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डेयरियों की गिनती शुरू, जाएंगी शहर से बाहर
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डेयरियों की गिनती शुरू, जाएंगी शहर से बाहर
हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने काम शुरू किया, पशु भी गिने जा रहे
बड़े स्तर पर होंगे डेयरियों के चालान, भारी जुर्माना लगेगा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हाईकोर्ट की फटकार और आदेश के बाद नगर निगम ने डेयरियों के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी है। पहले चरण में प्रत्येक वार्ड में संचालित डेयरियों की संख्या और उनमें पल रहे पशुओं की गणना करानी शुरू की है। ताकि पशुओं की संख्या के आधार पर कैटल कालोनी विकसित करने पर काम हो सके।
शहर में दो हजार से अधिक डेयरी संचालित हैं, जिनमें लगभग 20 हजार पशु बताए जाते हैं। प्रतिदिन डेयरियों से 200 मीट्रिक टन गोबर और अन्य कूड़ा निकलता है। यह गोबर और कूड़ा शहर से बाहर भेजने की बजाय डेयरी संचालक सबमर्सिबल के पानी के साथ नाली और नालों में बहा देते हैं। इससे शहर के सभी नाली और नाले हर समय चोक रहते हैं। शहर में गंदगी पसरी रहती है। नालों की सफाई पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन हालात बदतर हैं।
न्यायालय के आदेश की कई बार हो चुकी अवहेलना
डेयरियों के खिलाफ न्यायालय कई बार निर्णय दे चुका है। निगम प्रशासन काम भी शुरू करता है। लेकिन सफाई इंस्पेक्टर और सफाई नायक धरातल पर उतारने की बजाय, आदेशों को रद्दी की टोकरी दिखा देते हैं। जिसका सबूत ये है कि नगर निगम शहर से एक भी डेयरी को बाहर नहीं कर पाया है।
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चालान के नाम पर औपचारिकता
न्यायालय और निगम प्रशासन की सख्ती के बाद नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी डेयरियों के चालान करने का निर्णय लेते हैं। कुछ चालान काटे भी जाते हैं। लेकिन रस्म अदायगी के बाद पूरा कार्यक्रम बंद कर दिया जाता है। अनेक बार नगर निगम की बोर्ड बैठकों में डेयरी प्रकरण सुर्खियां बना। पार्षदों ने डेयरियों के चालान पांच से दस हजार रुपये तक काटने का प्रस्ताव पास किया। लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बोर्ड के प्रस्ताव पर कोई अमल नहीं कर पाए।
न्यायालय की सख्ती पर सत्यापन शुरू
डेयरियों को शहर से बाहर करने के हाईकोर्ट के आदेश का असर शहर में बुधवार को दिखाई दिया। सफाई नायक अपने-अपने वार्डों में संचालित डेयरी और पशुओं का सत्यापन करने के लिए निकले। सभी डेयरियों का सत्यापन किया जाएगा। ताकि कैटल कालोनी विकसित करने के लिए एमडीए को पूरी रिपोर्ट दी जा सके।
वर्जन
कैटल कालोनी विकसित करने का काम एमडीए का है। हमने सभी डेयरियों को बाहर करने के लिए सत्यापन शुरू कर दिया है। एक-एक डेयरी को शहर से बाहर किया जाएगा। न्यायालय के आदेश पर अमल होगा।
- मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
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हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने काम शुरू किया, पशु भी गिने जा रहे
बड़े स्तर पर होंगे डेयरियों के चालान, भारी जुर्माना लगेगा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हाईकोर्ट की फटकार और आदेश के बाद नगर निगम ने डेयरियों के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी है। पहले चरण में प्रत्येक वार्ड में संचालित डेयरियों की संख्या और उनमें पल रहे पशुओं की गणना करानी शुरू की है। ताकि पशुओं की संख्या के आधार पर कैटल कालोनी विकसित करने पर काम हो सके।
शहर में दो हजार से अधिक डेयरी संचालित हैं, जिनमें लगभग 20 हजार पशु बताए जाते हैं। प्रतिदिन डेयरियों से 200 मीट्रिक टन गोबर और अन्य कूड़ा निकलता है। यह गोबर और कूड़ा शहर से बाहर भेजने की बजाय डेयरी संचालक सबमर्सिबल के पानी के साथ नाली और नालों में बहा देते हैं। इससे शहर के सभी नाली और नाले हर समय चोक रहते हैं। शहर में गंदगी पसरी रहती है। नालों की सफाई पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन हालात बदतर हैं।
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न्यायालय के आदेश की कई बार हो चुकी अवहेलना
डेयरियों के खिलाफ न्यायालय कई बार निर्णय दे चुका है। निगम प्रशासन काम भी शुरू करता है। लेकिन सफाई इंस्पेक्टर और सफाई नायक धरातल पर उतारने की बजाय, आदेशों को रद्दी की टोकरी दिखा देते हैं। जिसका सबूत ये है कि नगर निगम शहर से एक भी डेयरी को बाहर नहीं कर पाया है।
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चालान के नाम पर औपचारिकता
न्यायालय और निगम प्रशासन की सख्ती के बाद नगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी डेयरियों के चालान करने का निर्णय लेते हैं। कुछ चालान काटे भी जाते हैं। लेकिन रस्म अदायगी के बाद पूरा कार्यक्रम बंद कर दिया जाता है। अनेक बार नगर निगम की बोर्ड बैठकों में डेयरी प्रकरण सुर्खियां बना। पार्षदों ने डेयरियों के चालान पांच से दस हजार रुपये तक काटने का प्रस्ताव पास किया। लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बोर्ड के प्रस्ताव पर कोई अमल नहीं कर पाए।
न्यायालय की सख्ती पर सत्यापन शुरू
डेयरियों को शहर से बाहर करने के हाईकोर्ट के आदेश का असर शहर में बुधवार को दिखाई दिया। सफाई नायक अपने-अपने वार्डों में संचालित डेयरी और पशुओं का सत्यापन करने के लिए निकले। सभी डेयरियों का सत्यापन किया जाएगा। ताकि कैटल कालोनी विकसित करने के लिए एमडीए को पूरी रिपोर्ट दी जा सके।
वर्जन
कैटल कालोनी विकसित करने का काम एमडीए का है। हमने सभी डेयरियों को बाहर करने के लिए सत्यापन शुरू कर दिया है। एक-एक डेयरी को शहर से बाहर किया जाएगा। न्यायालय के आदेश पर अमल होगा।
- मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त