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प्राइमरी स्कूलों के बच्चे अब प्रोजेक्टर पर सीखेंगे क,ख,ग
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प्राइमरी स्कूलों के बच्चे प्रोजेक्टर पर सीखेंगे क,ख,ग
- स्कूलों के हैड मास्टर , बीआरसी, एनपीआरसी के हाथों में होगा टेबलेट
- महानगर के 43 स्कूलों में बनायी जा रही है स्मार्ट क्लास, लगेंगे प्रोजेक्टर
राजकुमार सैनी
मेरठ। पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी प्राइमरी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में भी बच्चे अब स्मार्ट तरीकों से पढ़ाई कर सकेंगे। यानि बच्चे अब किताबों के साथ-साथ कक्षा में प्रोजेक्टर से भी पढ़ाई करेंगे। इतना ही नहीं सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य, बीआरसी, एनपीआरसी और एबीएसए को टेबलेट और लेपटॉप दिए जाएंगे। इसको लेकर सरकार ने करोड़ों का बजट खर्च करने का निर्णय लिया है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले शिक्षण सत्र में सभी सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
महानगर के 43 स्कूलों में लगाए जाएंगे प्रोजेक्टर
- प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के तहत पहले चरण में महानगर के 43 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में एक-एक स्मार्ट क्लास बनाई जाएगी। दीवारों पर पेंटिंग के साथ ही इस कक्षा में आधुनिक फर्नीचर भी होगा। प्रोजेक्ट के माध्यम से छोटे बच्चों को पिक्चर दिखाकर पढ़ाया जाएगा। वहीं क, ख, ग का ज्ञान भी प्रोजेक्टर पर ही दिया जाएगा। इस व्यवस्था से बच्चों की जहां पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ेगी साथ ही पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से भी मुकाबला कर सकेंगे।
देहात के स्कूलों तक भी पहुंचेगी सुविधा
सरकार की मंशा के अनुरूप पहले चरण में स्मार्ट क्लास के लिए शहर के स्कूलों को चुना गया है। दूसरे चरण में देहात के स्कूलों तक भी प्रोजेक्टर पहुंच जाएंगे। इससे पहले सभी स्कूलों का विद्युतीकरण किया जाएगा। ताकि प्रोजेक्टर और कंप्यूटर शिक्षा प्रभावित न हो सके। शासन ने सभी स्कूलों को हाईटेक बनाने के लिए योजना तैयार की है। शहर और देहात के कुछ उच्च प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर के लिए भी प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजे गए हैं। इसके लिए शासन से धन स्वीकृति का इंतजार है। हालांकि विभाग इस बार कंप्यूटर संचालन से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी हैडमास्टर की होगी।
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हैड मास्टर , बीआरसी, एनपीआरसी के हाथों में होगा टैबलेट
मेरठ। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के हैडमास्टरों को टेबलेट दिए जाएंगे। इनके साथ साथ ब्लॉक स्तर पर एबीएसए, बीआरसी, एनपीआरसी को भी टेबलेट मिलेगा। सरकार ने यह निर्णय कागज और समय बचाने के लिए उठाया है। इस स्तर पर विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाता है। समय से शासन और प्रशासन को सूचनाएं जाएंगी। सूचनाओं में हेराफेरी भी नहीं होगी। साथ ही सभी की जवाबदेही टेबलेट तय करेगा।
सरकारी सुविधाओं की सुरक्षा भूल जाता है विभाग
मेरठ। सर्व शिक्षा अभियान के तहत पिछले 15 साल से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 50 से अधिक कम्प्यूटर लगाए गए। जो स्कूलों में एक साल तक तो दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद कम्प्यूटर कहां गायब हो गए इसका रिकॉर्ड बेसिक शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है। यानी सरकारी मंशा और सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के सपनों पर पानी फिर गया। बताया जाता है कि बच्चों के लिए आए कुछ कम्प्यूटर बीएसए कार्यालय में पहुंच गए तो कुछ अन्य अधिकारियों के घर पर।
प्रोजेक्टर आने शुरू हो गए
स्कूलों में स्मार्ट क्लास और प्रोजेक्टर पर पढ़ाई की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। शहर के स्कूलों में प्रोजेक्टर आने शुरू हो गए हैं। हैडमास्टर, एबीएसए, बीआरसी, एनपीआरसी को मिलने वाले टेबलेट की खरीद के लिए धनराशि शासन से शीघ्र ही मिलने वाली है। - सतेन्द्र ढांका, बीएसए।
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- स्कूलों के हैड मास्टर , बीआरसी, एनपीआरसी के हाथों में होगा टेबलेट
- महानगर के 43 स्कूलों में बनायी जा रही है स्मार्ट क्लास, लगेंगे प्रोजेक्टर
राजकुमार सैनी
मेरठ। पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी प्राइमरी और उच्च प्राथमिक स्कूलों में भी बच्चे अब स्मार्ट तरीकों से पढ़ाई कर सकेंगे। यानि बच्चे अब किताबों के साथ-साथ कक्षा में प्रोजेक्टर से भी पढ़ाई करेंगे। इतना ही नहीं सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य, बीआरसी, एनपीआरसी और एबीएसए को टेबलेट और लेपटॉप दिए जाएंगे। इसको लेकर सरकार ने करोड़ों का बजट खर्च करने का निर्णय लिया है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले शिक्षण सत्र में सभी सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
महानगर के 43 स्कूलों में लगाए जाएंगे प्रोजेक्टर
- प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के तहत पहले चरण में महानगर के 43 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में एक-एक स्मार्ट क्लास बनाई जाएगी। दीवारों पर पेंटिंग के साथ ही इस कक्षा में आधुनिक फर्नीचर भी होगा। प्रोजेक्ट के माध्यम से छोटे बच्चों को पिक्चर दिखाकर पढ़ाया जाएगा। वहीं क, ख, ग का ज्ञान भी प्रोजेक्टर पर ही दिया जाएगा। इस व्यवस्था से बच्चों की जहां पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ेगी साथ ही पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से भी मुकाबला कर सकेंगे।
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देहात के स्कूलों तक भी पहुंचेगी सुविधा
सरकार की मंशा के अनुरूप पहले चरण में स्मार्ट क्लास के लिए शहर के स्कूलों को चुना गया है। दूसरे चरण में देहात के स्कूलों तक भी प्रोजेक्टर पहुंच जाएंगे। इससे पहले सभी स्कूलों का विद्युतीकरण किया जाएगा। ताकि प्रोजेक्टर और कंप्यूटर शिक्षा प्रभावित न हो सके। शासन ने सभी स्कूलों को हाईटेक बनाने के लिए योजना तैयार की है। शहर और देहात के कुछ उच्च प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर के लिए भी प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजे गए हैं। इसके लिए शासन से धन स्वीकृति का इंतजार है। हालांकि विभाग इस बार कंप्यूटर संचालन से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी हैडमास्टर की होगी।
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हैड मास्टर , बीआरसी, एनपीआरसी के हाथों में होगा टैबलेट
मेरठ। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के हैडमास्टरों को टेबलेट दिए जाएंगे। इनके साथ साथ ब्लॉक स्तर पर एबीएसए, बीआरसी, एनपीआरसी को भी टेबलेट मिलेगा। सरकार ने यह निर्णय कागज और समय बचाने के लिए उठाया है। इस स्तर पर विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाता है। समय से शासन और प्रशासन को सूचनाएं जाएंगी। सूचनाओं में हेराफेरी भी नहीं होगी। साथ ही सभी की जवाबदेही टेबलेट तय करेगा।
सरकारी सुविधाओं की सुरक्षा भूल जाता है विभाग
मेरठ। सर्व शिक्षा अभियान के तहत पिछले 15 साल से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 50 से अधिक कम्प्यूटर लगाए गए। जो स्कूलों में एक साल तक तो दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद कम्प्यूटर कहां गायब हो गए इसका रिकॉर्ड बेसिक शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है। यानी सरकारी मंशा और सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के सपनों पर पानी फिर गया। बताया जाता है कि बच्चों के लिए आए कुछ कम्प्यूटर बीएसए कार्यालय में पहुंच गए तो कुछ अन्य अधिकारियों के घर पर।
प्रोजेक्टर आने शुरू हो गए
स्कूलों में स्मार्ट क्लास और प्रोजेक्टर पर पढ़ाई की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। शहर के स्कूलों में प्रोजेक्टर आने शुरू हो गए हैं। हैडमास्टर, एबीएसए, बीआरसी, एनपीआरसी को मिलने वाले टेबलेट की खरीद के लिए धनराशि शासन से शीघ्र ही मिलने वाली है। - सतेन्द्र ढांका, बीएसए।