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डायबिटीज है तो नमक, मैदा और चीनी कर दें कम
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डायबिटीज है तो नमक, मैदा और चीनी कर दें कम
- आरएसएसडीआई द्वारा डायबिटीज जनचेतना सम्मेलन का आयोजन
- आईएमए हॉल में हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) संस्था द्वारा डायबिटीज (मधुमेह) बीमारी को लेकर बृहस्पतिवार को आईएमए भवन में जनचेतना सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लोगों के सवालों का जवाब देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया।
डाइटिशियन डॉ. भावना गांधी ने बताया कि तीन सफेद चीजों का प्रयोग कम करना चाहिए, जिनमें नमक, मैदा और चीनी खास हैं। उन्होंने पारंपरिक भोजन को अपनाने पर बल दिया। कार्बोहाइड्रेट्स कथा चिकनाई का प्रयोग कम करने से डायबिटीज को नियंत्रण में रखा जा सकता है। जूस की अपेक्षा फलों को काट कर खाना लाभप्रद होता है। उन्होंने रेशेदार सब्जियां खाने पर जोर दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया की शुगर के मरीज को हर ढाई घंटे में हल्का खाना खाना चाहिए। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, पेस्ट्री, चॉकलेट आदि से खासतौर से परहेज करना चाहिए। डॉ. सोंधी ने बताया कि कई बार गूगल, टीवी या अन्य सूचना माध्यमों से मिली भ्रामक जानकारी के बहकावे में ना आकर अपने चिकित्सक से शुगर की दवाइयों के बारे में पूछताछ करनी चाहिए। कई बार दवाइयों को छोड़ने से जान पर बन सकती है।
इस अवसर पर ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. राकेश एरन, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. एसपी सोंधी और डॉ वीरोत्तम तोमर ने बताया कि मेरठ में शुक्रवार से शुरू होने वाली डायबिटीज की कॉन्फ्रेंस में चिकित्सकों को कई नई जानकारियां प्राप्त होंगी, जिससे शुगर के मरीजों को अत्याधुनिक इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि भारत में डायबिटीज के करीब 15 प्रतिशत रोगी हैं जिनकी अनुमानित संख्या करीब 14 करोड़ है, इनमें से अधिकतर को अपनी बीमारी के बारे में सही जानकारियां नहीं हैं। शुगर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित रस्तोगी, मनीष शारदा, आदित्य गुप्ता, अनुराधा अग्रवाल, सरिता, राजीव, मधु तोमर, एमसी अग्रवाल, डॉ. विकास गुप्ता उपस्थित थे।
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- आरएसएसडीआई द्वारा डायबिटीज जनचेतना सम्मेलन का आयोजन
- आईएमए हॉल में हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) संस्था द्वारा डायबिटीज (मधुमेह) बीमारी को लेकर बृहस्पतिवार को आईएमए भवन में जनचेतना सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लोगों के सवालों का जवाब देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया।
डाइटिशियन डॉ. भावना गांधी ने बताया कि तीन सफेद चीजों का प्रयोग कम करना चाहिए, जिनमें नमक, मैदा और चीनी खास हैं। उन्होंने पारंपरिक भोजन को अपनाने पर बल दिया। कार्बोहाइड्रेट्स कथा चिकनाई का प्रयोग कम करने से डायबिटीज को नियंत्रण में रखा जा सकता है। जूस की अपेक्षा फलों को काट कर खाना लाभप्रद होता है। उन्होंने रेशेदार सब्जियां खाने पर जोर दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया की शुगर के मरीज को हर ढाई घंटे में हल्का खाना खाना चाहिए। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, पेस्ट्री, चॉकलेट आदि से खासतौर से परहेज करना चाहिए। डॉ. सोंधी ने बताया कि कई बार गूगल, टीवी या अन्य सूचना माध्यमों से मिली भ्रामक जानकारी के बहकावे में ना आकर अपने चिकित्सक से शुगर की दवाइयों के बारे में पूछताछ करनी चाहिए। कई बार दवाइयों को छोड़ने से जान पर बन सकती है।
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इस अवसर पर ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. राकेश एरन, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. एसपी सोंधी और डॉ वीरोत्तम तोमर ने बताया कि मेरठ में शुक्रवार से शुरू होने वाली डायबिटीज की कॉन्फ्रेंस में चिकित्सकों को कई नई जानकारियां प्राप्त होंगी, जिससे शुगर के मरीजों को अत्याधुनिक इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि भारत में डायबिटीज के करीब 15 प्रतिशत रोगी हैं जिनकी अनुमानित संख्या करीब 14 करोड़ है, इनमें से अधिकतर को अपनी बीमारी के बारे में सही जानकारियां नहीं हैं। शुगर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित रस्तोगी, मनीष शारदा, आदित्य गुप्ता, अनुराधा अग्रवाल, सरिता, राजीव, मधु तोमर, एमसी अग्रवाल, डॉ. विकास गुप्ता उपस्थित थे।
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