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आईआईएमटी में हुआ मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का शुभारंभ
Updated Sat, 25 Nov 2017 02:06 AM IST
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मेरठ। सदियों से फिजा में उड़ती शब्द-साहित्य की अनुगूंज को क्रांतिधरा पर नमन किया गया। हिंदी के विस्तार पर चर्चा गई। विशेज्ञषों ने मेरठ में पहली बार मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का आगाज किया। नेपाल व भूटान सहित अन्य देशों से आए शब्द महारथियों ने इस साहित्य संगम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आईआईएमटी विवि में शुक्रवार को तीन दिवसीय मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने साहित्य उत्सव का शुभारंभ किया। आईआईएमटी के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता एवं ग्रीन केयर सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विजय पंडित, पूनम पंडित ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। अन्य अतिथियों में सार्क विवि दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. राजीव कृष्ण सक्सेना, भूटान के वरिष्ठ साहित्यकार छत्रपति फुएल, कनाडा के साहित्यकार सरन घई, नेपाल के साहित्यकार बसंत चौधरी, त्रिभुवन विवि नेपाल से लेखिका डॉ. श्वेता दीप्ति, भारत सरकार साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा अरुण कार्यक्रम में शामिल रहे। एनसीसी कै डेट्स व आरवीसी के बैंड ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुस्तक प्रदर्शनी में नेपाल व भारतीय हिंदी साहित्य की किताबें रखी गई। छात्रों ने इंजीनियरिंग के मॉडल की प्रदर्शनी लगाई। नेपाल व भूटान से 50 साहित्यकारों के दल ने समारोह में भाग लिया। देश के विभिन्न राज्यों के साहित्य चिंतकों ने भागीदारी निभाई। साहित्यकार विघभनेश त्यागी ने मेरठ के 5000 साल पुराने इतिहास पर प्रकाश डाला।
सेना के संघर्ष पर लिखा जाए साहित्य
राज्यपाल रामनाईक ने कहा मेरठ से 1857 की क्रांति फूटी, अंग्रेजों ने उस घटना को बगावत का नाम देकर साहित्य में दर्ज कराया। तब वीर सावरकर ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पुस्तक लिखकर आजादी के उस अभूतपूर्व पल को सही स्थान दिलाया। मेरठ महाभारत काल का साक्षी है। यहां साहित्य सम्मेलन का होना गौरवपूर्ण बात है। संस्कृति में अनेक साहित्य है। उन्होंने कहा साहित्य भारत के सांस्कृतिक इतिहास की पूंजी है। ये विस्तार जब हम समझेंगे तभी साहित्य का अर्थ जान पाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि संग्राम से साहित्य उपजता है। राम-रावण संघर्ष से रामायण, कौरव-पांडव संघर्ष से महाभारत बना। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। कश्मीर में 1947 से एक छद्म युद्ध चल रहा है। इस युद्ध में भारतीय सेना के संग्राम पर एक साहित्य होना चाहिए। वहां सेना कैसे लड़ रही है। यह लिखा जाना चाहिए। साहित्यकारों, कलाकारों को अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए। इसकी चर्चा समय-समय पर हो। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे साहित्य की अभिव्यक्ति को तय करें। उन्होंने बताया 2014 तक मैंने मतदाताओं को जनप्रतिनिधियों की वास्तविक रिपोर्ट लिखकर देने का काम किया।
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नेपाल-भारत में साहित्यिक भाईचारे का नाता
नेपाल की साहित्यकार डॉ. श्वेता दीप्ति ने कहा भारत-नेपाल का नाता दो सगे भाइयों जैसा रहा है। नेपाल में हिंदी को बढ़ावा देना का हरसंभव प्रयास हुआ है। भारत के संविधान में नेपाली को स्थान दिया तो नेपाल ने भी अपने संविधान में हिंदी को अपनाया। संबंधों की यह प्रगाढ़ता अटूट है। नेपाल के साहित्यकार बसंत ने भी बाल गीता व हिंदी के महान व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
भारतवासी ही हिंदी से बना रहे दूरी
सार्क विवि नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. राजीव कृ ष्ण सक्सेना ने कहा भारत में 100 करोड़ लोग हिंदी समझते हैं, लेकिन हिंदी पढ़ने से दूर भाग रहे हैं। हिंदी अखबार, चैनल, सीरियल, फिल्में खूब देखी जाती हैं, मगर हिंदी बोलना कम हो रहा है। तीसरी से दसवीं कक्षा तक बच्चों को हिंदी में पढ़ाना अनिवार्य किया जाए।
हिंदी को जनता ने बनाया राष्ट्रभाषा
साहित्य अकादमी भारत सरकार के पूर्व सदस्य डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ने कहा कि हिंदी को संविधान ने राजभाषा बनाया, लेकिन जनता ने इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया है। गंगा-जमुनी तहजीब को दिल से सराहते हुए मेरठवासियों का अभिनंदन किया।
साहित्य के फनकारों की रही शिरकत
दूसरे सत्र में फणीश्वरनाथ रेणू से लेकर वर्तमान में भारत नेपाल के सांस्कृतिक-साहित्यिक संबंधों पर परिचर्चा हुई। साथ ही पत्रकारिता आमजन एक फैसला पर परिचर्चा हुई। सभागार में सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, डीएम समीर वर्मा, एसएसपी मंजिल सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर गुर्जर, भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, नेपाल के साहित्यकार आरआर चोलागाई, गोरकेसाई लोम, गणेश दत्त शर्मा, गंगा सुबेधि, सुमनेश सुमन, रिषभ देव, डॉ. घनश्याम परिश्रमी, केशवराज मुदि, कवि डॉ. ईश्वर चंद गंभीर, सुनील शर्मा, डॉ. भीम, निमेश, निखिल, मानव शर्मा, दधिराज सुबेधि, डॉ. गोपाल भंडारी, सच्चिदनांद मिश्रा, कृ ष्णकांत खन्ना, ममता वार्ष्णेय, डॉ. मीनाक्षी, कृष्ण कुमार बेदिल, मधुर पंडित, आईआईएमटी विवि के प्रति कुलाधिपति अभिनव अग्रवाल, कुलपति डॉ. अशोक कुमार, प्रति कुलपति डॉ. दीपा शर्मा, रजिस्ट्रार अशोक कुमार, डॉ. रेनू मावी, अंशु तेवतिया, विशाल शर्मा, नीरज मित्तल, अमित, संदीप, डॉ. आशा उपस्थित रहीं। संचालन कुमार पंकज ने किया।
इन पुस्तकों का हुआ विमोचन
राम गोपाल भारती की पुस्तक क्रांतिधरा, सुनील गुजराती की पुस्तकें नादान रांझणा, हिंदू धर्म की विशेषताएं, डॉ. यूसुफ खान की पालनहार, सुनील वर्मा मुसाफिर की हाफिज खुदा तुम्हारा, राजीव कृष्ण सक्सेना की बाल गीता, अंजना बोरिल की आरू-बारू को फूल का विमोचन हुआ। आईआईएमटी विवि में इस वर्ष से लागू होने वाले जीएसटी पाठ्यक्रम का विमोचन हुआ।
मातृभाषा में हो बच्चों की पढ़ाई
राज्यपाल रामनाईक ने कहा बच्चों की पढ़ाई मातृभाषा में होनी चाहिए। मैंने स्वयं दसवीं तक की पढ़ाई हिंदी में की है। कॅालेज में अकाउंटेंसी में अंग्रेजी पढ़ी थी। हिंदी से पढ़ाई की लेकिन कभी पीछे नहीं रहा। भारत में भी यह होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य है कि यहां ऐसा नहीं हो रहा। परंपरागत पाठ्यक्रमों में रोजगार की संभावनाएं कम हैं हिंदी से रोजगार नहीं मिल रहा यह एकदम गलत है।
ईवीएम में गड़बड़ी को आयोग में सिद्ध करें
नगर निकाय चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी पर राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि ऐसी कुछ शिकायतों पर निर्वाचन आयोग की नजर है। ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें केवल अभी हुई हैं ऐसा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा व लोकसभा चुनाव में भी ऐसी शिकायतें आई थीं। निर्वाचन आयोग ने शिकायतकर्ताओं को मौका दिया था कि जिन्हें यह गलत लगता है वे उसे सिद्ध करें। लेकिन कोई उसे सिद्ध नहीं कर पाया। अभी जो शिकायतें हुई हैं निश्चित तौर पर चुनाव आयोग उस पर विचार करेगा। चुनाव आयोग के अधिकार में, मैं अतिक्रमण करूं यह योग्य नहीं होगा। जिन्होंने शिकायत की है, वो अपनी बात चुनाव आयोग के सामने रखें।
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आईआईएमटी विवि में शुक्रवार को तीन दिवसीय मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने साहित्य उत्सव का शुभारंभ किया। आईआईएमटी के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता एवं ग्रीन केयर सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विजय पंडित, पूनम पंडित ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। अन्य अतिथियों में सार्क विवि दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. राजीव कृष्ण सक्सेना, भूटान के वरिष्ठ साहित्यकार छत्रपति फुएल, कनाडा के साहित्यकार सरन घई, नेपाल के साहित्यकार बसंत चौधरी, त्रिभुवन विवि नेपाल से लेखिका डॉ. श्वेता दीप्ति, भारत सरकार साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा अरुण कार्यक्रम में शामिल रहे। एनसीसी कै डेट्स व आरवीसी के बैंड ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पुस्तक प्रदर्शनी में नेपाल व भारतीय हिंदी साहित्य की किताबें रखी गई। छात्रों ने इंजीनियरिंग के मॉडल की प्रदर्शनी लगाई। नेपाल व भूटान से 50 साहित्यकारों के दल ने समारोह में भाग लिया। देश के विभिन्न राज्यों के साहित्य चिंतकों ने भागीदारी निभाई। साहित्यकार विघभनेश त्यागी ने मेरठ के 5000 साल पुराने इतिहास पर प्रकाश डाला।
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सेना के संघर्ष पर लिखा जाए साहित्य
राज्यपाल रामनाईक ने कहा मेरठ से 1857 की क्रांति फूटी, अंग्रेजों ने उस घटना को बगावत का नाम देकर साहित्य में दर्ज कराया। तब वीर सावरकर ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पुस्तक लिखकर आजादी के उस अभूतपूर्व पल को सही स्थान दिलाया। मेरठ महाभारत काल का साक्षी है। यहां साहित्य सम्मेलन का होना गौरवपूर्ण बात है। संस्कृति में अनेक साहित्य है। उन्होंने कहा साहित्य भारत के सांस्कृतिक इतिहास की पूंजी है। ये विस्तार जब हम समझेंगे तभी साहित्य का अर्थ जान पाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि संग्राम से साहित्य उपजता है। राम-रावण संघर्ष से रामायण, कौरव-पांडव संघर्ष से महाभारत बना। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। कश्मीर में 1947 से एक छद्म युद्ध चल रहा है। इस युद्ध में भारतीय सेना के संग्राम पर एक साहित्य होना चाहिए। वहां सेना कैसे लड़ रही है। यह लिखा जाना चाहिए। साहित्यकारों, कलाकारों को अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए। इसकी चर्चा समय-समय पर हो। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे साहित्य की अभिव्यक्ति को तय करें। उन्होंने बताया 2014 तक मैंने मतदाताओं को जनप्रतिनिधियों की वास्तविक रिपोर्ट लिखकर देने का काम किया।
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नेपाल-भारत में साहित्यिक भाईचारे का नाता
नेपाल की साहित्यकार डॉ. श्वेता दीप्ति ने कहा भारत-नेपाल का नाता दो सगे भाइयों जैसा रहा है। नेपाल में हिंदी को बढ़ावा देना का हरसंभव प्रयास हुआ है। भारत के संविधान में नेपाली को स्थान दिया तो नेपाल ने भी अपने संविधान में हिंदी को अपनाया। संबंधों की यह प्रगाढ़ता अटूट है। नेपाल के साहित्यकार बसंत ने भी बाल गीता व हिंदी के महान व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
भारतवासी ही हिंदी से बना रहे दूरी
