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पांच करोड़ की दवाएं उधार...कैसे होगा उपचार, उधार चुकाने को भी नहीं मिला बजट, अब होगा दवाओं का टोटा
Thu, 27 Jun 2019 03:44 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Thu, 27 Jun 2019 03:44 AM IST
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मेरठ के मेडिकल कॉलेज से संकट के बादल हट नहीं रहे हैं। पहले एमबीबीएस की 50 सीटें कम हो गईं तो अब मुर्दे के एक्सरे करने से फजीहत हो रही है। दूसरी तरफ, मरीजों का इलाज उधार की दवाओं से किया जा रहा है। मेडिकल पर दवाओं का पांच करोड़ रुपये उधार है, जो बजट न आने के कारण चुकाया नहीं गया है।
बजट के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन शासन से साफ निर्देश दिए हैं कि इसी बजट में काम चलाना पड़ेगा। ऐसे में मरीजों के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन भी परेशान हैं, क्योंकि नियमानुसार 347 तरह की पूरी दवाइयां रखनी होगी और अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ानी होगी। यदि बाहर से दवाइयां लिखी तो कार्रवाई होगी। मेडिकल में इस वक्त करीब 300 तरह की दवाइयां ही मौजूद हैं।
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बजट के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन शासन से साफ निर्देश दिए हैं कि इसी बजट में काम चलाना पड़ेगा। ऐसे में मरीजों के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन भी परेशान हैं, क्योंकि नियमानुसार 347 तरह की पूरी दवाइयां रखनी होगी और अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ानी होगी। यदि बाहर से दवाइयां लिखी तो कार्रवाई होगी। मेडिकल में इस वक्त करीब 300 तरह की दवाइयां ही मौजूद हैं।
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मरीज बढ़े, बजट घटा
दरअसल मेडिकल कॉलेज का पांच करोड़ रुपये का बजट कम कर दिया गया है। वर्ष 2017-18 में मेडिकल कॉलेज को 15 करोड़ रुपये का बजट मिला था, जिसे 2018-19 में घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, इस कारण करीब पांच करोड़ रुपये की दवाइयां उधार मंगानी पड़ी हैं, जिनका भुगतान नहीं किया गया है। यह हालात तब हैं जब मरीजों की संख्या 2 लाख 62 हजार 863 बढ़ गई है।
पिछले साल आए साढ़े नौ लाख मरीज
वर्ष 2018-19 में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए। इनमें से 33289 मरीज भर्ती किए गए। 20 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े ऑपरेशन किए गए। साल 2017-18 में मेडिकल कॉलज में छह लाख 87 हजार 561 मरीज वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में आए थे। इनमें से 28 हजार 832 मरीज भर्ती किए गए थे। 17 हजार 989 मरीजों के मेजर और माइनर (छोटे-बड़े) ऑपरेशन किए गए थे।
15 करोड़ रुपये बजट करने की मांग
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बजट को बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करने की मांग की। वर्ष 2017-18 में 15 करोड़ रुपये बजट मुहैया कराया गया था, लेकिन 2018-19 में इसे घटाकर 10 करोड़ रुपये बजट कर दिया गया था। बजट बढ़ने केबाद ही दवाओं का संकट कम हो सकेगा। -डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
दरअसल मेडिकल कॉलेज का पांच करोड़ रुपये का बजट कम कर दिया गया है। वर्ष 2017-18 में मेडिकल कॉलेज को 15 करोड़ रुपये का बजट मिला था, जिसे 2018-19 में घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, इस कारण करीब पांच करोड़ रुपये की दवाइयां उधार मंगानी पड़ी हैं, जिनका भुगतान नहीं किया गया है। यह हालात तब हैं जब मरीजों की संख्या 2 लाख 62 हजार 863 बढ़ गई है।
पिछले साल आए साढ़े नौ लाख मरीज
वर्ष 2018-19 में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए। इनमें से 33289 मरीज भर्ती किए गए। 20 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े ऑपरेशन किए गए। साल 2017-18 में मेडिकल कॉलज में छह लाख 87 हजार 561 मरीज वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में आए थे। इनमें से 28 हजार 832 मरीज भर्ती किए गए थे। 17 हजार 989 मरीजों के मेजर और माइनर (छोटे-बड़े) ऑपरेशन किए गए थे।
15 करोड़ रुपये बजट करने की मांग
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बजट को बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करने की मांग की। वर्ष 2017-18 में 15 करोड़ रुपये बजट मुहैया कराया गया था, लेकिन 2018-19 में इसे घटाकर 10 करोड़ रुपये बजट कर दिया गया था। बजट बढ़ने केबाद ही दवाओं का संकट कम हो सकेगा। -डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज