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नये अफसर कराएंगे जनपद में चुनाव
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- कई अधिकारी बदले, कई पर तबादले की तलवार
- अधिकतर पीसीएस अधिकारी बदले जाने से कहीं चुनावी तैयारियों को न लग जाए झटका
मेरठ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले पुलिस-प्रशासनिक अमले को बदलने की कवायद शुरू कर दी है। मेरठ में कई पीसीएस अधिकारी बदले जा चुके हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव का भार नए अधिकारियों पर होगा, जो चुनावी तैयारी को झटका भी दे सकता है।
एसडीएम सदर निशा अनंत का पांच दिन पूर्व ट्रांसफर हो चुका है। जबकि शुक्रवार रात जारी सूची में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, एडीएम वित्त आनंद कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार का भी ट्रांसफर हो गया। जबकि अभी भी कई अधिकारियों पर तबादले की तलवार लटकी हुई है। वहीं, एसपी देहात और एसपी सिटी दोनों के ट्रांसफर भी हो चुके हैं।
चुनाव से ऐन पहले हुए इन बंपर तबादलों के बाद चुनावी तैयारी और चुनाव कराने में ये नए अधिकारी कैसे कामयाब होंगे, इसकी चर्चा पुलिस प्रशासनिक हलके में हो रही है। दरअसल मेरठ संवेदनशील जनपद माना जाता है। जनपद की सात विधानसभाएं चार लोकसभा सीटों में बंटी हैं। जिसे लेकर मतदान प्रक्रिया के बीच मतगणना बहुत ही संवेदनशील हो जाती है। ऐसे में नए अधिकारी मेरठ के माहौल को जब तक भांपेंगे, तब तक चुनाव सिर पर आ जाएंगे। ऐसे में चुनाव शांतिपूर्ण कराना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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- अधिकतर पीसीएस अधिकारी बदले जाने से कहीं चुनावी तैयारियों को न लग जाए झटका
मेरठ। उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले पुलिस-प्रशासनिक अमले को बदलने की कवायद शुरू कर दी है। मेरठ में कई पीसीएस अधिकारी बदले जा चुके हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव का भार नए अधिकारियों पर होगा, जो चुनावी तैयारी को झटका भी दे सकता है।
एसडीएम सदर निशा अनंत का पांच दिन पूर्व ट्रांसफर हो चुका है। जबकि शुक्रवार रात जारी सूची में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, एडीएम वित्त आनंद कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार का भी ट्रांसफर हो गया। जबकि अभी भी कई अधिकारियों पर तबादले की तलवार लटकी हुई है। वहीं, एसपी देहात और एसपी सिटी दोनों के ट्रांसफर भी हो चुके हैं।
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चुनाव से ऐन पहले हुए इन बंपर तबादलों के बाद चुनावी तैयारी और चुनाव कराने में ये नए अधिकारी कैसे कामयाब होंगे, इसकी चर्चा पुलिस प्रशासनिक हलके में हो रही है। दरअसल मेरठ संवेदनशील जनपद माना जाता है। जनपद की सात विधानसभाएं चार लोकसभा सीटों में बंटी हैं। जिसे लेकर मतदान प्रक्रिया के बीच मतगणना बहुत ही संवेदनशील हो जाती है। ऐसे में नए अधिकारी मेरठ के माहौल को जब तक भांपेंगे, तब तक चुनाव सिर पर आ जाएंगे। ऐसे में चुनाव शांतिपूर्ण कराना पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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