लिया जा रहा है। शिकायत के बावजूद अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं।
ये है पूरा मामला
मदरसा जामा समर लिलबनात उमर गार्डन श्यामनगर को यकसान एजूकेशन वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस समिति में रोशन जहां पत्नी नसीम अहमद अध्यक्ष, सफिया पुत्री मोबीन अहमद उपाध्यक्ष, समरजहां पत्नी मोबीन अहमद सचिव, मौ. आदिल पुत्र नसीम अहमद उपसचिव, अमरीन पुत्री नसीम अहमद कोषाध्यक्ष, सुभान पुत्र मोबीन अहमद सदस्य और नसीम अहमद पुत्र वहीद सदस्य हैं। इस समिति को देखकर ही पता चलता है कि दो परिवार ही इसे पूरी तरह चला रहे हैं। ऊपर से इस समिति में पदाधिकारी सफिया, समरजहां और सुभान को मदरसा जामा समर लिलबनात में शिक्षक भी नियुक्त किया हुआ है। आधुनिक मदरसा योजना के तहत मिलने वाले शिक्षक मानदेय को ये लोग नियम विरुद्ध अपनी नियुक्ति दर्शाकर वसूल रहे हैं। इनकी शिकायत भी पूर्व में अल्पसंख्यक विभाग में हो चुकी है, लेकिन इस बार भी पांच माह का वेतन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा इन्हें जारी कर दिया गया।
दूसरा मामला मदरसा हजरत बिलाल शकूर नगर का है। यह मदरसा न्यू पब्लिक स्कूल संस्था के पंजीकरण पर संचालित है। इस संस्था में रोशन जहां अध्यक्ष और उनके पति नसीम अहमद खां प्रबंधक हैं। मदरसे में तीन शिक्षकों की जो नियुक्ति दर्शाई है, उसमें अपनी तीन पुत्रियों फरहीन, अमरीन और हीना नसीम को नियुक्त किया गया है। इनके नाम पर भी शिक्षक मानदेय अनुदान प्राप्त किया जा रहा है।
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ये मिलता है मानदेय
मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत राज्य और केंद्र सरकार अलग-अलग अंशदान देती है। इसमें स्नातक शिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 2000 रुपये और केंद्र सरकार द्वारा 6000 रुपये कुल आठ हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। जबकि परास्नातक शिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 3000 और केंद्र सरकार द्वारा 12000 रुपये अंशदान के साथ कुल 15000 रुपये मानदेय दिया जाता है। सुभान, सफिया और समरजहां को स्नातक शिक्षक के रूप में पांच माह का राज्यांश भुगतान हाल ही में किया गया है। जबकि मदरसा हजरत बिलाल में फरहीन, अमरीन और हीना नसीम को परास्नातक शिक्षक के लिए पांच माह के राज्यांश के रूप में 15000-15000 रुपये दिये गये हैं।
ये है नियुक्ति का नियम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 22 जुलाई 2016 को जारी संशोधित गजट के अनुसार, प्रबंध समिति एवं प्रधान के संबंधियों की नियुक्त उसी मदरसे में नहीं की जा सकती है। इन संबंधियों में पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री, दामाद, भाई, बहन, पति, पत्नी, माता और पिता को शामिल किया गया है।
वर्जन.............
