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जब-जब मारे छापे, बंद मिले कोठे
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जब-जब मारे छापे, बंद मिले कोठे
पुलिस ने रेडलाइट एरिया की भौगोलिक स्थिति की तैयार की रिपोर्ट
मेरठ। कबाड़ी बाजार स्थित रेडलाइट एरिया में जब-जब पुलिस अधिकारियों ने छापामारी की, उन्हें वहां पर एक भी सेक्स वर्कर नहीं मिली। कोठों पर भी ताले लटके मिले। उसकी के आधार पर पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार करती है और कोर्ट में प्रस्तुत कर देती है। बताया जा रहा है कि इस बार भी पुलिस ने वहां की भौगोलिक स्थिति की कुछ ऐसी ही रिपोर्ट तैयार की है। जिसे आज (मंगलवार) को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करेगी। जबकि धरातल की स्थिति रिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने मेरठ के नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का हवाला देकर मेरठ में रेडलाइट एरिया बंद कराने की याचिका डाली है। जिसमें पुलिस, प्रशासन, सीएमओ को हाईकोर्ट में मंगलवार को जवाब देना है। विभागीय अधिकारियों ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले मेरठ रेडलाइट क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को सेक्स वर्कर नहीं मिलीं और कोठों पर ताले लगे मिले। इस आधार पर पुलिस प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार कर ली।
पहले भी भेज चुके ऐसी रिपोर्ट
पुलिस के मुताबिक एक साल पहले भी मेरठ पुलिस ऐसी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर चुकी है। जिसमें उन्होंने मेरठ में सेक्स वर्कर और कोठे न होने की बात कही है। सवाल उठता कि अगर मेरठ में रेडलाइट एरिया नहीं चलता तो इसकी शिकायत हाईकोर्ट में क्यों की गई। हालांकि लोगों का कहना है कि मेरठ में कोठे चल रहे हैं। पुलिस-प्रशासन अपनी लापरवाही छुपाने के लिए भ्रमित करने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
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कौन बोला सच और कौन झूठ
अधिवक्ता सुनील चौधरी का दावा कि आरटीआई के तहत दी जानकारी में मेरठ नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग ने सेक्स वर्कर की स्थिति के बारे में बताया है। इसमें सात सेक्स वर्करों को एचआईवी पॉजिटिव और छह सेक्स वर्कर की मौत होना बताया गया है। जिसमें एक की हत्या, दूसरी की एचआईवी के चलते मौत, तीसरी की छत से कूदकर मौत होना बताया है। सवाल उठता कि अगर कोठे नहीं चल रहे तो नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी रिपोर्ट क्यों दी।
यह मजबूत साक्ष्य साबित होंगे
अधिवक्ता के मुताबिक रेडलाइट क्षेत्र में तीन सरकारी स्कूल हैं। स्थानीय लोग परेशान है और कई परिवार यहां से पलायन तक कर चुके हैं। जिसका हवाला याचिका डालने वाले ने दिया है। इसको मजबूत साक्ष्य बताया जा रहा है। अधिवक्ता कहते हैं कि पुलिस प्रशासन ने पहले भी गलत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की थी, जिसको लेकर काफी बहस हुई थी।
शिकायतों पर छापेमारी होती है
एंटी ह्मूमन ट्रैफिकिंग की रिपोर्ट के अनुसार कबाड़ी बाजार में नाबालिग लड़कियों को बंधक बनाकर गलत काम करने की शिकायत एनजीओ के पास आती है। स्थानीय पुलिस को लेकर छापामारी की जाती है। पुलिस प्रशासन सख्ती से कोठे पर कार्रवाई करने में लगी रहती है।
पुलिस और प्रशासन ने दो बार रेडलाइट क्षेत्र का निरीक्षण किया है। दोनों बार सेक्स वर्कर नहीं मिली और ना कोठे खुले मिले। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की। हालांकि बीच बीच में भी पुलिस कार्रवाई करती रहती है।
डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, कार्यवाहक एसएसपी मेरठ
