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स्पेशल बच्चों का किताबें देगा एनसीईआरटी
Updated Mon, 11 Sep 2017 09:07 PM IST
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स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी ने नई पहल की है। एनसीईआरटी ने विशेष बच्चों के कहानी पढ़ने के शौक को पूरा करने के लिए विशेष किताबें तैयार की हैं। प्रयोग के तौर पर 40 कहानियों की एक किताब बनाई है। इस पुस्तक को हर तरह का शारीरिक अक्षम बच्चा आसानी से पढ़ सकता है। किताबों में अलग रंगों और उभार देकर चित्रों एवं अक्षरों को सजाकर कहानी तैयार की है। सामान्य और विशेष बच्चों के लिए एक समान किताबें तैयार की है। इससे सभी विद्यार्थी स्वयं को बराबर समझेंगे। क हानी पढ़ना हर विद्यार्थी का शौक होता है, लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे इस शौक को पूरा करने से वंचित रह जाते हैं। ऑटिज्म पीड़ित बच्चे, मूकबधिर विद्यार्थी भी इन किताबाें को आसानी से पढ़कर अपनी मनपसंद कहानी पढ़ सकेंगे। बच्चों को समझाने के लिए किताब में ब्रेल लिपि का प्रयोग किया है। चित्रों में प्रिंटिंग के साथ उभार दिए हैं जिन्हें बच्चा छूक र समझ जाए कि वो क्या है। कठिन शब्द को समझने के लिए अलग से अर्थ का खांचा बनाया है। जिसे छूकर बच्चा उस कठिन शब्द का अर्थ समझ जाएगा।
अलग रंगों और उभारों का किया प्रयोग
किताबों को बनाने के दौरान यह बात ध्यान में रखी है कि बच्चों को पन्ना पलटने से लेकर किताब के अगले-पिछले कवर पेज की पहचान में परेशानी न हो। पन्ने पर चित्रों व अक्षरों को इस तरह उभारा है। पहचान के लिए अलग रंगों और उभारों का प्रयोग किया है। इन किताबों का डिज़िटल वर्जन भी जल्द आने वाला है। देश में दो प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी शारीरिक अक्षमता का शिकार हैं। बच्चों की क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से एनसीईआरटी ने यह कदम उठाया है।
खास बातें
एनसीईआरटी की पहल, बच्चों को देगी 40 कहानियों की किताब
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स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी ने नई पहल की है। एनसीईआरटी ने विशेष बच्चों के कहानी पढ़ने के शौक को पूरा करने के लिए विशेष किताबें तैयार की हैं। प्रयोग के तौर पर 40 कहानियों की एक किताब बनाई है। इस पुस्तक को हर तरह का शारीरिक अक्षम बच्चा आसानी से पढ़ सकता है। किताबों में अलग रंगों और उभार देकर चित्रों एवं अक्षरों को सजाकर कहानी तैयार की है। सामान्य और विशेष बच्चों के लिए एक समान किताबें तैयार की है। इससे सभी विद्यार्थी स्वयं को बराबर समझेंगे। क हानी पढ़ना हर विद्यार्थी का शौक होता है, लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे इस शौक को पूरा करने से वंचित रह जाते हैं। ऑटिज्म पीड़ित बच्चे, मूकबधिर विद्यार्थी भी इन किताबाें को आसानी से पढ़कर अपनी मनपसंद कहानी पढ़ सकेंगे। बच्चों को समझाने के लिए किताब में ब्रेल लिपि का प्रयोग किया है। चित्रों में प्रिंटिंग के साथ उभार दिए हैं जिन्हें बच्चा छूक र समझ जाए कि वो क्या है। कठिन शब्द को समझने के लिए अलग से अर्थ का खांचा बनाया है। जिसे छूकर बच्चा उस कठिन शब्द का अर्थ समझ जाएगा।
अलग रंगों और उभारों का किया प्रयोग
किताबों को बनाने के दौरान यह बात ध्यान में रखी है कि बच्चों को पन्ना पलटने से लेकर किताब के अगले-पिछले कवर पेज की पहचान में परेशानी न हो। पन्ने पर चित्रों व अक्षरों को इस तरह उभारा है। पहचान के लिए अलग रंगों और उभारों का प्रयोग किया है। इन किताबों का डिज़िटल वर्जन भी जल्द आने वाला है। देश में दो प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी शारीरिक अक्षमता का शिकार हैं। बच्चों की क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से एनसीईआरटी ने यह कदम उठाया है।
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खास बातें
एनसीईआरटी की पहल, बच्चों को देगी 40 कहानियों की किताब