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संशोधित खबर किट
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:08 AM IST
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नकली किट से हो रही थी रक्त की जांच
बिजनौर। जिले में 2016 से सीएमओ के अधीन सरकारी अस्पतालों में नकली रक्त परीक्षण किटों से जांच हो रही थी। नकली किटों की पोल भाजपा के रक्त परीक्षण शिविरों में खुली। जहां नकली रक्त परीक्षण किट सभी को ग्रुप ओ पॉजिटिव दिखा रही थीं। इन किट की जांच के आधार पर ही भाजपाइयों ने रक्त परीक्षण कराया और रक्तदान किया। जांच में किट के नकली होने का खुलासा होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। औषधि विभाग ने किट का नमूना फेल होने पर कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है। कंपनी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी कराई जा सकती है।
भाजपा ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष में जुलाई माह के अंत में कार्यकर्ताओं के रक्त परीक्षण के कैंप का आयोजन किया था। कैंप में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रक्त परीक्षण किट भेजी गई थी। इन किट से भाजपा कार्यकर्ताओं का रक्त परीक्षण किया गया। कई कार्यकर्ताओं ने किट द्वारा बताए गए ब्लड ग्रुप को गलत बताया था। जांच की गई तो पता चला कि किट अधिकतर मरीजों का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव ही दिखा रही थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने दूसरी किट मंगवाकर दीं, लेकिन तब तक काफी सदस्यों की रक्त की जांच हो चुकी थी। इस मामले में विभाग ने एक किट का सैंपल जांच के राष्ट्रीय जैविक संस्थान नोएडा भेजा तो किट नकली मिली। इन किटों को शासन के आदेश पर वर्ष 2016 में खरीदा गया था। करीब एक वर्ष से जनपद वासियों के रक्त की जांच इन्हीं किट से की जा रही थी। डीआई आशुतोष मिश्रा ने बताया कि कंपनी को नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि रक्त परीक्षण किट का नमूना जांच में फेल पाया गया है। कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है। रक्त परीक्षण कैंप में किट खराब होने पर सभी किट वापस मंगवा ली गई थी। उन्होंने बताया कि रक्तदान से पहले जांच कराई जाती है। रक्त परीक्षण अभियान में 6598 भाजपा कार्यकर्ताओं ने रक्त परीक्षण कराया है। 106 कार्यकर्ताओं ने रक्तदान भी किया। भाजपा नेता जांच के बाद किट बदली जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन खून की जांच के लिए किट का ठेका एक ही कंपनी के पास है। ऐसे में दूसरी किट भी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हो सकती हैं।
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भट्ट बायोटैक की थी रक्त परीक्षण किट
बिजनौर। सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि रक्त परीक्षण किट भट्ट बायोटैक इंडिया लिमिडेट बंगलूरू कर्नाटका की थी। वर्ष 2016 में रक्त परीक्षण किट को आदित्य केमिकल वर्क लखनऊ ने शासन को सप्लाई किया था। शासन से ही उनके जिले में किट उपलब्ध कराई गई थी। शासन को सप्लायर व कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने पर जा सकती है जान
किसी मरीज को दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाना उसके लिए जानलेवा हो सकता है। चिकित्सकों अनुसार नकली किट जिस कंपनी की थी, उसी कंपनी की किट से जिला अस्पताल में मरीजों का रक्त परीक्षण हुआ और मरीजों का रक्त लिया गया है। कंपनी की जांच में यह मामला पकड़ में आने पर हड़कंप मचा हुआ है।
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बिजनौर। जिले में 2016 से सीएमओ के अधीन सरकारी अस्पतालों में नकली रक्त परीक्षण किटों से जांच हो रही थी। नकली किटों की पोल भाजपा के रक्त परीक्षण शिविरों में खुली। जहां नकली रक्त परीक्षण किट सभी को ग्रुप ओ पॉजिटिव दिखा रही थीं। इन किट की जांच के आधार पर ही भाजपाइयों ने रक्त परीक्षण कराया और रक्तदान किया। जांच में किट के नकली होने का खुलासा होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। औषधि विभाग ने किट का नमूना फेल होने पर कंपनी को नोटिस जारी कर दिया है। कंपनी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी कराई जा सकती है।
भाजपा ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष में जुलाई माह के अंत में कार्यकर्ताओं के रक्त परीक्षण के कैंप का आयोजन किया था। कैंप में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रक्त परीक्षण किट भेजी गई थी। इन किट से भाजपा कार्यकर्ताओं का रक्त परीक्षण किया गया। कई कार्यकर्ताओं ने किट द्वारा बताए गए ब्लड ग्रुप को गलत बताया था। जांच की गई तो पता चला कि किट अधिकतर मरीजों का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव ही दिखा रही थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने दूसरी किट मंगवाकर दीं, लेकिन तब तक काफी सदस्यों की रक्त की जांच हो चुकी थी। इस मामले में विभाग ने एक किट का सैंपल जांच के राष्ट्रीय जैविक संस्थान नोएडा भेजा तो किट नकली मिली। इन किटों को शासन के आदेश पर वर्ष 2016 में खरीदा गया था। करीब एक वर्ष से जनपद वासियों के रक्त की जांच इन्हीं किट से की जा रही थी। डीआई आशुतोष मिश्रा ने बताया कि कंपनी को नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि रक्त परीक्षण किट का नमूना जांच में फेल पाया गया है। कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है। रक्त परीक्षण कैंप में किट खराब होने पर सभी किट वापस मंगवा ली गई थी। उन्होंने बताया कि रक्तदान से पहले जांच कराई जाती है। रक्त परीक्षण अभियान में 6598 भाजपा कार्यकर्ताओं ने रक्त परीक्षण कराया है। 106 कार्यकर्ताओं ने रक्तदान भी किया। भाजपा नेता जांच के बाद किट बदली जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन खून की जांच के लिए किट का ठेका एक ही कंपनी के पास है। ऐसे में दूसरी किट भी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हो सकती हैं।
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भट्ट बायोटैक की थी रक्त परीक्षण किट
बिजनौर। सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि रक्त परीक्षण किट भट्ट बायोटैक इंडिया लिमिडेट बंगलूरू कर्नाटका की थी। वर्ष 2016 में रक्त परीक्षण किट को आदित्य केमिकल वर्क लखनऊ ने शासन को सप्लाई किया था। शासन से ही उनके जिले में किट उपलब्ध कराई गई थी। शासन को सप्लायर व कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने पर जा सकती है जान
किसी मरीज को दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाना उसके लिए जानलेवा हो सकता है। चिकित्सकों अनुसार नकली किट जिस कंपनी की थी, उसी कंपनी की किट से जिला अस्पताल में मरीजों का रक्त परीक्षण हुआ और मरीजों का रक्त लिया गया है। कंपनी की जांच में यह मामला पकड़ में आने पर हड़कंप मचा हुआ है।