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पुलिस ने रेडलाइट एरिया की भौगोलिक स्थिति की तैयार की रिपोर्ट
मेरठ। कबाड़ी बाजार स्थित रेडलाइट एरिया में जब-जब पुलिस अधिकारियों ने छापामारी की, उन्हें वहां पर एक भी सेक्स वर्कर नहीं मिली। कोठों पर भी ताले लटके मिले। उसकी के आधार पर पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार करती है और कोर्ट में प्रस्तुत कर देती है। बताया जा रहा है कि इस बार भी पुलिस ने वहां की भौगोलिक स्थिति की कुछ ऐसी ही रिपोर्ट तैयार की है। जिसे आज (मंगलवार) को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करेगी। जबकि धरातल की स्थिति रिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने मेरठ के नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का हवाला देकर मेरठ में रेडलाइट एरिया बंद कराने की याचिका डाली है। जिसमें पुलिस, प्रशासन, सीएमओ को हाईकोर्ट में मंगलवार को जवाब देना है। विभागीय अधिकारियों ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले मेरठ रेडलाइट क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को सेक्स वर्कर नहीं मिलीं और कोठों पर ताले लगे मिले। इस आधार पर पुलिस प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार कर ली।
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पहले भी भेज चुके ऐसी रिपोर्ट
पुलिस के मुताबिक एक साल पहले भी मेरठ पुलिस ऐसी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर चुकी है। जिसमें उन्होंने मेरठ में सेक्स वर्कर और कोठे न होने की बात कही है। सवाल उठता कि अगर मेरठ में रेडलाइट एरिया नहीं चलता तो इसकी शिकायत हाईकोर्ट में क्यों की गई। हालांकि लोगों का कहना है कि मेरठ में कोठे चल रहे हैं। पुलिस-प्रशासन अपनी लापरवाही छुपाने के लिए भ्रमित करने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
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कौन बोला सच और कौन झूठ
अधिवक्ता सुनील चौधरी का दावा कि आरटीआई के तहत दी जानकारी में मेरठ नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग ने सेक्स वर्कर की स्थिति के बारे में बताया है। इसमें सात सेक्स वर्करों को एचआईवी पॉजिटिव और छह सेक्स वर्कर की मौत होना बताया गया है। जिसमें एक की हत्या, दूसरी की एचआईवी के चलते मौत, तीसरी की छत से कूदकर मौत होना बताया है। सवाल उठता कि अगर कोठे नहीं चल रहे तो नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी रिपोर्ट क्यों दी।
यह मजबूत साक्ष्य साबित होंगे
अधिवक्ता के मुताबिक रेडलाइट क्षेत्र में तीन सरकारी स्कूल हैं। स्थानीय लोग परेशान है और कई परिवार यहां से पलायन तक कर चुके हैं। जिसका हवाला याचिका डालने वाले ने दिया है। इसको मजबूत साक्ष्य बताया जा रहा है। अधिवक्ता कहते हैं कि पुलिस प्रशासन ने पहले भी गलत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की थी, जिसको लेकर काफी बहस हुई थी।
शिकायतों पर छापेमारी होती है
एंटी ह्मूमन ट्रैफिकिंग की रिपोर्ट के अनुसार कबाड़ी बाजार में नाबालिग लड़कियों को बंधक बनाकर गलत काम करने की शिकायत एनजीओ के पास आती है। स्थानीय पुलिस को लेकर छापामारी की जाती है। पुलिस प्रशासन सख्ती से कोठे पर कार्रवाई करने में लगी रहती है।
पुलिस और प्रशासन ने दो बार रेडलाइट क्षेत्र का निरीक्षण किया है। दोनों बार सेक्स वर्कर नहीं मिली और ना कोठे खुले मिले। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की। हालांकि बीच बीच में भी पुलिस कार्रवाई करती रहती है।
डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, कार्यवाहक एसएसपी मेरठ