{"_id":"5a32e09f4f1c1b502b8b4875","slug":"61513283743-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीजनबाई ने पांड़वानी में सुनाई महाभारत कथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीजनबाई ने पांड़वानी में सुनाई महाभारत कथा
Updated Fri, 15 Dec 2017 02:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। पद्मश्री, पद्मभूषण डॉ. तीजनबाई ने पांडवानी में महाभारत कथा सुनाई तो छात्राएं मंत्रमुग्ध हो गईं। उन्होंने अर्जुन और कर्ण के युद्ध की ओजपूर्ण प्रस्तुति की। इससे मंच पर युद्ध जैसा नजारा दिखने लगा। दुर्योधन और दुशासन वध, द्रोपदी स्वयंवर का वर्णन किया। यह कार्यक्रम स्पीक मैके संस्था द्वारा बृहस्पतिवार को ब्रह्मपुरी स्थित चावली देवी आर्य कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित किया गया।
दुनिया में चर्चित कथाओं में से एक महाभारत की कथा को पूरे वेग और संप्रेषणिता के जरिए कपालिक शैली को मंच पर उतारने वाली पहली महिला डॉ. तीजनबाई के लिए छात्राओं ने कई बार तालियां बजाईं। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने सबको प्रभावित किया। कार्यक्रम में उनके साथ संगत कलाकार चैतराम (हारमोनियम/सहगायक), केवल देशमुख (तबला), नरोत्तम नेताराम (ढोलक), डालेश्वर निर्मलकर (बैंजो), रामचंद्र निषाद (डफली) रहे। इनके अलावा कार्यक्रम में खेमलाल नेताम (सचिव) और स्कूल प्रिंसिपल डॉ. नीलम आदि रहे। प्रिंसिपल ने डॉ. तीजन बाई को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन सहायक अध्यापिका अलका यादव ने किया।
पांडवों की धरती पर पांडवानी सुनाना गर्व की बात
डॉ. तीजनबाई ने कहा कि मेरठ पांडवों की धरती है। जिस पर पांडवानी सुनाना गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि वे अनपढ़ हैं। उन्होंने अपने नाना से पांडवानी सीखी थी। वे 13 साल की उम्र से पांडवानी में महाभारत कथा सुना रही हैं। 71 साल की उम्र में इस तरह की ऊर्जा पर उन्होंने कहा कि मंच पर जाते ही, पता नहीं कहा से उनमें ऊर्जा आ जाती है। वे चाहती हैं कि भारतवर्ष में लोक कला जीवित रहे। उन्होंने कहा कि अपनी मिट्टी से जुड़े रहना ही असली संस्कृति है।
विज्ञापन
आज हैं दो स्कूलों में कार्यक्रम
डॉ. तीजनबाई शुक्रवार को दो स्कूलों में पांडवानी में महाभारत कथा सुनाएंगी। सुबह साढ़े नौ बजे से एमपीजीएस शास्त्रीनगर में वे शिरकत करेंगी। इसके अलावा साढ़े 11 बजे विद्या ग्लोबल स्कूल में भी जाएंगी।
विज्ञापन
दुनिया में चर्चित कथाओं में से एक महाभारत की कथा को पूरे वेग और संप्रेषणिता के जरिए कपालिक शैली को मंच पर उतारने वाली पहली महिला डॉ. तीजनबाई के लिए छात्राओं ने कई बार तालियां बजाईं। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने सबको प्रभावित किया। कार्यक्रम में उनके साथ संगत कलाकार चैतराम (हारमोनियम/सहगायक), केवल देशमुख (तबला), नरोत्तम नेताराम (ढोलक), डालेश्वर निर्मलकर (बैंजो), रामचंद्र निषाद (डफली) रहे। इनके अलावा कार्यक्रम में खेमलाल नेताम (सचिव) और स्कूल प्रिंसिपल डॉ. नीलम आदि रहे। प्रिंसिपल ने डॉ. तीजन बाई को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। संचालन सहायक अध्यापिका अलका यादव ने किया।
विज्ञापन
पांडवों की धरती पर पांडवानी सुनाना गर्व की बात
डॉ. तीजनबाई ने कहा कि मेरठ पांडवों की धरती है। जिस पर पांडवानी सुनाना गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि वे अनपढ़ हैं। उन्होंने अपने नाना से पांडवानी सीखी थी। वे 13 साल की उम्र से पांडवानी में महाभारत कथा सुना रही हैं। 71 साल की उम्र में इस तरह की ऊर्जा पर उन्होंने कहा कि मंच पर जाते ही, पता नहीं कहा से उनमें ऊर्जा आ जाती है। वे चाहती हैं कि भारतवर्ष में लोक कला जीवित रहे। उन्होंने कहा कि अपनी मिट्टी से जुड़े रहना ही असली संस्कृति है।
विज्ञापन
आज हैं दो स्कूलों में कार्यक्रम
डॉ. तीजनबाई शुक्रवार को दो स्कूलों में पांडवानी में महाभारत कथा सुनाएंगी। सुबह साढ़े नौ बजे से एमपीजीएस शास्त्रीनगर में वे शिरकत करेंगी। इसके अलावा साढ़े 11 बजे विद्या ग्लोबल स्कूल में भी जाएंगी।