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640 गोवंश भूखे, चारा-चोकर पर 35 लाख साफ और नहीं मिला कमेटी को हिसाब

Wed, 23 Jul 2025 02:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:01 AM IST
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640 cattle starved, 35 lakhs spent on fodder and bran and the committee did not get the account
थाना सिविल लाइन में खड़ा डॉ हरपाल
- डीएम और नगर आयुक्त की जांच कमेटियों ने दो टीन-शेड में बंधे गोवंशों को चारा न मिलने की दी थी रिपोर्ट
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- सात टीन-शेड में 2549 गोवंश होने का दावा, राज्यसभा सदस्य की गिनती में एक टीन-शेड में 340 गोवंश
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गोशाला प्रकरण में डीएम डॉ. वीके सिंह और नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने अलग-अलग गठित दोनों कमेटी ने सात में से दो टीन-शेड में करीब 640 गोवंश को चारा न मिलने की रिपोर्ट दी है। इनमें एक टीन-शेड में बहुत गोवंशों की ज्यादा दुर्दशा थी। गोशाला में प्रतिमाह 35 लाख रुपये चारा-चोकर पर निगम खर्च कर रहा है, लेकिन कितना चारा-चोकर और अन्य सामान बाजार से आता है और कितना खर्च होता है। इसका कोई लेखा-जोखा कमेटी को नहीं मिला है।
गोशाला में काम करने वाले दस कर्मचारियों ने गोवंशों को लावारिस छोड़ दिया था। दोनों कमेटी ने कर्मचारियों के साथ-साथ गोशाला प्रभारी एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को जिम्मेदार ठहरा दिया। गोवंशो की दुर्दशा होने की जानकारी के बाद डीएम द्वारा एडीएम सिटी बृजेश सिंह और मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप शर्मा की एक कमेटी जांच के लिए बनाई है। जांच कमेटी में चारा-चोकर, पानी, रखरखाव और निगम की व्यवस्था में लापरवाही बता दी।
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डीएम ने 14 जुलाई 2025 को नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे। नगर आयुक्त ने कार्रवाई नहीं की और खुद भी अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी और मुख्य लेखा नगर परीक्षक अमित भार्गव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। गोवंशों की दुर्दशा होने का समाचार अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। भाजपा नेता, पार्षद और आमजन का आक्रोश देखते हुए और मुकदमे की मांग उठने लगी तो 16 जुलाई को नगर आयुक्त ने 10 कर्मचारियों को हटाकर मामले में लीपापोती कर दी।
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी को बचाते रहे अफसर
जिम्मेदार प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निगम के अफसर बचाते रहे। नतीजा रहा प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह के सामने मुद्दा गर्माया। नगर आयुक्त द्वारा गठित कमेटी ने भी 18 जुलाई को गोशाला में अनियमितता और गोवंशों की दुर्दशा होने की जांच रिपोर्ट सौंपी। प्रभारी मंत्री ने गोशाला पहुंचकर निरीक्षण किया और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को तुरंत हटाने की बात कही। नगर आयुक्त की जांच कमेटी ने गोशाला में सरकारी संपत्ति को गबन करने के आरोप भी डॉ. हरपाल सिंह और केयर टेकर पर लगा दिए।

मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचने पर मांगी प्रमुख सचिव ने रिपोर्ट
मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने नगर आयुक्त को फटकार लगाते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। दोनों जांच रिपोर्ट में दो टीन-शेड में बंधे गोवंशों को चारा न मिलने की बात लिखी। निरीक्षण के दौरान राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एक टीन-शेड में गोवंशों की गिनती कराई थी, जिसमें 340 गोवंश मिले थे। जिससे स्पष्ट हो गया कि गोशाला में बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा था।
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