फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   हैंडपंप उखाड़ दिए, पेयजल का इंतजाम नहीं किया

हैंडपंप उखाड़ दिए, पेयजल का इंतजाम नहीं किया

Sun, 31 Dec 2017 01:09 AM IST
Updated Sun, 31 Dec 2017 01:09 AM IST
विज्ञापन
हैंडपंप उखाड़ दिए, पेयजल का इंतजाम नहीं किया
रमाला (बागपत)।
विज्ञापन

गांव बूढ़पुर और कृष्णा नदी के आसपास के गांवों के बाशिंदे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। प्रदूषित हो गए भूजल को बीमारियों की वजह माना जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी स्वच्छ पेयजल का कोई साधन गांवों में नहीं है। हिंडन और कृष्णा नदी के प्रदूषण का मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के पास भी पहुंचा। हैंडपंपों के प्रदूषित पानी की रिपोर्ट एनजीटी ने देखी तो करीब 35 गांवों के 413 हैंडपंप उखाडने के आदेश दिए थे। प्रशासन ने इस आदेश का पालन करते हुए हैंडपंप तो उखाड़ दिए, लेकिन आदेश के ही दूसरे हिस्से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति कराने का कोई इंतजाम नहीं किया।
ग्रामीणों की माने तो वे शिकायतें कर-कर थक चुके हैं, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। गर्मी में प्रशासन ने एक या दो बार पानी के टैंकर जरूर भिजवाए थे। असारा गांव के अय्यूब बताते हैं कि आठ हैंडपंप उनके गांव से उखाड़े गए थे। लेकिन इनका कोई विकल्प ग्रामीणों को नहीं दिया गया। गांगनौली गांव से 13 हैंडपंप उखाड़े गए। यह गांव कृष्णा नदी के किनारे पर बसा है और कैंसर का दंश यहां के ग्रामीण झेल रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक यहां भी हैंडपंप रिबोर नहीं कराए हैं। गांव इकबाल सिंह, सरपाल सिंह, प्रताप सिंह, जसबीर प्रमुख, गौरव कुमार, संजीव आर्य, विपिन राठी, संजय राठी का कहना है कि प्रशासन को इंतजाम करना चाहिए था, जो लोग पानी के लिए इन हैंडपंपों पर निर्भर थे, वे अब कहां जाएं। अशरफाबाद थल निवासी जुल्ला प्रधान, नवाब अली, शकुरा ने कहा कि एनजीटी ने आदेश दिया और प्रशासन ने हैंडपंप उखाड़ दिए, लेकिन साथ स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने को कहा था, वह आदेश प्रशासन मानने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन


भविष्य में सबमर्सिबल बनेंगे नया खतरा

रमाला। भगवानपुर नांगल के राजपाल शास्त्री, भीम सिंह, चरण सिंह कहते हैं कि हैंडपंप नहीं रहे। लोग धीरे-धीरे सबमर्सिबल लगवा रहे हैं। आने वाले समय में यह सबसे बड़ा खतरा बनेंगे, इनसे जल का अधिक दोहन और अधिक बर्बादी हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बीमारियां परोस रहे थे गांवों में लगे हैंडपंप

रमाला। जो हैंडपंप उखाड़े गए वह लोगों को बीमारियां परोस रहे थे। इनका पानी पीकर लोग कैंसर और लीवर कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में भी आ गए। दोआबा पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने एनजीटी में रिट दायर की थी। वह बताते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण रोकने और ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के आदेश हो चुके हैं।

खतरनाक स्तर पर पहुंची है लेड की मात्रा

रमाला। चार साल पहले जल निगम ने जो जांच कराई थी उसमें, नदी के पानी में लेड (सीसा) की मात्रा 0.34 मिलीग्राम/लीटर पाई जा चुकी है। यह सामान्य से 34 गुणा अधिक है। इसमें क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम/लीटर पाई गई है, जो कि सामान्य से 19 गुणा अधिक है। पेयजल में लेड की अधिकता के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा लगातार बना रहता है।

किससे क्या होती है बीमारी

लेड : गुर्दे की कार्यप्रणाली और हड्डियां प्रभावित होती है। एनीमिया, मुंह में जल जलन, पेट में मरोड़, उल्टी, पेट में दर्द, लकवा, मानसिक रोग और खून की कमी की संभावना भी रहती है।

कैडमियम: गुर्दे, दिमागी बीमारियां, शरीर में ऐंठन, तनाव, पेचिस व कैंसर आदि बीमारियां और क्रोमियम से फेफड़ों का कैंसर, त्वचा एवं नाक की झिल्ली में अल्सर होने की संभावना रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed