{"_id":"5c5605cbbdec222be735832d","slug":"61549141451-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घोटाले की जांच इंस्पेक्टर से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घोटाले की जांच इंस्पेक्टर से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घोटाले की जांच इंस्पेक्टर से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी
मेरठ। इंद्रप्रस्थ एस्टेट सहकारी समिति के नाम पर करोड़ों के घोटाले की जांच डीआईजी मेरठ ने इंस्पेक्टर इंद्रपाल से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इसको लेकर वादी पक्ष शनिवार को एडीजी मेरठ से मिला। आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों से साठगांठ कर जानबूझकर विवेचना को इंस्पेक्टर से हटाया है। वहीं, डीआईजी का कहना है कि घोटाले की जांच करने वाले इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। विवेचना प्रभावित हो सकती थी, इसको देखते हुए जांच इंस्पेक्टर से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
पुलिस के मुताबिक इस घोटाले के मामले में नामजद उप आवास आयुक्त (रिटायर्ड) वीके चौधरी को इंस्पेक्टर पल्लवपुरम (अपराध) इंद्रपाल सिंह ने लखनऊ से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इंस्पेक्टर ने एक दिन पहले ही कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लिया और फिर एक सिपाही को लेकर लखनऊ जाकर उनके आवास से वीके चौधरी की गिरफ्तारी की।
पुलिस का मानना कि इंस्पेक्टर की जल्दबाजी और पुलिस अफसरों को बगैर जानकारी दिए वीके चौधरी को लखनऊ से गिरफ्तार करना संदेह के घेरे में है। इसको देखते हुए डीआईजी अखिलेश कुमार ने सीओ अखिलेश भदौरिया की रिपोर्ट पर इंस्पेक्टर से जांच हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी। शनिवार को मुकदमे की वादी बिजेंद्र चौहान निवासी रोशनपुर डौरली पल्लवपुरम और मनोज त्यागी निवासी वेस्टर्न कचहरी समेत कई लोग एडीजी प्रशांत कुमार से मिले।
विज्ञापन
सेटिंग का पुलिस पर आरोप
वादी पक्ष से बिजेंद्र चौहान ने इंस्पेक्टर इंद्रपाल सिंह को दोबारा से जांच सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। एडीजी मेरठ जोन ने जांच निष्पक्ष कराने की बात कही।
इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध
डीआईजी अखिलेश कुमार का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी। जो आरोपी होगा, वहीं जेल जाएगा। घोटाले के पीछे नामजद आरोपियों के अलावा भी दूसरे लोग हैं, जिन्होंने इसकी आड़ में पैसा लिया है। उन्हें भी पुलिस उजागर करेगी।
गलत तरीके से भेजा जेल
इंस्पेक्टर ने वीके चौधरी को गलत तरीके से जेल भेजा है। आवास आयुक्त लखनऊ, सरकारी अथॉरिटी और किसी भी अधिकारी का बयान पूर्व विवेचक इंस्पेक्टर इंद्रपाल सिंह ने लेना क्यों मुनासिब नहीं समझा। इंस्पेक्टर ने साठगांठ व गलत विवेचना कर वीके चौधरी को जेल भेजा है। डीआईजी ने विवेचना ट्रांसफर ठीक की है। -रोहताश अग्रवाल, सीनियर अधिवक्ता (वीके चौधरी के वकील)
विज्ञापन
मेरठ। इंद्रप्रस्थ एस्टेट सहकारी समिति के नाम पर करोड़ों के घोटाले की जांच डीआईजी मेरठ ने इंस्पेक्टर इंद्रपाल से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इसको लेकर वादी पक्ष शनिवार को एडीजी मेरठ से मिला। आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों से साठगांठ कर जानबूझकर विवेचना को इंस्पेक्टर से हटाया है। वहीं, डीआईजी का कहना है कि घोटाले की जांच करने वाले इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। विवेचना प्रभावित हो सकती थी, इसको देखते हुए जांच इंस्पेक्टर से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
पुलिस के मुताबिक इस घोटाले के मामले में नामजद उप आवास आयुक्त (रिटायर्ड) वीके चौधरी को इंस्पेक्टर पल्लवपुरम (अपराध) इंद्रपाल सिंह ने लखनऊ से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इंस्पेक्टर ने एक दिन पहले ही कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लिया और फिर एक सिपाही को लेकर लखनऊ जाकर उनके आवास से वीके चौधरी की गिरफ्तारी की।
विज्ञापन
पुलिस का मानना कि इंस्पेक्टर की जल्दबाजी और पुलिस अफसरों को बगैर जानकारी दिए वीके चौधरी को लखनऊ से गिरफ्तार करना संदेह के घेरे में है। इसको देखते हुए डीआईजी अखिलेश कुमार ने सीओ अखिलेश भदौरिया की रिपोर्ट पर इंस्पेक्टर से जांच हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपी। शनिवार को मुकदमे की वादी बिजेंद्र चौहान निवासी रोशनपुर डौरली पल्लवपुरम और मनोज त्यागी निवासी वेस्टर्न कचहरी समेत कई लोग एडीजी प्रशांत कुमार से मिले।
विज्ञापन
सेटिंग का पुलिस पर आरोप
वादी पक्ष से बिजेंद्र चौहान ने इंस्पेक्टर इंद्रपाल सिंह को दोबारा से जांच सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। एडीजी मेरठ जोन ने जांच निष्पक्ष कराने की बात कही।
इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध
डीआईजी अखिलेश कुमार का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी। जो आरोपी होगा, वहीं जेल जाएगा। घोटाले के पीछे नामजद आरोपियों के अलावा भी दूसरे लोग हैं, जिन्होंने इसकी आड़ में पैसा लिया है। उन्हें भी पुलिस उजागर करेगी।
गलत तरीके से भेजा जेल
इंस्पेक्टर ने वीके चौधरी को गलत तरीके से जेल भेजा है। आवास आयुक्त लखनऊ, सरकारी अथॉरिटी और किसी भी अधिकारी का बयान पूर्व विवेचक इंस्पेक्टर इंद्रपाल सिंह ने लेना क्यों मुनासिब नहीं समझा। इंस्पेक्टर ने साठगांठ व गलत विवेचना कर वीके चौधरी को जेल भेजा है। डीआईजी ने विवेचना ट्रांसफर ठीक की है। -रोहताश अग्रवाल, सीनियर अधिवक्ता (वीके चौधरी के वकील)