सार्क विवि नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. राजीव कृ ष्ण सक्सेना ने कहा भारत में 100 करोड़ लोग हिंदी समझते हैं, लेकिन हिंदी पढ़ने से दूर भाग रहे हैं। हिंदी अखबार, चैनल, सीरियल, फिल्में खूब देखी जाती हैं, मगर हिंदी बोलना कम हो रहा है। तीसरी से दसवीं कक्षा तक बच्चों को हिंदी में पढ़ाना अनिवार्य किया जाए।
हिंदी को जनता ने बनाया राष्ट्रभाषा
साहित्य अकादमी भारत सरकार के पूर्व सदस्य डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ने कहा कि हिंदी को संविधान ने राजभाषा बनाया, लेकिन जनता ने इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया है। गंगा-जमुनी तहजीब को दिल से सराहते हुए मेरठवासियों का अभिनंदन किया।
साहित्य के फनकारों की रही शिरकत
दूसरे सत्र में फणीश्वरनाथ रेणू से लेकर वर्तमान में भारत नेपाल के सांस्कृतिक-साहित्यिक संबंधों पर परिचर्चा हुई। साथ ही पत्रकारिता आमजन एक फैसला पर परिचर्चा हुई। सभागार में सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, डीएम समीर वर्मा, एसएसपी मंजिल सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर गुर्जर, भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, नेपाल के साहित्यकार आरआर चोलागाई, गोरकेसाई लोम, गणेश दत्त शर्मा, गंगा सुबेधि, सुमनेश सुमन, रिषभ देव, डॉ. घनश्याम परिश्रमी, केशवराज मुदि, कवि डॉ. ईश्वर चंद गंभीर, सुनील शर्मा, डॉ. भीम, निमेश, निखिल, मानव शर्मा, दधिराज सुबेधि, डॉ. गोपाल भंडारी, सच्चिदनांद मिश्रा, कृ ष्णकांत खन्ना, ममता वार्ष्णेय, डॉ. मीनाक्षी, कृष्ण कुमार बेदिल, मधुर पंडित, आईआईएमटी विवि के प्रति कुलाधिपति अभिनव अग्रवाल, कुलपति डॉ. अशोक कुमार, प्रति कुलपति डॉ. दीपा शर्मा, रजिस्ट्रार अशोक कुमार, डॉ. रेनू मावी, अंशु तेवतिया, विशाल शर्मा, नीरज मित्तल, अमित, संदीप, डॉ. आशा उपस्थित रहीं। संचालन कुमार पंकज ने किया।
इन पुस्तकों का हुआ विमोचन
राम गोपाल भारती की पुस्तक क्रांतिधरा, सुनील गुजराती की पुस्तकें नादान रांझणा, हिंदू धर्म की विशेषताएं, डॉ. यूसुफ खान की पालनहार, सुनील वर्मा मुसाफिर की हाफिज खुदा तुम्हारा, राजीव कृष्ण सक्सेना की बाल गीता, अंजना बोरिल की आरू-बारू को फूल का विमोचन हुआ। आईआईएमटी विवि में इस वर्ष से लागू होने वाले जीएसटी पाठ्यक्रम का विमोचन हुआ।
मातृभाषा में हो बच्चों की पढ़ाई
राज्यपाल रामनाईक ने कहा बच्चों की पढ़ाई मातृभाषा में होनी चाहिए। मैंने स्वयं दसवीं तक की पढ़ाई हिंदी में की है। कॅालेज में अकाउंटेंसी में अंग्रेजी पढ़ी थी। हिंदी से पढ़ाई की लेकिन कभी पीछे नहीं रहा। भारत में भी यह होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य है कि यहां ऐसा नहीं हो रहा। परंपरागत पाठ्यक्रमों में रोजगार की संभावनाएं कम हैं हिंदी से रोजगार नहीं मिल रहा यह एकदम गलत है।
ईवीएम में गड़बड़ी को आयोग में सिद्ध करें
नगर निकाय चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी पर राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि ऐसी कुछ शिकायतों पर निर्वाचन आयोग की नजर है। ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें केवल अभी हुई हैं ऐसा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा व लोकसभा चुनाव में भी ऐसी शिकायतें आई थीं। निर्वाचन आयोग ने शिकायतकर्ताओं को मौका दिया था कि जिन्हें यह गलत लगता है वे उसे सिद्ध करें। लेकिन कोई उसे सिद्ध नहीं कर पाया। अभी जो शिकायतें हुई हैं निश्चित तौर पर चुनाव आयोग उस पर विचार करेगा। चुनाव आयोग के अधिकार में, मैं अतिक्रमण करूं यह योग्य नहीं होगा। जिन्होंने शिकायत की है, वो अपनी बात चुनाव आयोग के सामने रखें।