इन दोनों मदरसों की जांच शनिवार को ही सीडीओ को सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तय की जायेगी। यदि विभागीय साठगांठ सामने आई, तो अधिकारी/ कर्मचारियों पर भी कार्रवाई तय होगी।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
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पदाधिकारी खुद को शिक्षक दर्शाकर या अपने बच्चों की नियुक्ति दिखाकर ले रहे मानदेय
मदरसा हजरत बिलाल को चलाने वाली संस्था की अध्यक्ष पत्नी, प्रबंधक पति ने तीन बेटियों को बना दिया शिक्षक
मेरठ। नियमों का उल्लंघन कर फर्जीवाड़ा करते हुए कुछ मदरसे अभी भी सरकार को चूना लगा रहे हैं। शहर में दो मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने शिक्षक नियुक्ति की नियमावली को ताक पर रखा हुआ है। इनमें एक मदरसे में जहां प्रबंध समिति के पदाधिकारी ही वेतन ले रहे हैं, तो दूसरे में प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सचिव के बच्चों को शिक्षक बताकर मानदेय लिया जा रहा है। शिकायत के बावजूद अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं।
ये है पूरा मामला
मदरसा जामा समर लिलबनात उमर गार्डन श्यामनगर को यकसान एजूकेशन वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस समिति में रोशन जहां पत्नी नसीम अहमद अध्यक्ष, सफिया पुत्री मोबीन अहमद उपाध्यक्ष, समरजहां पत्नी मोबीन अहमद सचिव, मौ. आदिल पुत्र नसीम अहमद उपसचिव, अमरीन पुत्री नसीम अहमद कोषाध्यक्ष, सुभान पुत्र मोबीन अहमद सदस्य और नसीम अहमद पुत्र वहीद सदस्य हैं। इस समिति को देखकर ही पता चलता है कि दो परिवार ही इसे पूरी तरह चला रहे हैं। ऊपर से इस समिति में पदाधिकारी सफिया, समरजहां और सुभान को मदरसा जामा समर लिलबनात में शिक्षक भी नियुक्त किया हुआ है। आधुनिक मदरसा योजना के तहत मिलने वाले शिक्षक मानदेय को ये लोग नियम विरुद्ध अपनी नियुक्ति दर्शाकर वसूल रहे हैं। इनकी शिकायत भी पूर्व में अल्पसंख्यक विभाग में हो चुकी है, लेकिन इस बार भी पांच माह का वेतन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा इन्हें जारी कर दिया गया।
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दूसरा मामला मदरसा हजरत बिलाल शकूर नगर का है। यह मदरसा न्यू पब्लिक स्कूल संस्था के पंजीकरण पर संचालित है। इस संस्था में रोशन जहां अध्यक्ष और उनके पति नसीम अहमद खां प्रबंधक हैं। मदरसे में तीन शिक्षकों की जो नियुक्ति दर्शाई है, उसमें अपनी तीन पुत्रियों फरहीन, अमरीन और हीना नसीम को नियुक्त किया गया है। इनके नाम पर भी शिक्षक मानदेय अनुदान प्राप्त किया जा रहा है।
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ये मिलता है मानदेय
मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत राज्य और केंद्र सरकार अलग-अलग अंशदान देती है। इसमें स्नातक शिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 2000 रुपये और केंद्र सरकार द्वारा 6000 रुपये कुल आठ हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। जबकि परास्नातक शिक्षक को राज्य सरकार द्वारा 3000 और केंद्र सरकार द्वारा 12000 रुपये अंशदान के साथ कुल 15000 रुपये मानदेय दिया जाता है। सुभान, सफिया और समरजहां को स्नातक शिक्षक के रूप में पांच माह का राज्यांश भुगतान हाल ही में किया गया है। जबकि मदरसा हजरत बिलाल में फरहीन, अमरीन और हीना नसीम को परास्नातक शिक्षक के लिए पांच माह के राज्यांश के रूप में 15000-15000 रुपये दिये गये हैं।
ये है नियुक्ति का नियम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 22 जुलाई 2016 को जारी संशोधित गजट के अनुसार, प्रबंध समिति एवं प्रधान के संबंधियों की नियुक्त उसी मदरसे में नहीं की जा सकती है। इन संबंधियों में पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री, दामाद, भाई, बहन, पति, पत्नी, माता और पिता को शामिल किया गया है।
वर्जन.............
इन दोनों मदरसों की जांच शनिवार को ही सीडीओ को सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तय की जायेगी। यदि विभागीय साठगांठ सामने आई, तो अधिकारी/ कर्मचारियों पर भी कार्रवाई तय होगी।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी