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सरहद पास के किसानों को भाया बासमती का बीज
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सरहद पास के किसानों को भाया बासमती का बीज
मोदीपुरम (मेरठ)। भारतीय बासमती की जहां विदेशों में अलग पहचान बन चुकी है। वहीं, सरहद पास के किसानों को उत्तर प्रदेश के बासमती का बीज भा रहा है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम मेरठ में बासमती के बीज की सोमवार को एक ही दिन में रिकॉर्ड तोड़ 34 लाख की बिक्री हुई। जबकि साल 2018 में एक दिन का यह रिकॉर्ड 16 लाख का था।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार बीईडीएफ देश का एकमात्र सेंटर है, जहां किसानों को गुणवत्ता युक्त बासमती बीज मिलता है। यहां के वैज्ञानिक सेंटर पर ही बासमती का बीज तैयार करते हैं। बासमती की उपज उत्तर प्रदेश के अलावा, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में होती है। विदेशों में जाने वाली बासमती भी इन राज्यों में ही पैदा होती है। हरियाणा और पंजाब के किसान पहले नंबर पर बासमती की खेती करते हैं।
रात में ही सेंटर पहुंचे किसान
इस बार नए सीजन के लिए बीईडीएफ पर सोमवार को बासमती बीज की बिक्री शुरू हो गई। ऐसा पहली बार हुआ कि किसान बीज लेने के लिए रविवार रात में ही सेंटर पर पहुंच गए और सोमवार सुबह बीज लेने के लिए होड़ लग गई। पहले ही दिन 34 लाख रुपये के बीज की बिक्री हो गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और जम्मू कश्मीर के किसान यहां बीज लेने पहुंचे।
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इन प्रजातियों का बीज
सेंटर पर पहले ही दिन 1401 प्रजाति का बीज खत्म हो गया। करीब 105 क्विंटल बीज था, जो सबसे पहले खत्म हुआ। इसके अलावा 1509, 1728, 1634, तुडल पीवी वन, 1121 की मांग बढ़ रही है, जिसको किसान खरीद रहे हैं।
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किसानों का कहना:
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हर साल ले जाते हैं
यहां बासमती के बीज की क्वालिटी इतनी अच्छी है कि खेतों पर अलग ही दिखाई देता है। फसल अच्छी होती है तो दाम भी अच्छा मिलता है। हर साल हम यहीं से बीज लेकर जाते है। -सुरजीत सिंह, हरियाणा
बॉर्डर से आए हैं
हम पाकिस्तान के बॉर्डर से बीज लेने के लिए आए है। हमें अच्छा बीज लेना है इसलिए मोदीपुरम में आए हैं। दूरी का कोई मतलब नहीं। क्वालिटी अच्छी होगी तो दाम खुद ही मिल जाएंगे। -गुरुविंद्र सिंह, अमृतसर
नहीं लगता रोग
बासमती में झंडा रोग नहीं लगता। यहां से बीज लेकर जाते है तो पैदावार अच्छी होती है। पिछले साल भी दो प्रजाति लगाई थीं, उनके अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 8-10 क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी। -राकेश मुरथल, सोनीपत
खाने में स्वादिष्ट
बासमती की मांग हर साल बढ़ रही है। क्वालिटी को लेकर भी वैज्ञानिक काफी काम कर रहे है। मंडी में पहुंचने पर बासमती जल्दी बिक जाता है, दाने में चमक बहुत ज्यादा है। खाने में भी स्वादिष्ट है। -प्रमिंद्र राणा, शामली
पहले ही आ गए
बुवाई 15 मई के बाद होगी। लेकिन फिर बीज नहीं मिलेगा। इसलिए समय से पहले ही बीज लेने आए हैं। वैज्ञानिक अच्छा बीज तैयार कर रहे हैं। -निर्मल सिंह, यमनानगर
लगातार बढ़ रही मांग
बासमती की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। बीईडीएफ का नंबर वन सेंटर होना बहुत अच्छी बात है। हम भी हर साल यहीं से बीज लेकर जाते हैं। -सुखराज सिंह, किला परीक्षितगढ़
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यह एक अच्छा प्रयास
सीजन के पहले दिन ही 34 लाख रुपये का बीज बिक गया। हमारा प्रयास यही है जो किसान सरहद के पास से आ रहे हैं, उन्हें बेहतर क्वालिटी का बीज मिले। अगले साल अधिक बीज तैयार कर किसानों को मुहैया कराया जाएगा। -डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक बीईडीएफ मेरठ
