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मेरठ कैंटोनमेंट है कुछ खास, अंग्रेजों समझी थी अहमियत
Updated Mon, 10 Jul 2017 02:59 AM IST
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मेरठ कैंटोनमेंट है कुछ खास, अंग्रेजों ने समझी थी अहमियत
1806 में हुई थी स्थापना, छह रेजीमेंट के हेड क्वार्टर हुआ करते थे
आज भी देश के बड़े कैंटोनमेंट में शुमार, मेरठ से दिल्ली पर रहती थी नजर
फोटो
मेरठ। देश के बड़े और महत्वपूर्ण कैंटोनमेंट की बात की जाए तो मेरठ कैंटोनमेंट सबसे महत्वपूर्ण कैंट रहा है। अंग्रेजों के जमाने से लेकर अब तक कैंट की खासियत इसे सबसे अलग बनाती है। दिल्ली की सल्तनत की बात हो या वर्तमान में राजधानी की, दोनों दौर में मेरठ कैंट खास रहा है। रणनीतिक महत्व कुछ ज्यादा ही है। कैंटोनमेंट के आकार छोटे होने और अपग्रेडेशन के बावजूद अहमियत बरकरार है।
मेरठ कैंटोनमेंट की स्थापना 1806 में हुई थी। मुगल शासकों के हमले हो या अंग्रेजों का साम्राज्य विस्तार, इन सब में मेरठ कैंटोनमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दिल्ली कैंटोनमेंट से भी ज्यादा महत्वपूर्ण मेरठ कैंटोनमेंट रहा है। इतिहासकार डॉ. अमित पाठक के मुताबिक दिल्ली जब सल्तनत हुआ करती थी तब से लेकर आज तक मेरठ कैंट स्ट्रेटेजिक तौर पर महत्वपूर्ण रहा है। दिल्ली पर कब्जा जमाने के लिए मेरठ के रास्ते का सहारा लिया गया है। रास्ते और रसद आपूर्ति के लिए यह बेल्ट उपयोगी रही है। रास्ता और रसद रोककर अंग्रेज और मुगल शासकों ने दिल्ली के बादशाहों को झुकने के लिए मजबूर किया है। बात अंग्रेजों के जमाने की करें तो उन्होंने सेना की छह रेजीमेंट के मुख्यालय मेरठ कैंट में बनाए थे। यह इस बात का प्रतीक है कि मेरठ की अहमियत क्या थी। दूसरे कैंट में सैनिकों का अनुपात 90 प्रतिशत लोकल और 10 प्रतिशत अंग्रेजों का रहता था। मेरठ कैंट में यह अनुपात 50:50 का था। सबसे ज्यादा अंग्रेज सैनिक मेरठ कैंट में तैनात रहते थे। सेंट जोंस चर्च में इस जानकारी का उल्लेख है। देहरादून की जंग हो या सिंध में हमले, यह सब मेरठ के रास्ते से मुकम्मल और सफल हुए। गंगा और यमुना के दोआब के क्षेत्र में होना भी मेरठ कैंट को खास बनाता है। 1971 में पाकिस्तान से जंग होने के बाद देश में कैंटोनमेंट के स्ट्रक्चर में बदलाव हुआ। इंफ्रास्टक्चर बदले। रिकॉर्ड इधर से उधर हुए। बावजूद इसके मेरठ कैंट अभी भी अपनी अहमियत दूसरे कैंट से कहीं ज्यादा रखता है।
आज भी है खास
आज के मेरठ कैंट की खासियत को जाने तो वो भी कम नहीं है। आरवीसी कॉलेज एंड सेंटर है। यहां घोड़ों से लेकर डॉग तक की ट्रेनिंग का काम होता है। ब्रीडिंग भी होती रही है। मिलिट्री वेटरनरी लैब अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती है। 510 आर्मी बेस वर्कशॉप बड़ी वर्कशॉप में है। पश्चिमी यूपी सब एरिया मुख्यालय यहां पर है। सेना की दो बड़ी इंफ्रेंट्री पाइन और चार्जिंग रैम डिविजन यहां हैं।
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1806 में हुई थी स्थापना, छह रेजीमेंट के हेड क्वार्टर हुआ करते थे
आज भी देश के बड़े कैंटोनमेंट में शुमार, मेरठ से दिल्ली पर रहती थी नजर
फोटो
मेरठ। देश के बड़े और महत्वपूर्ण कैंटोनमेंट की बात की जाए तो मेरठ कैंटोनमेंट सबसे महत्वपूर्ण कैंट रहा है। अंग्रेजों के जमाने से लेकर अब तक कैंट की खासियत इसे सबसे अलग बनाती है। दिल्ली की सल्तनत की बात हो या वर्तमान में राजधानी की, दोनों दौर में मेरठ कैंट खास रहा है। रणनीतिक महत्व कुछ ज्यादा ही है। कैंटोनमेंट के आकार छोटे होने और अपग्रेडेशन के बावजूद अहमियत बरकरार है।
मेरठ कैंटोनमेंट की स्थापना 1806 में हुई थी। मुगल शासकों के हमले हो या अंग्रेजों का साम्राज्य विस्तार, इन सब में मेरठ कैंटोनमेंट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दिल्ली कैंटोनमेंट से भी ज्यादा महत्वपूर्ण मेरठ कैंटोनमेंट रहा है। इतिहासकार डॉ. अमित पाठक के मुताबिक दिल्ली जब सल्तनत हुआ करती थी तब से लेकर आज तक मेरठ कैंट स्ट्रेटेजिक तौर पर महत्वपूर्ण रहा है। दिल्ली पर कब्जा जमाने के लिए मेरठ के रास्ते का सहारा लिया गया है। रास्ते और रसद आपूर्ति के लिए यह बेल्ट उपयोगी रही है। रास्ता और रसद रोककर अंग्रेज और मुगल शासकों ने दिल्ली के बादशाहों को झुकने के लिए मजबूर किया है। बात अंग्रेजों के जमाने की करें तो उन्होंने सेना की छह रेजीमेंट के मुख्यालय मेरठ कैंट में बनाए थे। यह इस बात का प्रतीक है कि मेरठ की अहमियत क्या थी। दूसरे कैंट में सैनिकों का अनुपात 90 प्रतिशत लोकल और 10 प्रतिशत अंग्रेजों का रहता था। मेरठ कैंट में यह अनुपात 50:50 का था। सबसे ज्यादा अंग्रेज सैनिक मेरठ कैंट में तैनात रहते थे। सेंट जोंस चर्च में इस जानकारी का उल्लेख है। देहरादून की जंग हो या सिंध में हमले, यह सब मेरठ के रास्ते से मुकम्मल और सफल हुए। गंगा और यमुना के दोआब के क्षेत्र में होना भी मेरठ कैंट को खास बनाता है। 1971 में पाकिस्तान से जंग होने के बाद देश में कैंटोनमेंट के स्ट्रक्चर में बदलाव हुआ। इंफ्रास्टक्चर बदले। रिकॉर्ड इधर से उधर हुए। बावजूद इसके मेरठ कैंट अभी भी अपनी अहमियत दूसरे कैंट से कहीं ज्यादा रखता है।
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आज भी है खास
आज के मेरठ कैंट की खासियत को जाने तो वो भी कम नहीं है। आरवीसी कॉलेज एंड सेंटर है। यहां घोड़ों से लेकर डॉग तक की ट्रेनिंग का काम होता है। ब्रीडिंग भी होती रही है। मिलिट्री वेटरनरी लैब अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती है। 510 आर्मी बेस वर्कशॉप बड़ी वर्कशॉप में है। पश्चिमी यूपी सब एरिया मुख्यालय यहां पर है। सेना की दो बड़ी इंफ्रेंट्री पाइन और चार्जिंग रैम डिविजन यहां हैं।
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