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आलिया
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:01 AM IST
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आलिया के कृष्ण रूप में सम्मान पर विवाद
सहारनपुर। मेरठ में श्रीमद्भागवत गीता के संस्कृत श्लोक गायन की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली आलिया खान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देवबंदी मुफ्ती ने उसके गीता श्लोक पढ़ने और कृष्ण रूप धारण करने को इस्लाम विरोधी बताया है।
श्रीमद्भागवत गीता के संस्कृत श्लोक गायन की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली आलिया खान को 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सम्मानित किया था। उन्हें 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया था। आलिया ने कृष्ण रूप धारण कर यह पुरस्कार प्राप्त किया था। सेठ बीके माहेश्वरी बालिका इंटर कॉलेज मेरठ में सोमवार को सम्मान समारोह में भी आलिया इसी रूप में मौजूद रही। दारुल उलूम के ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने आलिया खान के इस रूप पर ऐतराज जताया और कहा है कि किसी भी मुसलमान बच्ची या बच्चे का जो स्कूल के छात्र हैं, ऐसे रूप को इख्तियार करना जो इस्लाम के मुखालिफ हैं वह शिर्क ( अल्लाह के अलावा किसी दूसरे मजहब को मानना) कहलाता है। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। इस कारण अगर किसी छात्रा ने गीता के शब्द और श्लोक पढ़े हैं और कृष्ण का रूप इख्तियार किया है तो शिर्क जैसी बात है। यह ठीक नहीं है। ऐसी बातें या ड्रामों में और ऐसे प्रोग्रामों में मुसलमान बच्चों को शामिल ना करें जो उनके मजहब के खिलाफ हो।
आलिया खान का कहना है कि कि वह पहले हिंदुस्तानी है। गीता पाठ करके उसने अपने धर्म का परित्याग नहीं किया है। जो लोग इसे मुद्दा बनाकर राजनीति करना चाहते हैं वह मुस्लिम समाज के लिए अलग से विद्यालय खुलवाएं। मुझ पर अपनी राय देने से पहले शाहरुख खान, सलमान खान, अली जफर, गीता गर्ल मरियम पर भी अपनी राय दें। गीता धार्मिक किताब नहीं है। वह कर्म ज्ञान देती है। जैसे हमारे यहां नेकी कर दरिया में डाल। यही गीता सिखाती है। मैंने ज्ञान के लिए इसका पाठ किया है। ज्ञान हम किसी भी धर्म के ग्रंथ से ले सकते हैं। ग्रंथ हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाते हैं। मैंने वहीं किया है। रूप धारण करने से मेरा मजहब नहीं बदल जाता। मुझे इस तरह की राजनीति में न घसीटें। मुझे पढ़ने दें। उधर, छात्रा आलिया खान का सोमवार को सम्मान किया गया।
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सहारनपुर। मेरठ में श्रीमद्भागवत गीता के संस्कृत श्लोक गायन की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली आलिया खान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देवबंदी मुफ्ती ने उसके गीता श्लोक पढ़ने और कृष्ण रूप धारण करने को इस्लाम विरोधी बताया है।
श्रीमद्भागवत गीता के संस्कृत श्लोक गायन की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली आलिया खान को 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सम्मानित किया था। उन्हें 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया था। आलिया ने कृष्ण रूप धारण कर यह पुरस्कार प्राप्त किया था। सेठ बीके माहेश्वरी बालिका इंटर कॉलेज मेरठ में सोमवार को सम्मान समारोह में भी आलिया इसी रूप में मौजूद रही। दारुल उलूम के ऑनलाइन फतवा विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने आलिया खान के इस रूप पर ऐतराज जताया और कहा है कि किसी भी मुसलमान बच्ची या बच्चे का जो स्कूल के छात्र हैं, ऐसे रूप को इख्तियार करना जो इस्लाम के मुखालिफ हैं वह शिर्क ( अल्लाह के अलावा किसी दूसरे मजहब को मानना) कहलाता है। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। इस कारण अगर किसी छात्रा ने गीता के शब्द और श्लोक पढ़े हैं और कृष्ण का रूप इख्तियार किया है तो शिर्क जैसी बात है। यह ठीक नहीं है। ऐसी बातें या ड्रामों में और ऐसे प्रोग्रामों में मुसलमान बच्चों को शामिल ना करें जो उनके मजहब के खिलाफ हो।
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आलिया खान का कहना है कि कि वह पहले हिंदुस्तानी है। गीता पाठ करके उसने अपने धर्म का परित्याग नहीं किया है। जो लोग इसे मुद्दा बनाकर राजनीति करना चाहते हैं वह मुस्लिम समाज के लिए अलग से विद्यालय खुलवाएं। मुझ पर अपनी राय देने से पहले शाहरुख खान, सलमान खान, अली जफर, गीता गर्ल मरियम पर भी अपनी राय दें। गीता धार्मिक किताब नहीं है। वह कर्म ज्ञान देती है। जैसे हमारे यहां नेकी कर दरिया में डाल। यही गीता सिखाती है। मैंने ज्ञान के लिए इसका पाठ किया है। ज्ञान हम किसी भी धर्म के ग्रंथ से ले सकते हैं। ग्रंथ हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाते हैं। मैंने वहीं किया है। रूप धारण करने से मेरा मजहब नहीं बदल जाता। मुझे इस तरह की राजनीति में न घसीटें। मुझे पढ़ने दें। उधर, छात्रा आलिया खान का सोमवार को सम्मान किया गया।
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