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मोदीपुरम (मेरठ)। भारतीय बासमती की जहां विदेशों में अलग पहचान बन चुकी है। वहीं, सरहद पास के किसानों को उत्तर प्रदेश के बासमती का बीज भा रहा है। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम मेरठ में बासमती के बीज की सोमवार को एक ही दिन में रिकॉर्ड तोड़ 34 लाख की बिक्री हुई। जबकि साल 2018 में एक दिन का यह रिकॉर्ड 16 लाख का था।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार बीईडीएफ देश का एकमात्र सेंटर है, जहां किसानों को गुणवत्ता युक्त बासमती बीज मिलता है। यहां के वैज्ञानिक सेंटर पर ही बासमती का बीज तैयार करते हैं। बासमती की उपज उत्तर प्रदेश के अलावा, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में होती है। विदेशों में जाने वाली बासमती भी इन राज्यों में ही पैदा होती है। हरियाणा और पंजाब के किसान पहले नंबर पर बासमती की खेती करते हैं।
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रात में ही सेंटर पहुंचे किसान
इस बार नए सीजन के लिए बीईडीएफ पर सोमवार को बासमती बीज की बिक्री शुरू हो गई। ऐसा पहली बार हुआ कि किसान बीज लेने के लिए रविवार रात में ही सेंटर पर पहुंच गए और सोमवार सुबह बीज लेने के लिए होड़ लग गई। पहले ही दिन 34 लाख रुपये के बीज की बिक्री हो गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और जम्मू कश्मीर के किसान यहां बीज लेने पहुंचे।
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इन प्रजातियों का बीज
सेंटर पर पहले ही दिन 1401 प्रजाति का बीज खत्म हो गया। करीब 105 क्विंटल बीज था, जो सबसे पहले खत्म हुआ। इसके अलावा 1509, 1728, 1634, तुडल पीवी वन, 1121 की मांग बढ़ रही है, जिसको किसान खरीद रहे हैं।
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किसानों का कहना:
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हर साल ले जाते हैं
यहां बासमती के बीज की क्वालिटी इतनी अच्छी है कि खेतों पर अलग ही दिखाई देता है। फसल अच्छी होती है तो दाम भी अच्छा मिलता है। हर साल हम यहीं से बीज लेकर जाते है। -सुरजीत सिंह, हरियाणा
बॉर्डर से आए हैं
हम पाकिस्तान के बॉर्डर से बीज लेने के लिए आए है। हमें अच्छा बीज लेना है इसलिए मोदीपुरम में आए हैं। दूरी का कोई मतलब नहीं। क्वालिटी अच्छी होगी तो दाम खुद ही मिल जाएंगे। -गुरुविंद्र सिंह, अमृतसर
नहीं लगता रोग
बासमती में झंडा रोग नहीं लगता। यहां से बीज लेकर जाते है तो पैदावार अच्छी होती है। पिछले साल भी दो प्रजाति लगाई थीं, उनके अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 8-10 क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी। -राकेश मुरथल, सोनीपत
खाने में स्वादिष्ट
बासमती की मांग हर साल बढ़ रही है। क्वालिटी को लेकर भी वैज्ञानिक काफी काम कर रहे है। मंडी में पहुंचने पर बासमती जल्दी बिक जाता है, दाने में चमक बहुत ज्यादा है। खाने में भी स्वादिष्ट है। -प्रमिंद्र राणा, शामली
पहले ही आ गए
बुवाई 15 मई के बाद होगी। लेकिन फिर बीज नहीं मिलेगा। इसलिए समय से पहले ही बीज लेने आए हैं। वैज्ञानिक अच्छा बीज तैयार कर रहे हैं। -निर्मल सिंह, यमनानगर
लगातार बढ़ रही मांग
बासमती की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। बीईडीएफ का नंबर वन सेंटर होना बहुत अच्छी बात है। हम भी हर साल यहीं से बीज लेकर जाते हैं। -सुखराज सिंह, किला परीक्षितगढ़
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यह एक अच्छा प्रयास
सीजन के पहले दिन ही 34 लाख रुपये का बीज बिक गया। हमारा प्रयास यही है जो किसान सरहद के पास से आ रहे हैं, उन्हें बेहतर क्वालिटी का बीज मिले। अगले साल अधिक बीज तैयार कर किसानों को मुहैया कराया जाएगा। -डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक बीईडीएफ मेरठ