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किसानों को मालामाल करेगी 0118 प्रजाति

Mon, 08 Apr 2019 01:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Apr 2019 01:31 AM IST
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किसानों को मालामाल करेगी 0118 प्रजाति
किसानों को मालामाल करेगी 0118 गन्ना प्रजाति
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राजदीप जाखड़
मेरठ। देश के वैज्ञानिक और गन्ना शोध संस्थान गन्ना किसानों के साथ ही शुगर इंडस्ट्री को लाभ पहुंचाने वाली गन्ना प्रजातियों को न केवल विकसित करते रहते हैं, बल्कि रोग ग्रस्त होने पर उनके स्थान पर दूसरी प्रजाति की बुआई की सलाह भी देते हैं। अब तक किसानों और इंडस्ट्री के लिए सर्वाधिक मुफीद रही गन्ना प्रजातियों सीओजे-64, 1148, सीओजे-67 और सीओ-0238 की तरह अब एक और अगेती प्रजाति सीओ-0118 की धूम मची है। यह प्रजाति किसानों को प्रति हेक्टेयर बेहतर उपज के साथ ही चीनी मिलों के लिए भरपूर रिकवरी से लैस है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सीओ-0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग दिखाई देने पर गन्ना किसान इसके स्थान पर सीओ-0118 का इस्तेमाल कर लाभान्वित हो सकते हैं।
रोग प्रतिरोधी है यह प्रजाति
गन्ना वैज्ञानिकों का कहना है कि सीओ-0118 लाल सड़न रोग प्रतिरोधी है और यह सीओजे-64 की जगह उपयुक्त किस्म है। इस प्रजाति का गुड़ हल्के पीले रंग का ए1 श्रेणी का बनता है। सीओजे-64 की तुलना में इसमें गन्ने व चीनी की पैदावार में 15 फीसदी सुधार तथा शर्करा की मात्रा में 3.1 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया। अखिल भारतीय गन्ना अनुसंधान समन्वयक परियोजना में सीओ-0118 उत्तरी पश्चिमी जोन में गन्ने व चीनी की पैदावार तथा शर्करा की मात्रा के लिए तीसरे स्थान पर रही थी।
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बंपर उत्पादन के लिए जानी जाती है प्रजाति
सीओ-0118 बंपर उत्पादन के लिए जानी जाती है। इसके गन्ने लंबे, मध्यम मोटाई के धूसर बैंगनी रंग के हैं। इसकी पोरियां बेलनाकार होती है। सूखने पर इसकी पत्तियां अपने आप गिर जाती है। इसकी आंख गोल अंडाकार से प्रति अंडाकार आकार की है। पत्राधार के दोनों तरफ भाले के आकार के लंबे कर्ण पाए जाते हैं। पत्राधार पर हल्के स्वयं झड़ने वाले कांटे होते हैं। गन्ने की पोरियां फटती नहीं है।
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यह करें किसान
- खेत की तैयारी करते समय 2 किलो ट्राइकोड्रमा प्रति एकड़ सड़ी गोबर के साथ डालें।
- पौधशाला का उपचारित बीज बोएं।
- गन्ने का एक तिहाई ऊपरी हिस्सा ही बुआई में इस्तेमाल करें।
- बुआई में ट्रैंच विधि का प्रयोग करें।
- संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
- विलंबित बुआई से तौबा करें।
- गेहूं और गन्ने का सदियों पुराना फसल चक्र बदल दें।
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